
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है। लेह में निर्माणाधीन लद्दाख के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज को समयबद्ध तरीके से शुरू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भर्ती नियमों में विशेष एकमुश्त छूट (One-Time Relaxation) प्रदान की है। इस महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले के साथ ही मेडिकल कॉलेज के लिए स्वीकृत 103 नियमित पदों पर प्रारंभिक एवं चरणबद्ध भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। इस कदम से अत्यधिक विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठोर जलवायु वाले सीमांत क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए डॉक्टर बनने की राह आसान होगी।
सामान्य नियमों के मुताबिक, किसी भी नए मेडिकल कॉलेज में संकाय सदस्यों (Faculty) और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया तभी शुरू की जाती है जब कॉलेज का बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) कम से कम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका हो। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति, लंबी और कड़ाके की सर्दियां तथा सीमित निर्माण कार्य सत्र (Working Window) को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इस 80 प्रतिशत निर्माण की अनिवार्य शर्त में छूट दी है। यदि इस नियम में ढील न दी जाती, तो निर्माण पूरा होने के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में सालों का अतिरिक्त विलंब हो जाता और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू नहीं हो पाता। केंद्र के इस रणनीतिक हस्तक्षेप से निर्माण कार्य चलने के साथ-साथ फैकल्टी और नॉन-टीचिंग स्टाफ की चयन प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ सकेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अब कॉलेज के लिए स्वीकृत कुल 103 नियमित पदों पर चरणबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगा। इन पदों में डीन, विभिन्न चिकित्सा विभागों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट्स के साथ-साथ प्रयोगशाला तकनीशियन, नर्सिंग स्टाफ और प्रशासनिक संवर्ग के तकनीकी पद शामिल हैं।
प्रशासन का उद्देश्य नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के कड़े मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक फैकल्टी और बुनियादी स्टाफ की उपलब्धता को पहले ही सुनिश्चित करना है। चूंकि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में अनुभवी डॉक्टरों और वरिष्ठ प्रोफेसरों को आकर्षित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, इसलिए अग्रिम भर्ती से प्रशासन को पर्याप्त समय मिलेगा ताकि देश भर से योग्य चिकित्सा शिक्षकों को लेह लाया जा सके और आवश्यक होने पर उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सके।
प्रशासन की योजना के अनुसार, लेह में बन रहे इस पहले मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एमबीबीएस (MBBS) की पहली बैच की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक लद्दाख के मेधावी छात्रों को मेडिकल की उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए जम्मू, श्रीनगर, दिल्ली या देश के अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां सीटों की संख्या सीमित होती थी।
गृह क्षेत्र में पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित होने से स्थानीय छात्रों को न केवल अपनी ही धरती पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, बल्कि ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के माध्यम से देश भर के छात्र भी लेह में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे केंद्र शासित प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी को स्थायी रूप से दूर करने में मदद मिलेगी, क्योंकि यहां से उत्तीर्ण होने वाले डॉक्टर स्थानीय प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सेवाएं दे सकेंगे।
यह मेडिकल कॉलेज लेह स्थित एसएनएम (सोनम नोरबू मेमोरियल) अस्पताल से संबद्ध किया जा रहा है, जिसे आधुनिक सुविधाओं से लैस 500 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी शिक्षण अस्पताल के रूप में उन्नत किया जा रहा है। लद्दाख के सुदूरवर्ती नुब्रा, चांगथांग और कारगिल के सीमांत गांवों के मरीजों को अक्सर छोटी-बड़ी गंभीर बीमारियों, हृदय रोग, न्यूरो या जटिल सर्जरी के लिए एयरलिफ्ट होकर चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत खर्चीला और आपात स्थिति में जानलेवा साबित होता था।
मेडिकल कॉलेज के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद लेह में ही उन्नत डायग्नोस्टिक लैब, एमआरआई, सीटी स्कैन, आधुनिक आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और क्रिटिकल केयर यूनिट्स की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों, स्थानीय जनजातीय आबादी और भारी संख्या में पहुंचने वाले घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को किसी भी आपात स्थिति में विश्वस्तरीय आपातकालीन चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
वर्ष 2019 में लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही केंद्र सरकार का जोर इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कायाकल्प पर रहा है। शीतकाल में कई महीनों तक शेष भारत से कटे रहने वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में आधुनिक मेडिकल कॉलेज की स्थापना आत्मनिर्भर भारत और संतुलित क्षेत्रीय विकास का सशक्त उदाहरण है।
लेह प्रशासन का कहना है कि भर्ती नियमों में छूट मिलने के तुरंत बाद भर्ती विज्ञापन, पात्रता शर्तें और आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत नोटिफिकेशन जल्द ही आधिकारिक पोर्टल पर जारी किया जाएगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण और स्टाफ चयन की यह दोहरी रणनीति लद्दाख के स्वास्थ्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित होगी।
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