News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर इलाके में गुरुवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब हुसैनिया झुग्गी बस्ती में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि देखते ही देखते दर्जनों झोपड़ियां जलकर राख हो गई। इस हादसे में सबसे ज्यादा खौफनाक मंजर तब देखने को मिला जब झुग्गियों में रखे रसोई गैस के सिलेंडर एक के बाद एक धमाकों के साथ फटने लगे। धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा और आसमान में काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा गया।
धमाकों से दहला विकास नगर, जान बचाने को भागे लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर झुग्गियों में रखे कम से कम 3 से 4 गैस सिलेंडरों में ब्लास्ट हुआ। इन धमाकों के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और पास की अन्य झुग्गियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोग अपने बच्चों और जो भी सामान हाथ लगा, उसे लेकर जान बचाने के लिए सड़कों की ओर भागे। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की।
लाखों का सामान जलकर खाक, राहत कार्य जारी
इस अग्निकांड में गरीब मजदूरों की जमा-पूंजी और आशियाना पूरी तरह तबाह हो गया है। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के रास्तों को सील कर दिया है ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। हालांकि, अभी तक किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आर्थिक नुकसान बहुत बड़े पैमाने पर बताया जा रहा है। आग लगने के स्पष्ट कारणों की जांच की जा रही है, प्राथमिक तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट या खाना बनाते समय लगी चिंगारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या प्रशासन की लापरवाही पड़ रही भारी?
लखनऊ के भीड़भाड़ वाले इलाकों और झुग्गी बस्तियों में आग लगने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विकास नगर की यह घटना एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान लगाती है। संकरी गलियों के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है, जिससे नुकसान का दायरा बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता और अवैध रूप से रखे सिलेंडरों पर लगाम होती, तो शायद आज इतने परिवारों के सिर से छत नहीं छिनती।
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