लखनऊ कोचिंग हादसा: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और अनिल राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, कहा-‘सपा के भ्रष्टाचार के इको-सिस्टम का नतीजा है यह अग्निकांड’

लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक कोचिंग सेंटर अग्निकांड (Lucknow Coaching Fire Tragedy) के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। इस हादसे को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और सांसद अखिलेश यादव के बयानों पर प्रदेश सरकार ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak) और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी सत्ता की छटपटाहट में ‘लाशों पर राजनीति’ कर रही है, जबकि इस पूरे हादसे की मुख्य जड़ें खुद सपा शासनकाल के भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।

ब्रजेश पाठक का पलटवार: ‘२०१६ में प्लॉट आवंटन और अवैध कनेक्शन आपकी सरकार में हुआ’

हादसे पर अखिलेश यादव की बयानबाजी का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बेहद तीखे लहजे में कहा कि जब पूरा देश इस दुखद हादसे में १५ मासूमों की मौत से मर्माहत है, तब विपक्ष इस पर ओछी राजनीति कर रहा है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा आरोप:

“सपा मुखिया अच्छी तरह जानते हैं कि २०१६ में इस विवादित प्लॉट का आवंटन, उसमें हुआ भ्रष्टाचार और बिजली का अवैध कनेक्शन उन्हीं की सरकार के समय में हुआ था। आपकी (सपा) ही सरकार ने पहले उस जगह को सील किया और बाद में भ्रष्टाचार के चलते उसे अनसील (सील खोलना) भी कर दिया था। समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि आज पूरे प्रदेश को इसके भयानक नतीजे भुगतने पड़ रहे हैं। हमारी पूरी सरकार लखनऊ के उन नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ी है जिन्होंने अपने अपनों को खोया है, कृपया इस पर राजनीति न करें।”

अनिल राजभर का हमला: ‘एसी कमरों में बैठकर बयान दे रहे अखिलेश, पीड़ितों से मिलने का समय नहीं’

संतकबीरनगर पहुंचे उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने भी इस हादसे पर गहरा दुःख जताते हुए समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत एसआईटी (SIT) का गठन किया, जिसके चलते मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो एक मिसाल बनेगी।

राजभर ने हमला जारी रखते हुए कहा, “अखिलेश यादव सिर्फ एयर कंडीशन (AC) कमरों में बैठकर बयान जारी कर रहे हैं। उनके पास पीड़ित परिवारों के बीच जमीन पर जाकर उनका दुःख बांटने का समय नहीं है। इस घटना ने समाजवादी पार्टी के उस पुराने भ्रष्टाचार के इको-सिस्टम को उजागर कर दिया है, जो अवैध निर्माणों को बढ़ावा देता था।”

एलडीए का बड़ा एक्शन: १८ इंजीनियरों पर गिरेगी गाज, शासन को भेजी रिपोर्ट

प्रशासनिक मोर्चे पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रारंभिक जांच पूरी करते हुए अवैध बिल्डिंग के निर्माण और उसकी निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है:

  • इनकी तय हुई जवाबदेही: एलडीए ने तत्कालीन विहित प्राधिकारी, ०५ जोनल अधिकारियों और १८ इंजीनियरों को इस अवैध इमारत के निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मुख्य दोषी पाया है।

  • शासन को संस्तुति: उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इन सभी २३ दोषी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति (Recommendation) करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को भेज दी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन सभी पर निलंबन और विभागीय जांच की बड़ी गाज गिर सकती है।

सीएम योगी की हाई-लेवल बैठक: ‘बेसमेंट में नहीं चलेंगी कोचिंग और नर्सिंग होम, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं’

अग्निकांड की विस्तृत और बिंदुवार समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष और हाई-लेवल बैठक की। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि लखनऊ की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना पूरे राज्य के लिए एक बड़ा सबक है और अब सूबे में फायर सेफ्टी (Fire Safety Standards) मानकों से रत्ती भर भी समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश:

  1. राज्यव्यापी फायर ऑडिट: प्रदेश के हर जिले में विशेष टीमों का गठन कर व्यावसायिक इमारतों, कोचिंग सेंटरों और अस्पतालों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया जाए।

  2. नागरिकों का उत्पीड़न न हो: सीएम ने स्पष्ट किया कि ‘पहले जागरूकता, फिर कार्रवाई’ के सिद्धांत पर काम हो। अभियान के नाम पर किसी भी वैध या आम नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

  3. कमर्शियल बेसमेंट पर प्रतिबंध: किसी भी इमारत का इस्तेमाल केवल उसी काम के लिए होगा जिसकी अनुमति एलडीए से मिली है। किसी भी सूरत में इमारतों के बेसमेंट (तहखाने) में कोचिंग सेंटर या नर्सिंग होम चलाने की इजाज़त नहीं दी जाएगी

  4. रिस्पॉन्स टाइम में कमी: आपातकालीन सेवाओं (फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस) के रिस्पॉन्स टाइम को और अधिक घटाने के लिए आधुनिक और ठोस कदम उठाए जाएं।