लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड: SIT जांच में भयानक सच आया सामने, 5 जोनल अफसरों समेत 18 इंजीनियर दोषी; अवैध इमारत पर चलेगा बुलडोजर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड मामले में गठित एसआईटी (SIT) की जांच में बेहद चौंकाने वाले और रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हुए हैं। वरिष्ठ पत्रकार विशाल रघुवंशी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत को नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया था। जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग के भीतर धुएं को बाहर निकालने (Ventilation) की कोई व्यवस्था ही नहीं थी।

पूरी इमारत में बेहद असुरक्षित और लापरवाही भरे तरीके से अंदर ही एसी (AC) के आउटर और अन्य हाई-वोल्टेज बिजली के उपकरण ठूंस दिए गए थे। प्रतिष्ठान के मैनेजर, डायरेक्टर और उनके करीबियों ने मिलकर मासूम बच्चों और वहां आने वाले लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया और फायर सेफ्टी (अग्निशमन व्यवस्था) का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया था।

निकास द्वार गायब और दरवाज़े बंद; आरोपियों ने जानबूझकर की लापरवाही

एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि पूरी बिल्डिंग में किसी भी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में बाहर निकलने या सुरक्षित प्रवेश करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। भवन के भीतर आने और जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य संकरा रास्ता था। किसी भी प्रकार का कोई अन्य निकास द्वार या आकस्मिक द्वार (Emergency Exit) न होना ही सबसे बड़ी आफत बना।

इसके साथ ही पूरी इमारत में बिजली की वायरिंग और उपकरण बिना किसी मानक के अनियमित तरीके से लगाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों को इस बात का भली-भांति अंदाजा था कि अगर कभी कोई शॉर्ट सर्किट या आकस्मिक स्थिति बनती है, तो अंदर मौजूद लोगों की जान जा सकती है। इसके बावजूद, मोटी कमाई के चक्कर में आरोपियों ने जानबूझकर इस गंभीर खतरे को नजरअंदाज किया और इतनी बड़ी लापरवाही की।

बंद दरवाजों ने ली 15 जिंदगियां, एलडीए के 18 इंजीनियरों पर गिरी गाज

इस दर्दनाक हादसे की सबसे दुखद बात यह रही कि आग लगने के बाद बिल्डिंग का मुख्य डोर (दरवाजा) लॉक हो गया था। इस लॉक डोर की वजह से ही भीतर फंसे 15 लोग और छात्र समय रहते बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने व झुलसने के कारण उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस पूरे मामले में एसआईटी को एक बड़ी रिपोर्ट सौंपी है। एलडीए के मुताबिक, अलीगंज में जिस अवैध व्यावसायिक बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, उस मामले में तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ-साथ 5 जोनल अधिकारियों (Zonal Officers) और 18 जूनियर व असिस्टेंट इंजीनियरों को सीधे तौर पर दोषी पाया गया है। इन सभी दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की संस्तुति करते हुए एलडीए वीसी (LDA VC) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

अवैध बिल्डिंग पर 15 दिन में चलेगा एलडीए का बुलडोजर

अलीगंज में हुए इस बेहद संवेदनशील और दर्दनाक हादसे के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण बेहद सख्त रुख अख्तियार किए हुए है। जिस इमारत में कोचिंग सेंटर और पेट क्लीनिक चल रहा था, उसे पूरी तरह से अवैध निर्माण घोषित कर दिया गया है।

एलडीए ने भवन मालिकों को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर भवन मालिकों की तरफ से कोई संतोषजनक और वैध जवाब नहीं मिला, तो इस पूरी अवैध इमारत को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया जाएगा। प्रारंभिक जांच में अवैध निर्माण को संरक्षण देने और क्षेत्र की सही तरीके से निगरानी न करने के आरोपों के तहत ही एलडीए ने अपने अधिकारियों और इंजीनियरों की जवाबदेही तय की है।

कोर्ट का सख्त एक्शन: मकान मालिक समेत चारों आरोपी भेजे गए जेल

इस अग्निकांड के बाद पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से एक्शन मोड में है। मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने अलीगंज अग्निकांड में गिरफ्तार किए गए चारों मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।

अदालत ने बिल्डिंग के मुख्य मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, बिल्डिंग के भीतर ‘अलीगंज पेट शॉप एंड क्लीनिक’ संचालित करने वाले रामकृष्ण उपाध्याय, और इसी इमारत में ‘हेक्सा थ्री डी एनिमेशन’ (Hexa 3D Animation) व ‘हेड हूपर्स इंस्टीट्यूट’ (Head Hoopers Institute) नाम से कोचिंग सेंटर चलाने वाले तुशाक कृष्णा जायसवाल और सुरेश कुमार साहू को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है। इस हादसे के बाद अब लखनऊ के अन्य इलाकों में चल रहे अवैध कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक इमारतों की फायर ऑडिट की मांग तेज हो गई है।