आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले हल्के मालवाहक वाहन (LCV) चालकों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। टोल प्लाजा के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी और खराब मशीनों के कारण वाहन चालकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। डिजिटल न्यूज़ और वेब पोर्टल्स के लिए इस खबर का एक SEO-अनुकूल और संरचित सारांश यहाँ दिया गया है:
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से नुकसान: एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा (फतेहाबाद और लखनऊ) पर सॉफ्टवेयर की खामी के कारण 3,000 किलोग्राम भार वाले हल्के मालवाहक वाहनों को 12,000 किलोग्राम से अधिक की श्रेणी में रखा जा रहा है।
अतिरिक्त टोल की वसूली: नियमानुसार इन वाहनों से 670 रुपये का टोल लिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बजाय 1,015 रुपये प्रति यात्रा वसूले जा रहे हैं। यानी प्रति वाहन 345 रुपये अतिरिक्त चार्ज किया जा रहा है।
प्रतिदिन लाखों का ‘खेल’: इस एक्सप्रेसवे से हर दिन लगभग 2,000 हल्के मालवाहक वाहन (जैसे महिंद्रा पिकअप, टाटा-407) गुजरते हैं। इस हिसाब से यूपीडा (UPEIDA) को प्रतिदिन 6.90 लाख रुपये का अतिरिक्त फायदा हो रहा है।
शिकायत पर रिफंड, लेकिन सुधार नहीं: अगर कोई जागरूक वाहन चालक इस अतिरिक्त टोल कटने की शिकायत करता है, तो उसे पैसे (जैसे 120 या 100 रुपये) वापस कर दिए जाते हैं, लेकिन सिस्टम की मूल समस्या और वाहनों की श्रेणी में सुधार नहीं किया जा रहा है।
मशीनें एक साल से फांक रही हैं धूल: फतेहाबाद टोल प्लाजा की 12 लेनों में से 7 में ‘वे-इन-मोशन’ (चलते हुए वजन तौलने वाली) मशीनें लगी हैं, लेकिन ये पिछले एक साल से खराब पड़ी हैं। शिकायतों के बावजूद यूपीडा के अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
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