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रोहित रॉय के बिगड़े बोल: जिस टीवी ने बनाया स्टार, उसी छोटे पर्दे को अभिनेता ने कह दिया ‘कूड़ेदान

भारतीय मनोरंजन जगत में अपने दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर अभिनेता रोहित रॉय इन दिनों अपने एक बेहद विवादित और चौंकाने वाले बयान को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। टेलीविजन की दुनिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले और छोटे पर्दे के जरिए घर-घर में अपनी एक खास पहचान बनाने वाले रोहित रॉय ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ऐसा बयान दे दिया है, जिसने टेलीविज़न इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है। जिस माध्यम ने उन्हें रातों-रात शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचाया और देश के कोने-कोने में एक जाना-माना चेहरा बनाया, उसी टेलीविजन इंडस्ट्री को उन्होंने सीधे तौर पर ‘कूड़ेदान’ की संज्ञा दे डाली है। अभिनेता ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह तक कह दिया कि छोटे पर्दे के माहौल में काम करने वाले लोगों को आपस में बात करने का सलीका और बुनियादी तमीज तक नहीं है। उनके इस तीखे और आक्रामक बयान के सामने आने के बाद से टीवी जगत के तमाम कलाकारों, निर्माताओं और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, जहां कुछ लोग उनके समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग उनके इस रवैये को उपकृत और कृतघ्नता करार दे रहे हैं।

रोहित रॉय ने अपने हालिया साक्षात्कारों में मनोरंजन उद्योग के भीतर के अनुभवों को साझा करते हुए टेलीविजन काम करने के तरीकों पर खुलकर अपनी असहमति और नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना था कि टीवी धारावाहिकों के सेट पर काम करने का जो माहौल होता है, वह कई बार मानसिक रूप से इतना थकाऊ और तनावपूर्ण होता है कि वहां किसी भी रचनात्मक कला का सम्मान नहीं बचता है। अभिनेताओं और तकनीशियनों को बिना रुके लंबी-लंबी शिफ्टों में काम करना पड़ता है, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत जिंदगी प्रभावित होती है, बल्कि काम की गुणवत्ता भी धीरे-धीरे गिरने लगती है। इसी व्यवस्था और वहां के वर्क कल्चर पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की कि उन्हें अब छोटे पर्दे के इस प्रकार के कामकाज का तरीका किसी डंपिंग यार्ड या कूड़ेदान जैसा महसूस होता है। उनके इस तरह के कड़े शब्दों ने उन तमाम उभरते हुए कलाकारों को भी हैरान कर दिया है जो टेलीविजन को अपनी मेहनत के बल पर करियर की पहली सीढ़ी मानकर आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।

टेलीविजन के इतिहास में रोहित रॉय का नाम उन शुरुआती अभिनेताओं में शुमार किया जाता है जिन्होंने न केवल डेली सोप में अपनी बेहतरीन अदायगी से दर्शकों का दिल जीता, बल्कि अपने चार्म से एक अलग फैन फॉलोइंग तैयार की थी। ऐसे में जब एक ऐसा अभिनेता जिसने अपनी सफलता की नींव इसी छोटे पर्दे पर रखी हो, वह सार्वजनिक मंच से इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है, तो आम जनता और इंडस्ट्री के अंदरूनी लोग उससे सवाल पूछना शुरू कर देते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि आज जिस स्टारडम और शोहरत का आनंद रोहित रॉय ले रहे हैं, उसका बहुत बड़ा हिस्सा उसी टेलीविजन माध्यम को जाता है जिसने उन्हें हर घर का चहेता बना दिया था। किसी भी माध्यम में कुछ कमियां या परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन अपनी पहचान दिलाने वाले क्षेत्र को इस तरह से नीचा दिखाना कहां तक उचित है, यह सवाल अब हर तरफ गूंज रहा है। टीवी धारावाहिकों के कई बड़े निर्देशकों और निर्माताओं ने भी इस बयान पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और कहा है कि कलाकारों को अपनी सफलता के बाद अपनी जड़ों को इस तरह से नहीं भूलना चाहिए।

रोहित रॉय के इस बयान के बाद भले ही उनकी आलोचना हो रही हो, लेकिन इसके साथ ही टेलीविजन इंडस्ट्री के अंदर काम करने वाले लोगों के भारी-भरकम वर्कलोड और तनावपूर्ण माहौल पर एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। कई अन्य कलाकारों और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े पेशेवरों ने खुलकर यह स्वीकार किया है कि छोटे पर्दे पर डेली सोप के एपिसोड समय पर डिलीवर करने के दबाव के कारण काम का तनाव बहुत ज्यादा होता है। सेट पर कई बार संवादहीनता, कुप्रबंधन और आपसी सम्मान की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिनका सामना रोजाना काम करने वाले कलाकारों और क्रू मेंबर्स को करना पड़ता है। हालांकि, समस्याओं का समाधान रचनात्मक तरीके से और अंदरूनी मंचों पर उठाया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से पूरे माध्यम को ही कटघरे में खड़ा कर देना चाहिए। इस पूरी कंट्रोवर्सी ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि ग्लैमर की दुनिया के पीछे छिपे काले सच और काम के दबाव को लेकर कलाकारों के मन में कितना गहरा गुस्सा और घुटन दबी होती है, जो कभी-कभी इस तरह के बयानों के जरिए बाहर आ जाती है।

आज के दौर में जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए हर बयान पलक झपकते ही लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाता है, तब सेलिब्रिटीज के लिए अपने शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना बेहद जरूरी हो जाता है। रोहित रॉय जैसे अनुभवी और परिपक्व अभिनेता से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपनी बात रखते समय शालीनता और गरिमा का पूरा ख्याल रखेंगे, ताकि किसी माध्यम या वहां काम करने वाले मेहनतकश लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। टेलीविजन इंडस्ट्री आज लाखों लोगों को रोजगार देती है और देश के कोने-कोने में करोड़ों दर्शकों के मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन बनी हुई है, इसलिए उसे इस तरह से खारिज कर देना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रोहित रॉय अपने इस बयान पर कोई सफाई पेश करते हैं या फिर यह विवाद यूं ही कुछ समय तक मनोरंजन गलियारों की सुर्खियां बटोरता रहता है।