
नौकरी के 30 से 35 साल बिताने के बाद रिटायरमेंट का दिन हर कामकाजी इंसान के जीवन में एक बड़ा मोड़ लेकर आता है। विदाई के दिन मिलने वाला गुलदस्ता, साथियों की तालियां और खाते में आने वाला पीएफ, ग्रेच्युटी का एकमुश्त फंड शुरुआत में बहुत सुखद लगता है। लेकिन जैसे ही अगले महीने की पहली तारीख को सैलरी का मैसेज आना बंद होता है, तो अधिकांश बुजुर्गों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगती हैं। बढ़ती महंगाई, दवाओं के खर्च, बच्चों की जिम्मेदारियों और घटती ब्याज दरों के बीच जीवनभर की गाढ़ी कमाई कैसे सुरक्षित रहे और हर महीने एक तय आमदनी आती रहे, यह आज के दौर का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुका है।
इसी वित्तीय उलझन को सुलझाने और रिटायरमेंट के बाद भी राजा की तरह स्वाभिमान से जीने का रास्ता दिखाया है रिटायर्ड सरकारी अधिकारी राम स्वार्थ सिंह ने। अपनी सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने न केवल अपनी बचत को सुरक्षित रखा, बल्कि एक सटीक और व्यावहारिक 3-स्टेप फॉर्मूला तैयार किया। आज उनकी जेब हर महीने नियमित रूप से भरी रहती है और वे बिना किसी आर्थिक तनाव के एक समृद्ध, खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं। उनका यह फॉर्मूला देश के हर उस व्यक्ति के लिए किसी रोडमैप से कम नहीं है जो रिटायर हो चुका है या अगले कुछ वर्षों में रिटायर होने वाला है।
राम स्वार्थ सिंह के फॉर्मूले का सबसे पहला और बुनियादी नियम है जीवन में किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय झटके से बचने के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी करना। अधिकांश लोग रिटायर होते ही पूरा पैसा किसी एक जगह जैसे जमीन-जायदाद या लंबी अवधि की स्कीम में फंसा देते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर नकदी का अकाल पड़ जाता है।
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कम से कम 12 से 18 महीने का इमरजेंसी फंड: अपने रिटायरमेंट फंड में से 12 से 18 महीने के घरेलू खर्च के बराबर की राशि को हमेशा लिक्विड रखें। इसे आप हाई-इंटरेस्ट सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म लिक्विड फंड में रख सकते हैं, जिसे आपात स्थिति में 24 घंटे के भीतर निकाला जा सके।
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पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस (Super Top-up के साथ): रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा अप्रत्याशित खर्च बीमारियों और अस्पतालों का होता है। राम स्वार्थ सिंह का कहना है कि बेसिक कॉर्पस को छूने से बचाने के लिए कम से कम ₹10 से ₹15 लाख का एक अच्छा सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस और साथ में एक किफायती सुपर टॉप-अप कवर जरूर रखें, ताकि अस्पताल के बिल आपकी जिंदगी भर की पूंजी को न लील जाएं।
रिटायरमेंट के बाद मानसिक शांति तभी मिल सकती है जब पहली तारीख को सैलरी की तरह एक निश्चित रकम बिना किसी रुकावट के खाते में क्रेडिट हो। राम स्वार्थ सिंह के अनुसार, इसके लिए सरकारी गारंटी वाली योजनाओं और सुरक्षित फिक्स्ड इनकम विकल्पों का एक बेहतरीन गुलदस्ता (Portfolio) बनाना चाहिए।
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सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): सरकार द्वारा संचालित इस योजना में वर्तमान में 8.2% का सुरक्षित और गारंटीड ब्याज मिलता है। इसमें अधिकतम ₹30 लाख तक का निवेश किया जा सकता है, जिससे हर तिमाही खाते में मोटा ब्याज आता है।
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पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): डाकघर की इस योजना में सिंगल या जॉइंट खाते के जरिए पैसा लगाकर हर महीने एक तय ब्याज आय प्राप्त की जा सकती है, जिस पर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता।
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बैंक एफडी की लैडरिंग तकनीक: पूरा पैसा एक ही बैंक या एक ही समय के लिए फिक्स करने के बजाय अलग-अलग अवधि (1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष) के फिक्स्ड डिपॉजिट में बांटकर लगाएं। इसे ‘FD Laddering’ कहते हैं। इससे हर साल आपकी एक एफडी मैच्योर होती है, लिक्विडिटी बनी रहती है और आपको उच्च ब्याज दरों का लाभ मिलता रहता है।
केवल फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बचत योजनाओं में पैसा रखने की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वे महंगाई (Inflation) को पूरी तरह मात नहीं दे पातीं। आज जो घरेलू खर्च ₹40,000 है, वह 7% महंगाई के हिसाब से अगले 10 वर्षों में ₹80,000 के पार पहुंच जाएगा। अगर आपकी पूंजी महंगाई की दर से तेज नहीं बढ़ेगी, तो आपकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
राम स्वार्थ सिंह बताते हैं कि अपनी कुल बचत का 20% से 25% हिस्सा हमेशा हाइब्रिड या लार्ज-कैप ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) या सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए निवेश करना चाहिए।
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कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स: यह फंड 75% पैसा सरकारी बॉन्ड्स और डेट सिक्योरिटीज में और 25% ब्लूचिप शेयरों में लगाते हैं। इससे पूंजी सुरक्षित रहती है और 9% से 11% तक का लॉन्ग-टर्म रिटर्न मिल जाता है।
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सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) का जादू: म्यूचुअल फंड में जमा पूंजी से आप हर महीने एक तय रकम अपने बैंक खाते में पेंशन की तरह विड्रॉ कर सकते हैं। यह तरीका टैक्स के लिहाज से बैंक ब्याज की तुलना में कहीं अधिक किफायती और फायदेमंद साबित होता है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, दिल्ली, पटना या किसी भी शहर में रहने वाले बुजुर्गों के लिए राम स्वार्थ सिंह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जमीनी सलाह देते हैं: “अपनी संतानों को प्यार और संस्कार जरूर दें, लेकिन अपने रिटायरमेंट फंड का मालिकाना हक कभी किसी के नाम ट्रांसफर न करें।”
अक्सर देखा जाता है कि भावुक होकर बुजुर्ग अपनी सारी पूंजी बच्चों के बिजनेस, मकान निर्माण या रिश्तेदारों में बांट देते हैं और बाद में पाई-पाई के लिए मोहताज हो जाते हैं। वित्तीय स्वतंत्रता ही बुढ़ापे का सबसे बड़ा सम्मान है। जब तक आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं, समाज और परिवार दोनों में आपका सिर गर्व से ऊंचा रहेगा। अपने पैसों का नियंत्रण अपने हाथ में रखें, नॉमिनी हमेशा अपडेट रखें और एक स्पष्ट वसीयत (Will) तैयार करके रखें ताकि आपके बाद परिवार में किसी भी तरह का कानूनी विवाद न हो।
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