रिटायरमेंट के बाद पीएफ (EPF) विड्रॉल और ब्याज के नियम: जानिए पूरी प्रक्रिया और जरूरी बातें

‘पैसों की पाठशाला’ में टैक्स एंड इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन ने रिटायरमेंट के बाद ईपीएफ (EPF) का पैसा निकालने और उस पर मिलने वाले ब्याज के नियमों को विस्तार से समझाया है। यदि आप भी 58 वर्ष की आयु पूरी कर रिटायर होने जा रहे हैं, तो पीएफ निकासी से जुड़े इन अहम नियमों को जानना बेहद जरूरी है।

1. पीएफ निकासी के मुख्य नियम

  • एकमुश्त निकासी (Lump Sum Withdrawal): 58 वर्ष की आयु पूरी होने और रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी अपने ईपीएफ अकाउंट में जमा सारा पैसा एक साथ (एकमुश्त) निकाल सकते हैं। इसमें किस्तों (इंस्टॉलमेंट) में पैसा निकालने का कोई विकल्प नहीं मिलता है।

  • कंपनी के HR की मदद लें: पीएफ विड्रॉल का प्रोसेस हर किसी को पूरी तरह पता नहीं होता, इसलिए कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे सही कागजी कार्रवाई के लिए अपनी कंपनी के एचआर (HR) विभाग की मदद लें और सभी जरूरी दस्तावेज समय पर जमा करें।

2. रिटायरमेंट के बाद ब्याज और डेडलाइन के नियम

  • 61 साल की उम्र तक ही मिलता है ब्याज: रिटायरमेंट (58 की उम्र) के बाद यदि कर्मचारी चाहें तो अपना पैसा ईपीएफ अकाउंट में रख सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि खाते पर मिलने वाला ब्याज केवल 3 साल यानी 36 महीने (यानी 61 साल की उम्र) तक ही मिलता है।

  • खाता हो जाता है इनऑपरेटिव (निष्क्रिय): 61 साल की उम्र के बाद ईपीएफ अकाउंट निष्क्रिय (Inoperative) श्रेणी में चला जाता है, जिसके बाद उसमें ब्याज जमा होना पूरी तरह बंद हो जाता है।

निष्कर्ष और समझदारी भरा कदम

चूंकि रिटायरमेंट के 36 महीने बाद (61 की उम्र के बाद) अकाउंट पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि सही समय पर अपने पीएफ क्लेम का प्रोसेस पूरा कर लें। समय पर पैसा निकाल लेने से न केवल अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है, बल्कि आप अपने फंड को बेहतर जगह निवेश कर उसका पूरा फायदा उठा सकते हैं।