रिकॉर्ड तोड़ कमाई: टैक्स में भारी छूट के बावजूद 23.40 लाख करोड़ पहुंचा देश का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन

वित्त वर्ष 2025-26 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। एक ओर जहां सरकार ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए इनकम टैक्स छूट की सीमा को दोगुना के करीब पहुंचा दिया, वहीं दूसरी ओर देश के नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 5.12% की ठोस बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल कलेक्शन 23.40 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है, जो भारतीय करदाताओं की बढ़ती संख्या और मजबूत आर्थिक गतिविधियों का सीधा प्रमाण है।

टैक्स में राहत, फिर भी कलेक्शन में मजबूती

1 फरवरी 2025 को पेश किए गए बजट ने करदाताओं की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ने की रणनीति अपनाई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स छूट की सीमा को 7 लाख से बढ़ाकर सीधा 12 लाख रुपये कर दिया और स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया था। जानकारों का मानना था कि इससे सरकारी खजाने पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। टैक्स स्लैब में बदलाव के बावजूद कलेक्शन का स्थिर रहना यह दर्शाता है कि अब ज्यादा लोग ईमानदारी से टैक्स नेट के दायरे में आ रहे हैं।

बजट टारगेट और हकीकत का गणित

हालांकि 23.40 लाख करोड़ का यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले बेहतर है, लेकिन सरकार द्वारा तय किए गए संशोधित अनुमान (Revised Estimate) से थोड़ा पीछे रह गया है।

  • बजट अनुमान (BE): ₹25.20 लाख करोड़

  • संशोधित अनुमान (RE): ₹24.21 लाख करोड़

  • वास्तविक नेट कलेक्शन: ₹23.40 लाख करोड़

भले ही सरकार अपने संशोधित लक्ष्य से लगभग 81,000 करोड़ रुपये पीछे रह गई हो, लेकिन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 5% से ज्यादा की ग्रोथ को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स का प्रदर्शन

टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों को अगर बारीकी से देखें, तो कॉर्पोरेट सेक्टर ने इस बार जबरदस्त प्रदर्शन किया है।

  • कॉर्पोरेट टैक्स: इसमें 11.4% की मजबूत बढ़त देखी गई और यह ₹10.99 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियों का मुनाफा और कामकाज विस्तार पर है।

  • नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स: व्यक्तिगत आयकर सहित अन्य टैक्स कलेक्शन ₹11.83 लाख करोड़ पर लगभग स्थिर रहा। टैक्स दरों में कटौती के बाद भी इस आंकड़े का स्थिर रहना बताता है कि नए करदाताओं के जुड़ने से राजस्व में होने वाली कमी की भरपाई हो गई है।

शेयर बाजार का योगदान: STT में उछाल

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का असर सरकारी खजाने पर भी दिखा। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) कलेक्शन में 7.9% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹57,522 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही सरकार ने रिफंड मैनेजमेंट में भी कुशलता दिखाई। इस साल ₹4.71 लाख करोड़ के रिफंड जारी किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 1.09% कम है।

विशेषज्ञों की राय: क्या है आगे की राह?

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े ‘टैक्स कंप्लायंस’ (कर अनुपालन) में सुधार की ओर इशारा करते हैं। EY इंडिया के जयेश संघवी के अनुसार, कॉर्पोरेट टैक्स की ग्रोथ ने पर्सनल टैक्स में दी गई छूट के असर को काफी हद तक संभाल लिया। वहीं Deloitte इंडिया के रोहिंटन सिधवा का कहना है कि टैक्स बेस का विस्तार होना इकोनॉमी के लिए शुभ संकेत है। यह साफ है कि आने वाले समय में तकनीक और डेटा के इस्तेमाल से टैक्स चोरी कम होगी और कलेक्शन का आधार और भी मजबूत होगा।