राहुल गांधी जंतर-मंतर छोड़कर PM आवास क्यों जाना चाहते थे?’: कंगना रनौत के तीखे सवालों से गरमाई सियासत

देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाली भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। हाल ही में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन और मार्च के दौरान राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाते हुए कंगना ने पूछा है कि आखिर वे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री आवास की ओर क्यों कूच करना चाहते थे। इस बयान के सामने आने के बाद से सियासी गलियारों में घमासान मच गया है।

कंगना रनौत का सीधा सवाल: नियमों और सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों?

कंगना रनौत ने मीडिया और सार्वजनिक मंचों से बात करते हुए राहुल गांधी की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक और राजनीतिक दल के लिए विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जैसी निर्धारित जगहें तय हैं, जहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री आवास की तरफ बढ़ने की जिद करना केवल और केवल एक राजनीतिक स्टंट और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना है। कंगना ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के ड्रामे रचकर सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।

राहुल गांधी और कांग्रेस के आक्रामक तेवरों पर सियासत तेज

कांग्रेस पार्टी और विपक्ष का मानना है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत उन्हें अपनी बात रखने का हक है। दूसरी ओर, बीजेपी लगातार यह दलील दे रही है कि कानून का पालन करना हर सांसद और नेता की पहली नैतिक जिम्मेदारी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च और पुलिस के साथ हुई तनातनी के बाद से ही दिल्ली की राजनीति में तनाव का माहौल बना हुआ है। लखनऊ से लेकर मुंबई और पटना तक के राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव और अधिक तीखा रूप ले सकता है।

देश भर के सियासी गलियारों में छिड़ी नई बहस

कंगना रनौत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर यूजर खासे सक्रिय हो गए हैं। लोग इस बात को लेकर अपने विचार रख रहे हैं कि क्या वीवीआईपी क्षेत्रों (VVIP Zones) में इस तरह के राजनीतिक मार्च की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य प्रमुख राज्यों के राजनीतिक केंद्रों में भी इस मुद्दे पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि आगामी सत्रों और चुनावों से पहले इस तरह के विवाद राजनीतिक दलों के लिए एक-दूसरे को घेरने का मुख्य हथियार बन चुके हैं।