
भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों और दौरों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सियासत के मैदान में उतरने से पहले राहुल गांधी का एजुकेशनल बैकग्राउंड (Educational Background) कितना मजबूत रहा है? दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई शुरू कर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे हार्वर्ड और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी तक का सफर तय करने वाले राहुल गांधी की डिग्रियां और उनका पुराना कॉरपोरेट करियर किसी को भी हैरान कर सकता है। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा और उस विदेशी नौकरी की पूरी इनसाइड स्टोरी।
दिल्ली के सेंट स्टीफेंस से शुरुआत और सुरक्षा कारणों से अमेरिका का रुख
राहुल गांधी की शुरुआती स्कूली शिक्षा देहरादून के मशहूर द दून स्कूल से हुई थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने साल 1989 में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के सबसे प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज में एडमिशन लिया, जहां उन्होंने इतिहास की पढ़ाई शुरू की। हालांकि, साल 1991 में पिता राजीव गांधी की असमय हत्या के बाद सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उन्हें अमेरिका के मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) भेजा गया, लेकिन सुरक्षा के कड़े घेरे और नाम छिपाने की मजबूरी के कारण उन्होंने बाद में फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से साल 1994 में उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की डिग्री पूरी की।
कैंब्रिज से मास्टर डिग्री और असली नाम छिपाकर की पढ़ाई
रोलिंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद राहुल गांधी दुनिया के सबसे नामचीन विश्वविद्यालयों में से एक कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (University of Cambridge) के ट्रिनिटी कॉलेज पहुंचे। सुरक्षा के बेहद संवेदनशील प्रोटोकॉल के कारण कैंब्रिज में उन्होंने अपना असली नाम छिपाकर ‘रॉल विंची’ (Raul Vinci) के छद्म नाम से दाखिला लिया था। यहां तक कि केवल विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को ही उनकी असली पहचान पता थी। इसी संस्थान से राहुल गांधी ने साल 1995 में डेवलपमेंट स्टडीज (Development Studies) में एम.फिल (M.Phil) की मास्टर डिग्री हासिल की, जो उनकी उच्च शैक्षणिक योग्यता को दर्शाती है।
राजनीति में एंट्री से पहले लंदन के इस कॉरपोरेट फर्म में की नौकरी
कई लोगों को लगता है कि राहुल गांधी सीधे राजनीति में आ गए थे, लेकिन सच यह है कि उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद एक आम पेशेवर की तरह कॉरपोरेट वर्ल्ड में काम किया। कैंब्रिज से निकलने के बाद राहुल गांधी ने लंदन का रुख किया और वहां की एक नामी मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म ‘मॉनिटर ग्रुप’ (Monitor Group) में बतौर कंसलटेंट काम करना शुरू किया। इस कंपनी में भी उन्होंने ‘रॉल विंची’ के नाम से ही कुछ सालों तक नौकरी की ताकि वे बिना किसी वीआईपी ट्रीटमेंट के कॉर्पोरेट अनुभव ले सकें। इसके बाद साल 2002 में वे भारत लौटे और मुंबई में अपनी खुद की एक टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग फर्म शुरू की, जिसके बाद साल 2004 में उन्होंने अमेठी से चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
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