राष्ट्रपति मुर्मू के साए की तरह रहने वाले भरोसेमंद मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने दिया इस्तीफा

भारतीय सेना के गलियारों और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने रक्षा और राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बेहद भरोसेमंद और हर समय उनके साए की तरह साथ रहने वाले मिलिट्री एडीसी (Aide-de-Camp) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपनी सेवा से अचानक इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा और प्रोटोकॉल में हमेशा अग्रिम पंक्ति में नजर आने वाले मेजर सांब्याल का यूं अचानक इस्तीफा देना और सेना से अलग होने का फैसला लेना हर किसी को हैरान कर रहा है. राष्ट्रपति के सबसे करीबी सैन्य अधिकारियों में गिने जाने वाले मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की विदाई को लेकर अब तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं. आम लोगों से लेकर रक्षा विश्लेषकों के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर राष्ट्रपति भवन के इतने प्रतिष्ठित और संवेदनशील पद पर तैनात रहने वाले एक काबिल अधिकारी को अचानक ऐसा कौन सा बड़ा कदम उठाना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद से ही सेना मुख्यालय से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में यह खबर चर्चा का मुख्य केंद्र बन चुकी है और हर कोई इसके पीछे की असली वजह जानने के लिए बेताब बैठा है.

राष्ट्रपति भवन में साए की तरह रहने वाले मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल की कार्यशैली

एक मिलिट्री एडीसी की जिम्मेदारी सामान्य सैन्य ड्यूटी से काफी अलग और अत्यधिक संवेदनशील होती है, क्योंकि उन्हें सीधे तौर पर देश के राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा, मूवमेंट और प्रोटोकॉल की कमान संभालनी होती है. मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यकाल के दौरान इस जिम्मेदारी को बेहद निष्ठा, अनुशासन और पेशेवर दक्षता के साथ निभाया था. राष्ट्रपति के विदेशी दौरों से लेकर देश के भीतर होने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में मेजर सांब्याल हमेशा उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए उनकी परछाई बनकर साथ चलते थे. राष्ट्रपति भवन के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे अपनी कार्यकुशलता और कर्तव्यपरायणता के लिए जाने जाते थे, और यही वजह है कि वे उच्च पदस्थ अधिकारियों और खुद राष्ट्रपति के भी बेहद विश्वासपात्र माने जाते थे. ऐसे में जब इतने भरोसेमंद और करीब रहने वाले अधिकारी के इस्तीफे की खबर बाहर आई, तो किसी को भी इस बात पर आसानी से यकीन नहीं हुआ. सेना के नियमों के मुताबिक, किसी भी अधिकारी का मिलिट्री एडीसी के रूप में कार्यकाल पूरा होने पर उनका ट्रांसफर या वापसी तय प्रक्रिया के तहत होती है, लेकिन अचानक इस्तीफा देना सामान्य प्रक्रिया से कुछ हटकर माना जा रहा है, जिससे इस मामले की गहराई और अधिक बढ़ जाती है.

मेजर सांब्याल के अचानक इस्तीफे के पीछे क्या हैं अंदरखाने की असली वजहें

किसी भी सैन्य अधिकारी द्वारा अचानक सेवा से इस्तीफा देने के पीछे व्यक्तिगत कारण, पारिवारिक प्राथमिकताएं या फिर भविष्य की कोई अन्य बड़ी पेशेवर योजनाएं मुख्य वजह हो सकती हैं. हालांकि रक्षा मंत्रालय या सेना की ओर से अभी तक मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन गलियारों में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म है. कुछ सूत्रों का यह भी मानना है कि सैन्य सेवा के कड़े नियमों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच कई बार अधिकारी कॉर्पोरेट जगत, सिविल सर्विसेज या अन्य क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश के लिए समय से पहले सेवानिवृत्ति (Early Retirement / Resignation) का मार्ग चुनते हैं. इसके अलावा, रक्षा बलों में सेवारत अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी कई बार ऐसे बड़े फैसले लेने के लिए मजबूर करती हैं. राष्ट्रपति भवन जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित और वीवीआईपी माहौल से जुड़े रहने के बाद जब कोई अधिकारी अचानक इस तरह का बड़ा कदम उठाता है, तो मीडिया और सोशल मीडिया पर कयासों का दौर शुरू होना स्वाभाविक है. इसके बावजूद, जब तक कोई पुख्ता और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक इन सभी बातों को केवल अटकलें ही माना जाना चाहिए.

भारतीय सेना में एडीसी की भूमिका और ऐसे फैसलों का क्या होता है प्रभाव

भारतीय सशस्त्र बलों में राष्ट्रपति के एडीसी (Aide-de-Camp) का पद थल सेना, नौसेना और वायुसेना के चुनिंदा और सबसे बेहतरीन अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवा, योग्यता और चरित्र के आधार पर सौंपा जाता है. इन पदों पर चयन होना ही अपने आप में किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए बहुत बड़े गौरव की बात होती है, क्योंकि वे देश के सर्वोच्च कमांडर (Supreme Commander) के प्रत्यक्ष संपर्क में रहकर काम करते हैं. मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल जैसे युवा और मेधावी अधिकारियों का इस मुकाम तक पहुंचना यह दर्शाता है कि वे अपने करियर में कितनी ऊंचाइयों को छू चुके थे, और यही कारण है कि उनका यह इस्तीफा रक्षा समुदाय के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. सेना के नियमों के तहत अधिकारियों को अपने निजी कारणों से इस्तीफा देने का अधिकार होता है, जिसे रक्षा मंत्रालय और संबंधित सेना मुख्यालय द्वारा विधिवत रूप से प्रोसेस किया जाता है. इस पूरी घटना ने एक बार फिर से इस बात की चर्चा छेड़ दी है कि कैसे देश की रक्षा सेवाओं से जुड़े शीर्ष अधिकारी अपने करियर के एक निश्चित पड़ाव के बाद नए और अलग रास्ते चुनते हैं. राष्ट्रपति भवन और सेना के इस वीवीआईपी प्रकरण पर हर किसी की नजर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है.