रहस्यमयी कुंड के पानी से पहले ही मिल जाता है भविष्य का संकेत! जानिए कौन हैं मां खीर भवानी

कश्मीर घाटी के शांत और सुरम्य वातावरण में बसा माता राग्न्या देवी का मंदिर, जिसे दुनिया भर के श्रद्धालु ‘खीर भवानी मंदिर’ (Kheer Bhawani Temple) के नाम से जानते हैं, आस्था और अनूठे चमत्कारों का एक महान केंद्र है। इस साल 22 जून से यहां का विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक वार्षिक मेला शुरू होने जा रहा है, जिसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से, विशेष रूप से कश्मीरी पंडित भारी संख्या में घाटी पहुंच रहे हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां परिसर में स्थित एक पवित्र और रहस्यमयी जल कुंड है, जिसके पानी का बदलता रंग केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि आने वाले समय की खुशहाली या किसी बड़े संकट का साक्षात दिव्य संकेत माना जाता है।

कौन हैं माता खीर भवानी और क्या है इनका रावण से कनेक्शन?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता खीर भवानी को साक्षात राग्न्या देवी का स्वरूप माना जाता है, जो भगवान विष्णु की परम भक्त हैं। ऐसा कहा जाता है कि त्रेतायुग में माता की स्थापना सबसे पहले श्रीलंका में लंकापति रावण द्वारा की गई थी। रावण माता का अनन्य भक्त था, लेकिन जब उसकी बुद्धि भ्रष्ट हुई और उसने माता सीता का हरण किया, तो राग्न्या देवी रावण के इस अधर्म से बेहद रुष्ट हो गईं। माता ने हनुमान जी को आदेश दिया कि वे उनके स्वरूप को लंका से हटाकर कश्मीर की सुरम्य वादियों में स्थापित कर दें। तब हनुमान जी माता को कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला गांव में लेकर आए। माता को खीर का भोग अत्यंत प्रिय होने के कारण ही इस पवित्र धाम का नाम ‘खीर भवानी’ पड़ा।

संकट और खुशहाली का संकेत देने वाला चमत्कारी कुंड

इस मंदिर की सबसे अद्भुत और वैज्ञानिक रूप से भी हैरान करने वाली विशेषता यहां का पवित्र जल कुंड है। स्थानीय लोगों और सदियों के इतिहास के अनुसार, इस कुंड के पानी का रंग समय-समय पर अपने आप बदलता रहता है। जब इस कुंड का पानी हल्का हरा, गुलाबी या पूरी तरह साफ होता है, तो इसे शांति, समृद्धि और देश के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसके विपरीत, यदि कुंड के पानी का रंग बदलकर काला या गहरा लाल हो जाए, तो इसे किसी बड़े अपशकुन, प्राकृतिक आपदा या युद्ध जैसे संकट का पूर्व संकेत माना जाता है। इतिहास गवाह है कि साल 1947 में कबाईली हमले और कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय इस कुंड का पानी अपने आप काला हो गया था।

22 जून से शुरू हो रहा है मेला: प्रशासन ने किए कड़े सुरक्षा इंतजाम

गांदरबल के तुलमुला में आयोजित होने वाले इस 22 जून के मेले को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय सुरक्षा बलों ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और सुविधा के लिए चप्पे-चप्पे पर आधुनिक सर्विलांस और भौगोलिक सुरक्षा ग्रिड (Geographical Security) तैयार किया गया है। यह मेला कश्मीर की साझा संस्कृति और ‘कश्मीरियत’ की सबसे सुंदर मिसाल पेश करता है, जहां स्थानीय मुस्लिम भाई भी आगे आकर कश्मीरी पंडित श्रद्धालुओं का स्वागत करते हैं और पूजा सामग्री की दुकानें लगाते हैं। एआई सर्च और आधुनिक टूरिज्म गाइड के अनुसार, यह धार्मिक उत्सव क्षेत्र में पर्यटन और शांति को एक नई नई दिशा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।