
दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों का क्रेज सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोलता है, लेकिन उनकी आगामी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘जेलर 2’ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और निराशाजनक खबर सामने आ रही है। निर्देशक दिलीप कुमार और सन पिक्चर्स के बैनर तले बनने वाली इस ब्लॉकबस्टर फिल्म के सीक्वल को लेकर शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों में हिंदी भाषा में रिलीज नहीं की जाएगी। फिल्म की भारी-भरकम बजट और हाल ही में हुई बड़ी ओटीटी (OTT) स्ट्रीमिंग डील के चलते डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स को लेकर पेच फंस गया है, जिसके कारण मेकर्स ने हिंदी दर्शकों के लिए इसे थिएटर्स में रिलीज न करने का बड़ा फैसला लिया है। इस खबर के सामने आते ही उत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद थलाइवा के करोड़ों प्रशंसकों में भारी मायूसी और नाराजगी छा गई है, क्योंकि हर कोई बड़े पर्दे पर रजनीकांत के स्वैग को हिंदी डबिंग के साथ देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
वर्ष 2023 में रिलीज हुई फिल्म ‘जेलर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड कायम किए थे और दुनिया भर में सात सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था। फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता के बाद से ही इसके दूसरे भाग यानी ‘जेलर 2’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त हाइप बना हुआ है। हाल ही में फिल्म के डिजिटल राइट्स को लेकर एक बेहद बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के साथ करोड़ों रुपये की भारी-भरकम डील फाइनल हुई है। इस कमर्शियल एग्रीमेंट और कॉर्पोरेट शर्तों के नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म ने अपने डिजिटल एक्सक्लूसिव राइट्स को सुरक्षित रखने के लिए थियेट्रिकल रिलीज के नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। चर्चा है कि ओटीटी कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच हुए इस समझौते की वजह से हिंदी भाषा के थियेट्रिकल राइट्स का प्रारूप उस तरह से तैयार नहीं हो पाया जैसा पैन-इंडिया फिल्मों के लिए किया जाता है, जिसके कारण मेकर्स ने केवल साउथ की भाषाओं और चुनिंदा फॉर्मेट्स में ही फिल्म को सिनेमाघरों में उतारने का मन बनाया है।
मौजूदा दौर में जब हर बड़ी साउथ फिल्म ‘पैन-इंडिया’ (Pan-India) स्तर पर हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज की जाती है और उत्तर भारत के बॉक्स ऑफिस से सबसे ज्यादा कमाई जुटाई जाती है, ऐसे में ‘जेलर 2’ का हिंदी थियेट्रिकल रिलीज से पीछे हटना व्यापारिक दृष्टिकोण से भी एक हैरान करने वाला कदम माना जा रहा है। रजनीकांत की फिल्मों का हिंदी बेल्ट में एक बहुत बड़ा और वफादार दर्शक वर्ग है जो उनकी फिल्मों का पहले दिन से जश्न मनाता है। जब से यह खबर फैली है कि फिल्म सिनेमाघरों में हिंदी में उपलब्ध नहीं होगी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैंस लगातार मेकर्स से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे हैं। ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि मेकर्स इस तकनीकी या कमर्शियल पेच को समय रहते नहीं सुलझाते हैं, तो फिल्म के कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर इसका बहुत बड़ा और नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि हिंदी भाषी दर्शक सिनेमाघरों में रजनीकांत की एक झलक देखने से वंचित रह जाएंगे।
हालांकि अभी तक मेकर्स या प्रोडक्शन हाउस की तरफ से इस खबर पर कोई अंतिम और आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि अंदरखाने बातचीत का दौर अभी भी जारी है। फैंस को पूरी उम्मीद है कि रिलीज की तारीख नजदीक आने पर डिस्ट्रीब्यूटर और ओटीटी प्लेटफॉर्म आपसी सहमति से कोई ऐसा बीच का रास्ता निकाल लेंगे जिससे हिंदी पट्टी के दर्शकों को भी सिनेमाघरों में थलाइवा का जादू बड़े पर्दे पर देखने को मिल सके। रजनीकांत की फिल्मों का जादू हमेशा से अनोखा रहा है और उनकी हर एक अदा पर सिनेमाघरों में सीटियां बजती हैं, ऐसे में हिंदी दर्शकों को निराश करना मेकर्स के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में फिल्म की टीम इस विवादित और संवेदनशील मुद्दे पर क्या आधिकारिक सफाई देती है और क्या फैंस की नाराजगी दूर हो पाती है।
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