
उत्तर प्रदेश को देश का सबसे आकर्षक और प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य (Investment Destination) बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में औद्योगिक सुधारों का सिलसिला तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को लखनऊ स्थित ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) कार्यालय में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय निवेश संवाद आयोजित किया गया।
इस बैठक में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब समेत देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग १०० प्लाईवुड उद्योग प्रतिनिधियों और संभावित निवेशकों ने हिस्सा लिया। राज्य सरकार ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनके सभी व्यावहारिक सुझावों और मुद्दों को सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा ताकि उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हब बनाया जा सके।
प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री के लिए आएगी स्पेशल पॉलिसी, पड़ोसी राज्यों का होगा अध्ययन
उत्तर प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (IIDC) दीपक कुमार ने बैठक में राज्य सरकार की भविष्य की प्राथमिकताओं को साझा किया:
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डेडिकेटेड पॉलिसी: उन्होंने ऐलान किया कि उत्तर प्रदेश सरकार प्लाईवुड और एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) उद्योग के लिए एक समर्पित और भविष्य उन्मुख नीति (Dedicated Policy) तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
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पड़ोसी राज्यों का अध्ययन: यूपी की नीति को देश में सबसे बेहतर और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का गहन अध्ययन किया जाएगा।
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उद्योगपतियों की सहभागिता: नीति बनाने के लिए जो विशेष समिति (Committee) गठित की जाएगी, उसमें सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि ग्राउंड लेवल की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाई जा सकें।
६ महीने के भीतर होगा जमीन का अलॉटमेंट, ४-५ नए औद्योगिक क्लस्टर होंगे आरक्षित
निवेशकों को उत्तर प्रदेश में व्यापार शुरू करने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विजय किरन आनंद ने सरकार की ओर से बड़े कूटनीतिक फायदों की जानकारी दी:
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क्लस्टर आधारित विकास: राज्य सरकार अपने मौजूदा सरकारी लैंड बैंक (भूमि बैंक) में से ४ से ५ बड़े औद्योगिक क्लस्टरों की पहचान कर रही है, जिन्हें विशेष रूप से प्लाईवुड और संबद्ध उद्योगों के विकास के लिए आरक्षित (Reserve) किया जाएगा।
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त्वरित भूमि आवंटन: यदि किसी बड़े निवेशक को चिन्हित क्लस्टर से अलग अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता होती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार न केवल उसे जमीन उपलब्ध कराएगी बल्कि ६ महीने के भीतर उसका आवंटन (Allocation) भी सुनिश्चित करेगी।
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व्यापक सेक्टोरल नीतियां: सीईओ ने बताया कि यूपी की ३६ से अधिक सेक्टोरल नीतियां, रोजगार सहायता योजनाएं और पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विस्तार करने का एक सुरक्षित माहौल देती हैं।
प्लाईवुड फेडरेशन का सुझाव: ओडीओपी की तर्ज पर बने “वन इंडस्ट्रियल पार्क”
संवाद के दौरान प्लाईवुड फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग को उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास, कृषि और रोजगार की रीढ़ बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की तर्ज पर ही राज्य में “वन इंडस्ट्रियल पार्क” (One Industrial Park) मॉडल विकसित करने का एक बेहतरीन सुझाव दिया।
इसके साथ ही उद्योगपतियों ने व्यापार संचालन में आने वाली कुछ मुख्य व्यावहारिक चुनौतियों को भी अधिकारियों के सामने प्रमुखता से रेखांकित किया:
| निवेशकों की मुख्य चिंताएं / चुनौतियां | सरकार का आश्वासन और समाधान |
| * एग्रोफॉरेस्ट्री आधारित उद्योगों के कड़े लाइसेंस नियम। | * एग्रो आधारित उद्योगों के लिए अलग और सरल नीति का प्रस्ताव। |
| * वन विभाग के कड़े नियम और एनओसी (NOC) मिलने में देरी। | * सिंगल विंडो क्लीयरेंस के जरिए जटिल प्रदूषण और वन नियमों का सरलीकरण। |
| * प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर भारी दंडात्मक प्रावधान। | * औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार द्वारा सीएम योगी के समक्ष व्यावहारिक समाधान का भरोसा। |
उद्योगपतियों और अफसरों के बीच हुए इस सकारात्मक संवाद के बाद यह तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश जल्द ही प्लाईवुड और लकड़ी आधारित विनिर्माण (Manufacturing) के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा, जिससे राज्य के किसानों और ग्रामीण युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
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