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यूपी के सरकारी स्कूलों के रसोइयों को सितंबर के वेतन से मिलेगा बढ़ा हुआ मानदेय, अब हर महीने मिलेंगे इतने रुपये

उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए पोष्टिक और स्वादिष्ट मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) तैयार करने वाले लाखों रसोइयों के लिए इस समय की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने प्रशासनिक फैसलों से एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश और जरूरतमंद वर्ग के हितों का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री पोषण योजना (Pradhan Mantri Poshan Yojana) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के विभिन्न परिषदीय और सरकारी विद्यालयों में पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे रसोइयों के मानदेय में की गई बढ़ोतरी को अब धरातल पर उतारने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राज्य सरकार के इन ताजा और महत्वपूर्ण निर्देशों के मुताबिक, रसोइयों को उनके बढ़े हुए वेतन का यह बड़ा लाभ आगामी सितंबर महीने के वेतन (जिसका भुगतान अक्टूबर के शुरुआती दिनों में किया जाएगा) के साथ ही मिलना शुरू हो जाएगा। इस सौगात से प्रदेश भर के हजारों रसोइयों के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के विद्यालयों में रसोई का जिम्मा संभालने वाली रसोइयों के आर्थिक हालातों को सुधारने और उनके परिश्रम का उचित मूल्य देने के उद्देश्य से उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद राज्य मंत्रिमंडल (Cabinet) की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी, जिसके बाद से ही रसोइया संघ और संबंधित कर्मचारी इस आदेश के औपचारिक रूप से लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शासन स्तर से मध्याह्न भोजन प्राधिकरण (Mid-Day Meal Authority) को इस संबंध में विस्तृत और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शासन के इन सख्त और त्वरित निर्देशों में यह कहा गया है कि बिना किसी विलंब के इस बढ़ी हुई मानदेय राशि को लागू किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर सेवा दे रहे इन कर्मठ कामगारों को इसका सीधा आर्थिक लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को अब तक वित्तीय रूप से बेहद सीमित मानदेय प्राप्त होता था। अब तक शासन की व्यवस्था के अनुसार इन रसोइयों को प्रति माह केवल 2000 रुपये का मानदेय दिया जाता था, जो बढ़ती हुई महंगाई के इस दौर में उनके और उनके परिवारों के भरण-पोषण के लिए नाकाफी साबित हो रहा था। रसोइयों की इस आर्थिक कठिनाई और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने उनके मानदेय में सीधे तौर पर एक हजार रुपये प्रति माह (1000 Rupees per month) की भारी-भरकम बढ़ोतरी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब रसोइयों का मासिक मानदेय 2000 रुपये से बढ़कर सीधे 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

शासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि रसोइयों को दिया जाने वाला यह मानदेय वर्ष में कुल 10 महीनों के लिए देय होता है। इस हिसाब से गणित लगाएं तो अब बढ़ी हुई दर यानी 3,000 रुपये प्रति माह के लिहाज से इन रसोइयों को सालाना कुल 30,000 रुपये (तीस हजार रुपये) का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। पहले जहां उन्हें सालाना 20,000 रुपये के आसपास राशि मिलती थी, वहीं अब इस वृद्धि से उनकी वार्षिक आय में सीधा इजाफा हुआ है। सरकार का यह कदम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में काम करने वाली महिलाओं और अन्य कामगारों के लिए एक बड़ी आर्थिक संबल साबित होगा, जो पूरी ईमानदारी से बच्चों के लिए रसोइया का कार्य संभालती हैं।

शासन की ओर से मध्याह्न भोजन प्राधिकरण और जिला स्तर के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जो निर्देश भेजे गए हैं, उनमें इस बात के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि इस नई बढ़ी हुई व्यवस्था का अनुपालन पूरी तत्परता के साथ सुनिश्चित किया जाए। निर्देशों के अनुसार, रसोइयों के मानदेय में एक हजार रुपये प्रति माह की यह वृद्धि इसी साल सितंबर महीने से लागू मानी जाएगी। चूंकि सरकारी कर्मचारियों और योजना के तहत काम करने वाले मानदेय कर्मियों का वेतन अमूमन अगले महीने की शुरुआत में बनता है, इसलिए सितंबर माह का यह संशोधित और बढ़ा हुआ वेतन जब अक्टूबर महीने में प्रोसेस होकर आएगा, तब रसोइयों के बैंक खातों में तीन हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से धनराशि क्रेडिट कर दी जाएगी। सरकार ने यह भी हिदायत दी है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही न बरती जाए और समयबद्ध तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चल रही प्रधानमंत्री पोषण योजना केवल भोजन परोसने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाने का सबसे बड़ा राष्ट्रीय अभियान है। इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी यदि कोई हैं, तो वे हमारी ये रसोइयां हैं जो सुबह सवेरे स्कूल पहुंचकर पूरी साफ-सफाई और समर्पण के साथ बच्चों के लिए ताज़ा और गर्म भोजन तैयार करती हैं। ग्रामीण अंचल से आने वाली ये महिलाएं मानदेय कम होने के बावजूद बरसों से इस कार्य को सेवा भाव से करती आ रही हैं। योगी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करेगा। शिक्षा विभाग के इस फैसले से पूरे प्रदेश के रसोइया वर्ग में बेहद उत्साह का माहौल है और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। सरकार के इस जनहितैषी निर्णय से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य का प्रशासन अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।