
बिहार की राजनीति में अपने बेबाक और दबंग अंदाज के लिए मशहूर मोकामा से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Patna Graduates’ Constituency) के तहत होने वाले एमएलसी चुनावों को लेकर चल रही राजनीतिक सरगर्मी के बीच अनंत सिंह ने एक ऐसा विस्फोटक बयान दे दिया, जिसने राज्य की सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दलों दोनों की नींद उड़ा दी है। अपने बयानों से हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह ने कैमरे पर एक ऐसा दावा किया, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ जाकर बगावती तेवर दिखाने वाले अनंत सिंह ने अपने पुराने दिनों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने अपनी वफादारी और त्याग का बखान करते हुए दावा किया कि जब नीतीश कुमार शुरुआती दौर में संघर्ष कर रहे थे और उनके साथ ज्यादा लोग नहीं थे, तब उन्होंने उनके लिए बहुत बड़ी ‘कुर्बानी’ दी थी। उनके इस बयान के बाद से ही साल 2004 की उन घटनाओं और ऐतिहासिक बधाों की चर्चा फिर से जिंदा हो गई है, जिनका जिक्र अक्सर बिहार के राजनीतिक और आपराधिक इतिहास में किया जाता है।
#1 क्या था साल 2004 का वह वाकया? जब लदमा गांव में गूंजी थीं गोलियां
अनंत सिंह के इस बयान के तूल पकड़ने के बाद लोगों के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर साल 2004 में उनके पैतृक गांव लदमा (Ladma Village) और आसपास के इलाके में ऐसा क्या हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय इतिहास के जानकारों के अनुसार, साल 2004 के दौरान बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी और नीतीश कुमार राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। उस दौर में मोकामा और बाढ़ इलाके में वर्चस्व की लड़ाई चरम पर थी और अनंत सिंह के गृह क्षेत्र लदमा गांव में पुलिस और एसटीएफ (STF) के साथ एक भीषण मुठभेड़ हुई थी।
उस चर्चित पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ में कुल 9 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें लदमा गांव के स्थानीय निवासी और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल थे। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय पुलिस कार्रवाई का सीधा निशाना अनंत सिंह और उनका इलाका बना था। विधायक ने अपने बयान में उसी दौर का हवाला देते हुए यह बताने की कोशिश की थी कि कैसे उस मुश्किल वक्त में उन्होंने और उनके करीबियों ने राजनीतिक उठापटक के दौरान भारी कीमत चुकाई थी। हालांकि, उनके इस बयान के शब्दों को लेकर बाद में मीडिया और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के मायने निकाले जाने लगे।
#1 बयान पर विवाद बढ़ने के बाद अनंत सिंह की सफाई: ‘मेरे 9 लोगों की हुई थी हत्या’
जैसे ही अनंत सिंह का यह वीडियो सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर वायरल हुआ, उनके द्वारा दिए गए बयान पर राजनीतिक बवाल मच गया। विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर सरकार और जेडीयू पर निशाना साधना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता देख और अपनी बात के गलत मतलब निकाले जाने पर अनंत सिंह ने खुद सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने मीडिया के सामने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को पूरी तरह से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका आशय यह बिल्कुल नहीं था कि उन्होंने किसी की हत्या कराई थी, बल्कि उनकातर्ज यह था कि नीतीश कुमार के साथ खड़े होने और राजनीतिक संघर्ष के दौरान उनके पक्ष के 9 लोगों की जान चली गई थी यानी उनके 9 लोगों की ‘कुर्बानी’ दी गई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में पुलिसिया जुल्म और राजनीतिक विरोध के कारण उनके गांव के कई लोग मारे गए थे और उन्होंने हमेशा नीतीश कुमार का साथ दिया है। उन्होंने दोहराया कि वे नीतीश कुमार के सच्चे सिपाही और भक्त हैं तथा पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।
#1 एमएलसी चुनाव और पार्टी के भीतर घमासान: क्यों छिड़ी है यह राजनीतिक रार?
यह पूरा विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे वर्तमान में चल रहे विधान परिषद (MLC) चुनाव की पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है। दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। लेकिन विधायक अनंत सिंह इस फैसले से बेहद खफा हैं और उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर खुलेआम दूसरे उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। अनंत सिंह का पुराना छत्तीस का आंकड़ा नीरज कुमार के साथ रहा है और वह लगातार पार्टी के इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े कर रहे हैं।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा समझाने-बुझाने के बावजूद अनंत सिंह अपने रुख पर कायम हैं। चुनाव प्रचार के दौरान जब उनसे उनकी बगावत और पार्टी केित वफादारी के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने गुस्से और भावनात्मक अंदाज में अपने पुराने संघर्षों और त्याग का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि उन्होंने पार्टी के लिए जितना खून-पसीना बहाया है और जितना बड़ा त्याग किया है, उतना किसी अन्य नेता ने नहीं किया है।
#1 बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा इस विवाद का असर?
अनंत सिंह के इस ताजा बयान और एमएलसी चुनाव में उनकी बगावत ने जेडीयू नेतृत्व की मुश्किलें थोड़ी जरूर बढ़ा दी हैं। हालांकि पार्टी के रणनीतिकार इस डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं कि किसी तरह चुनाव से पहले आंतरिक कलه को शांत किया जा सके, लेकिन बाहुबली विधायक के तीखे तेवर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। साल 2004 के पुराने जख्मों और 9 लोगों की मौतों के इस जिन्न के एक बार फिर बोतल से बाहर आने के बाद विरोधी दलों को सरकार को घेरने का एक और मौका मिल गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी अनुशासनहीनता और इस तरह के बयानों पर क्या रुख अपनाती है और इसका असर चुनावी परिणामों पर किस रूप में देखने को मिलता है।
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