बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार कृति सेनन अपने संजीदा अभिनय के साथ-साथ मुखर और स्पष्ट विचारों के लिए भी जानी जाती हैं। हाल ही में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जारी किए गए एक ब्रांड विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई थी। विज्ञापन में पारंपरिक परिधान और महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के चित्रण को लेकर इंटरनेट यूजर्स के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी और अभिनेत्री को ट्रोल करने का प्रयास किया था। अब इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर खुद कृति सेनन ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ट्रोलर्स और रूढ़िवादी सोच रखने वालों को करारा जवाब दिया है। एक हालिया साक्षात्कार में कृति ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि किसी महिला को क्या पहनना चाहिए और उसकी चोली या पोशाक का कट कैसा होना चाहिए, इस पर समाज के कुछ चंद लोगों का राय बनाना पूरी तरह बेमानी और गैरजरूरी है।
विवाद की जड़ एक जाने-माने फैशन और लाइफस्टाइल ब्रांड का रक्षाबंधन स्पेशल वीडियो कैंपेन था। इस विज्ञापन में कृति सेनन पारंपरिक भारतीय लहंगे और आधुनिक डिजाइन वाली चोली में नजर आई थीं। विज्ञापन की कहानी भाई-बहन के आधुनिक रिश्ते, हंसी-मजाक और त्योहार की तैयारियों के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। हालांकि, वीडियो के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—विशेषकर ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम—पर कुछ लोगों ने अभिनेत्री के परिधान की डिजाइन, डीप नेकलाइन और त्योहार के पारंपरिक माहौल के अनुरूप न होने का आरोप लगाते हुए आलोचना शुरू कर दी। देखते ही देखते ब्रांड और अभिनेत्री को लेकर तरह-तरह के मीम्स और आलोचनात्मक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई, जिसे लेकर अब कृति ने दो-टूक जवाब दिया है।
अपने हालिया इंटरव्यू में जब उनसे इस विवाद के बारे में पूछा गया, तो कृति ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। कृति ने कहा, “यह बेहद अजीब और हास्यास्पद है कि साल 2026 में भी हम इस बात पर बहस कर रहे हैं कि एक महिला को क्या पहनना चाहिए। किसी कमरे में बैठे पांच या छह लोग मेरी चोली के डिजाइन, उसकी लंबाई या उसके गले के कट के बारे में राय बना रहे हैं और उसे संस्कृति से जोड़ रहे हैं। एक महिला का पहनावा उसकी अपनी पसंद और उसके कम्फर्ट का मामला है। कोई तीसरा व्यक्ति यह तय करने का हक नहीं रखता कि क्या ‘संस्कारी’ है और क्या नहीं।” कृति ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक परिधानों में समय के साथ आधुनिकता का समावेश कोई नया चलन नहीं है और इसे अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है।

कृति ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब भी किसी त्योहार या संस्कृति से जुड़े विज्ञापन बनते हैं, तो महिलाओं के कपड़ों को हमेशा एक विशेष सूक्ष्मदर्शी लेंस से देखा जाने लगता है। उन्होंने कहा, “विज्ञापन का मूल संदेश भाई-बहन के बीच का प्यार, उत्सव की उमंग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान था। लेकिन कुछ लोगों ने उस पूरे विचार को नजरअंदाज कर केवल एक परिधान को मुद्दा बना दिया। अगर हम कला, फैशन और रचनात्मकता को इस तरह सीमाओं में बांधेंगे, तो समाज कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महिलाएं अब इस तरह की गैर-जरूरी टीका-टिप्पणियों से असहज होने के बजाय अपनी पसंद पर अडिग रहना जानती हैं।
कृति सेनन के इस बेबाक रुख के सामने आते ही बॉलीवुड गलियारों और उनके लाखों प्रशंसकों की तरफ से उन्हें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। कई साथी कलाकारों और फैशन डिजाइनर्स ने कृति के बयान की सराहना करते हुए कहा कि त्योहारों की भावना रिश्तों की मिठास में होती है, न कि किसी के कपड़ों की सिलाई मापने में। सोशल मीडिया पर भी युवा वर्ग उनके इस प्रगतिशील और साहसिक बयान की तारीफ कर रहा है। कृति सेनन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे न केवल स्क्रीन पर मजबूत महिला किरदार निभाती हैं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी रूढ़िवादिता और ऑनलाइन ट्रोलिंग का डटकर मुकाबला करने का माद्दा रखती हैं।
girls globe