
इंटरनेट और सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रसार के बीच किशोरों और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पूरी दुनिया में एक बेहद गंभीर और संवेदनशील चिंता का विषय बन चुकी है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसी दिग्गज सेवाओं का संचालन करने वाली कंपनी मेटा (Meta) ने अब बाल यौन शोषण और बच्चों के ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ अपनी वैश्विक लड़ाई को और अधिक आक्रामक बना दिया है। कंपनी ने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक और शोषणकारी गतिविधियों को जड़ से मिटाने के लिए कई अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग टूल्स को मैदान में उतार दिया है। ये उन्नत एल्गोरिदम न केवल पहले से अपलोड की गई सामग्रियों की पहचान करते हैं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों, अनचाहे संदेशों और पैटर्न की पहले ही पहचान कर उसे उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से पहले ही रोक देते हैं। डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने की दिशा में मेटा के इस कदम को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहल माना जा रहा है।
भारत जैसे विशाल डिजिटल बाजार में बाल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेटा ने अपने सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया है। कंपनी द्वारा जारी मासिक अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों से जुड़े यौन शोषण (CSAM), अभद्र सामग्री, अनुचित बातचीत और ऑनलाइन प्रलोभन के मामलों में कुल 53 लाख से अधिक पोस्ट्स, वीडियो और अकाउंट्स के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की गई है। इस पूरी कवायद में सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक तथ्य यह रहा कि इन 53 लाख मामलों में से लगभग 98 फीसदी पोस्ट्स को किसी बाहरी यूजर की शिकायत या रिपोर्ट के बिना, मेटा के अत्याधुनिक एआई सिस्टम ने खुद ही (Proactively) रियल-टाइम में पकड़कर हटा दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा उस घृणित सामग्री को देखे जाने या उसकी रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले ही सिस्टम ने उसे प्लेटफॉर्म से निष्कासित कर दिया, जिससे बच्चों की गोपनीयता और सम्मान को नुकसान पहुंचने से बचा लिया गया।
मेटा द्वारा तैयार किए गए ये नए एआई टूल्स पारंपरिक कीवर्ड फिल्टर से कहीं आगे बढ़कर काम करते हैं। ये उपकरण कंप्यूटर विजन, डीप लर्निंग, और बिहेवियरल पैटर्न एनालिसिस के संयोजन पर आधारित हैं। यदि कोई अज्ञात वयस्क यूजर किसी नाबालिग यूजर के प्रोफाइल पर संदिग्ध तरीके से लगातार डायरेक्ट मैसेज (DM) भेजने, उनका फॉलो-अप करने या प्राइवेट बातचीत शुरू करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम स्वतः चेतावनी ट्रिगर कर देता है और ऐसे खातों पर तत्काल प्रतिबंध लगा देता है। इसके अलावा, मेटा ने ‘टेक इट डाउन’ (Take It Down) जैसे वैश्विक इनिशिएटिव को भी अपने एआई के साथ एकीकृत किया है। यह टूल इंटरनेट पर मौजूद किसी भी निजी तस्वीर या वीडियो के लिए एक अनूठा डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash) तैयार कर देता है। इसके बाद यदि कोई यूजर उस सामग्री को दोबारा अपलोड करने का प्रयास भी करता है, तो एआई हैश मैचिंग के जरिए उस कंटेंट को अपलोड होते ही ब्लॉक कर देता है।
एआई एल्गोरिदम के साथ-साथ मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बच्चों के लिए ‘टीन एकाउंट्स’ (Teen Accounts) का एक कड़ा सुरक्षा ढांचा भी लागू किया है। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के सभी नए और मौजूदा उपयोगकर्ताओं के खातों को डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट सेटिंग्स पर रखा गया है। नए नियमों के अनुसार, अब कोई भी ऐसा वयस्क यूजर किसी नाबालिग को डायरेक्ट मैसेज नहीं भेज सकता जिसे वह नाबालिग पहले से फॉलो न करता हो। इसके साथ ही, रात 10 बजे से सुबह 7 बजे के बीच स्लीप मोड अपने आप सक्रिय हो जाता है, जिससे नोटिफिकेशन बंद हो जाते हैं और बच्चों को समय पर सोने की आदत डालने के लिए रिमाइंडर मिलते हैं। माता-पिता को भी अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम, उनकी चैट लिस्ट और उनके द्वारा रिपोर्ट किए जाने वाले अकाउंट्स की निगरानी के लिए विशेष सुपरविजन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं।
मेटा का यह कदम केवल प्लेटफॉर्म से पोस्ट्स हटाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए भी एक मजबूत तंत्र तैयार किया गया है। मेटा ने स्पष्ट किया है कि जब भी किसी खाते पर बच्चों के शोषण से जुड़े गंभीर प्रमाण मिलते हैं, तो कंपनी उस डेटा को नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) को रिपोर्ट करती है। इसके बाद यह जानकारी भारतीय जांच एजेंसियों, राज्य पुलिस और साइबर क्राइम सेल के साथ साझा की जाती है, ताकि अपराधियों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और आईटी एक्ट की सख्त धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सके। तकनीकी सुरक्षा और कानूनी सहयोग के इस दोहरे वार से अब सोशल मीडिया पर गलत इरादे रखने वाले तत्वों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा रही है, जिससे भारत का इंटरनेट परिदृश्य नई पीढ़ी के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके।
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