
भारतीय राजनीति और संसदीय गलियारों में इस समय देश के सबसे बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक सुधार यानी लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों और संविधान विशेषज्ञों के बीच इन दिनों एक ही बड़ा सवाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि आने वाले मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा बिल संसद में पास नहीं हो पाया, तो देश की चुनावी व्यवस्था पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा। चर्चाएं इस बात की भी जोर पकड़ रही हैं कि अगर समय रहते इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो क्या साल 2029 के आम चुनावों से ठीक पहले देश के सामने एक गंभीर और अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।
परिसीमन प्रक्रिया में देरी और साल 2029 के आम चुनावों का भविष्य
संविधान के प्रावधानों के अनुसार देश में हर जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन किया जाना अनिवार्य होता है, ताकि विभिन्न राज्यों की बदलती जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक और भौगोलिक कारणों से पिछले कई दशकों से इस पर रोक लगी हुई है, लेकिन अब तय समयसीमा के नजदीक आने के कारण इस पर नए सिरे से विचार करना जरूरी हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि संसद के आगामी सत्रों में परिसीमन के मोर्चे पर कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया जाता है, तो दक्षिण और उत्तर भारत के राज्यों के बीच सीटों के अनुपात को लेकर बड़ा विवाद पैदा हो सकता है, जिससे 2029 के चुनाव कराना चुनाव आयोग और सरकार के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।
संवैधानिक संकट की आशंका और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती चिंता
इस पूरे मामले पर देश के राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने या घटने से राजनीतिक दलों के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। यदि समय रहते परिसीमन बिल को कानूनी जामा नहीं पहनाया गया, तो अदालत और संविधान के जानकारों के मुताबिक कई तकनीकी और कानूनी अड़चनें पैदा हो सकती हैं, जो देश के लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए चुनौती बन सकती हैं। यही वजह है कि संसद के मानसून सत्र में इस अति-संवेदनशील और दूरगामी परिणाम वाले विषय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि सरकार इस पर क्या ऐतिहासिक निर्णय लेती है और क्या वाकई 2029 के चुनावों से पहले कोई बड़ा संवैधानिक संकट टल पाएगा।
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