मानसून में मच्छर जनित बीमारियों से बचने के लिए आयुष मंत्रालय ने साझा किए 4 खास सुझाव

विशेष स्वास्थ्य एवं मेडिकल रिपोर्टर, नई दिल्ली: मानसून का सुहाना मौसम जहां गर्मी से राहत दिलाता है, वहीं अपने साथ जलभराव और मच्छरों का प्रकोप भी लेकर आता है। इस मौसम में डेंग्यू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल बुखार जैसी मच्छर जनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इसकी चपेट में आ जाता है। आम जनता को इन जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत बनाने के लिए आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

आयुष मंत्रालय ने मानसून के दौरान मच्छरों से बचाव और प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य की रक्षा के लिए 4 बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं। आइए जानते हैं इन 4 प्रभावी सुझावों के बारे में विस्तार से:

1. मच्छर के काटने से बचाव और आसपास के परिवेश की स्वच्छता (Vector Control & Cleanliness)

मच्छर जनित बीमारियों से बचने का सबसे पहला और बुनियादी नियम है मच्छरों के पनपने के स्रोतों को पूरी तरह नष्ट करना।

  • पानी जमा न होने दें: अपने घर के आसपास, कूलर, गमलों, बाल्टियों और छतों पर रखे पुराने टायरों या बर्तनों में बारिश का पानी इकट्ठा न होने दें। पानी को हर हफ्ते बदलते रहें।

  • शारीरिक सुरक्षा: सुबह और शाम के समय (जब मच्छर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं) बच्चों और बड़ों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए। सोने के दौरान हमेशा मच्छरदानी (Mosquito Net) का उपयोग करें।

  • प्राकृतिक रिपेलेंट: मच्छरों को दूर भगाने के लिए नीम का तेल, कपूर का धुआं या प्राकृतिक हर्बल मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करें।

2. आयुष आधारित इम्युनिटी और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना (Boosting Immunity via AYUSH)

मजबूत इम्यून सिस्टम शरीर को किसी भी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है।

  • गिलोय और तुलसी का काढ़ा: आयुष मंत्रालय आयुषीय काढ़े या क्वथनांक का सेवन करने की सलाह देता है, जिसमें गिलोय (Tinospora Cordifolia), तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च और सौंठ का इस्तेमाल किया गया हो। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

  • संशमनी वटी: आयुर्वेदिक विशेषज्ञों की सलाह से ‘संशमनी वटी’ या अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मौसमी संक्रमण से बचाव होता है।

3. होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक निवारक औषधियां (Preventive Medicines)

आयुष प्रणालियों में ऐसी कई प्राकृतिक और सुरक्षित औषधियां मौजूद हैं जो शरीर को संक्रमण के प्रति प्रतिरोधी बनाती हैं:

  • होम्योपैथी: आयुष मंत्रालय के अनुसार, होम्योपैथी में ‘इपोरिटोरियम पर्फोलिएटम’ (Eupatorium Perfoliatum) या ‘आर्सेनिक एल्बम’ (Arsenicum Album) जैसी दवाइयां मौसमी बुखार और डेंगू-मलेरिया के प्रकोप के दौरान डॉक्टर की सलाह से予防 (Prevention) के तौर पर ली जा सकती हैं।

  • आयुर्वेदिक क्वाथ: आयुर्वेद में वर्णित पंचतिक्रृत घृत या महासुदर्शन घनवटी का सेवन भी चिकित्सकों के मार्गदर्शन में किया जा सकता है।

4. लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें (Early Detection & Medical Consultation)

यदि तमाम सावधानियों के बावजूद किसी व्यक्ति को अचानक तेज बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो लापरवाही बिल्कुल न बरतें।

  • स्वयं उपचार से बचें: मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की पर्ची के तेज दर्द निवारक (Painkillers जैसे एस्पिरिन या इबुप्रोफेन) लेने से बचें, क्योंकि डेंगू के मामले में ये दवाइयां खतरनाक साबित हो सकती हैं।

  • समय पर जांच: तुरंत किसी योग्य एलोपैथिक, आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक चिकित्सक से संपर्क करें और ब्लड टेस्ट (जैसे CBC और डेंगू एनएस1 एंटीजन टेस्ट) करवाकर सही समय पर इलाज शुरू करें।

आयुष मंत्रालय के इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों को अपनाकर आप इस मानसूनी सीजन में अपने और अपने परिवार को खतरनाक मच्छर जनित बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं।