
आगामी त्योहारी सीजन में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और मुनाफाखोरों के खिलाफ महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drugs Administration – FDA) ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की विशेष जांच टीमों ने राज्य पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी करते हुए खतरनाक प्रतिबंधित केमिकल्स के जरिए कृत्रिम रूप से पकाए गए केलों के बड़े गोदामों और डिटर्जेंट व यूरिया मिलाकर तैयार किए जा रहे सिंथेटिक दूध के अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कुल ₹1.29 करोड़ मूल्य का दूषित और मिलावटी सामान जब्त किया है। स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मामले में सीधे तौर पर लिप्त 5 मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
एफडीए की इंटेलिजेंस विंग को गुप्त सूचना मिली थी कि कल्याण, ठाणे और मुंबई के उपनगरीय थोक फल बाजारों में बड़े पैमाने पर खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर कच्चे केलों को रातों-रात पीला और आकर्षक बनाया जा रहा है। अधिकारियों की टीम ने जब नवी मुंबई और ठाणे स्थित दो विशाल कोल्ड स्टोरेज व पकाने वाले गोदामों (Ripening Chambers) पर छापा मारा, तो वहां का दृश्य देखकर अधिकारी दंग रह गए:
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कैल्शियम कार्बाइड और एथिलीन पाउच: गोदामों के भीतर प्रतिबंधित कार्सिनोजेनिक केमिकल ‘कैल्शियम कार्बाइड’ (Calcium Carbide) के पाउच और अज्ञात विषैले तरल स्प्रे की भारी खेप बरामद हुई।
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क्विक-राइपनिंग तकनीक का गोरखधंधा: जांच में सामने आया कि कच्चे केलों को इस खतरनाक केमिकल के घोल में डुबोया जाता था, जिससे वे महज 12 से 18 घंटे के भीतर बाहर से चमकदार पीले नजर आने लगते थे।
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₹78 लाख के केमिकल युक्त केले सीज: खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने गोदामों में रखे दर्जनों टन ऐसे केलों को तुरंत जब्त कर लिया, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग ₹78 लाख आंकी गई है। पकड़े गए केलों के रैंडम सैंपल्स लेकर राज्य केंद्रीय खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला (CFTL) भेजे गए हैं और शेष स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
छापेमारी का दूसरा और सबसे भयावह हिस्सा पालघर और ग्रामीण ठाणे के बॉर्डर इलाके में संचालित हो रही एक अवैध डेयरी इकाई में सामने आया। त्योहारी मांग का फायदा उठाने के लिए यह गिरोह असली गाय-भैंस के दूध की जगह पूरी तरह सिंथेटिक और जहरीला दूध तैयार कर रहा था:
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खतरनाक रसायनों का मिश्रण: लैब टेस्टिंग किट से मौके पर की गई प्राथमिक जांच में पुष्टि हुई कि पानी में घटिया वाशिंग डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया, स्टार्च और सस्ते रिफाइंड पाम तेल को हाई-स्पीड ब्लेंडर में मिक्स करके दूध जैसी गाढ़ी सफेदी और झाग (Foam) तैयार की जा रही थी।
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सप्लाई नेटवर्क का भंडाफोड़: यह मिलावटी दूध रोजाना भोर में टैंकरों और वैन के जरिए स्थानीय हलवाइयों, मावा भट्ठियों और खुली चाय की दुकानों पर सस्ते दामों में खपाया जा रहा था।
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₹51 लाख का सिंथेटिक दूध व केमिकल जब्त: छापेमारी में लगभग 35,000 लीटर तैयार नकली दूध, हजारों लीटर मिलावटी तेल, भारी मात्रा में डिटर्जेंट के कट्टे और पैकेजिंग मशीनरी जब्त की गई, जिसकी कुल कीमत करीब ₹51 लाख है।
मौके से भागने की कोशिश कर रहे गिरोह के 5 प्रमुख संचालकों को पुलिस ने घेराबंदी करके दबोच लिया। एफडीए अधिकारियों की शिकायत पर संबंधित पुलिस थानों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI Act, 2006) की धारा 59 (असुरक्षित भोजन का निर्माण व बिक्री) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न आपराधिक धाराओं (सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालना, धोखाधड़ी और जानलेवा मिलावट) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और इसमें शामिल थोक सप्लायर्स के सुराग तलाश रही है।
मेडिकल विशेषज्ञों और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स ने इस खुलासे पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है:
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कैल्शियम कार्बाइड के खतरे: कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसी भारी धातुएं पाई जाती हैं। इस केमिकल से पके फल खाने से पेट में गंभीर जलन, पेप्टिक अल्सर, उल्टी, चक्कर आना, सीने में दर्द और लंबे समय में आंतों व पेट का कैंसर होने का खतरा रहता है।
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डिटर्जेंट और यूरिया युक्त दूध का असर: डिटर्जेंट और कास्टिक सोड़ा सीधे तौर पर शरीर की आंतों की आंतरिक परत को जला देते हैं। यूरिया का अनियंत्रित सेवन लिवर सिरोसिस और एक्यूट किडनी फेलियर (Renal Failure) का कारण बन सकता है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित होता है।
उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए एफडीए ने आसान घरेलू परीक्षण के तरीके साझा किए हैं:
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केले की पहचान: प्राकृतिक रूप से पका केला हल्का पीला-भूरा होता है और उसके तने (डंठल) काले या भूरे पड़ जाते हैं। यदि केला ऊपर से चटक पीला दिखे लेकिन उसका डंठल गहरा हरा हो, तो समझें कि उसे केमिकल से पकाया गया है। ऐसे केलों का स्वाद भी अंदर से बेस्वाद या कच्चा लगता है।
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दूध की परख (डिटर्जेंट टेस्ट): 5 मिली दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर शीशी में तेजी से हिलाएं। यदि दूध में झाग साबुन की तरह लंबे समय तक बना रहे और गाढ़ा हो, तो उसमें डिटर्जेंट की मिलावट है। असली दूध का झाग कुछ ही पलों में बैठ जाता है।
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सिंथेटिक दूध की गंध और रंग: सिंथेटिक दूध को उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन महसूस होता है और गर्म करने पर यह हल्का पीला पड़ने लगता है।
महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि दिवाली और आगामी छठ पूजा तक पूरे राज्य में जीरो-टॉलरेंस नीति लागू रहेगी। इसके लिए जिला स्तर पर उड़नदस्तों (Flying Squads) का गठन किया गया है, जो कोल्ड स्टोरेज, फल मंडियों, दूध चिलिंग प्लांट्स और मावा कारखानों पर लगातार औचक निरीक्षण करेंगे। नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें अपने आसपास खाद्य पदार्थों में किसी भी संदिग्ध मिलावट या केमिकल के इस्तेमाल की जानकारी मिले, तो वे तुरंत एफडीए के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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