
खूबसूरत, बेदाग और चमकदार त्वचा की चाह रखने वालों के लिए विटामिन सी सीरम एक जरूरी ब्यूटी प्रोडक्ट बन चुका है। डर्मेटोलॉजिस्ट इसे त्वचा के लिए सबसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मानते हैं। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई और बंगलुरु जैसे बड़े शहरों में प्रदूषण, धूल और पराबैंगनी किरणों के कारण त्वचा तेजी से अपनी चमक खोने लगती है। ऐसे में विटामिन सी सीरम फ्री रेडिकल्स से लड़कर डार्क स्पॉट्स, पिगमेंटेशन, मेलास्मा और बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले ब्रांडेड विटामिन सी सीरम काफी महंगे होते हैं। इसके साथ ही, विटामिन सी (एल-एस्कॉर्बिक एसिड) हवा और धूप के संपर्क में आते ही बहुत जल्दी ऑक्सिडाइज (खराब) हो जाता है। यही कारण है कि कई बार बाजार से खरीदे गए सीरम कुछ ही हफ्तों में पीले या भूरे पड़ने लगते हैं और उनका असर खत्म हो जाता है। ऐसे में घर पर ताजा और केमिकल-फ्री सीरम बनाना न केवल किफायती है, बल्कि ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी भी साबित होता है।
घर पर असरदार और स्टेबल विटामिन सी सीरम तैयार करने के लिए आपको केवल चार शुद्ध सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जो किसी भी मेडिकल स्टोर या ऑर्गेनिक शॉप पर आसानी से उपलब्ध हैं:
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एल-एस्कॉर्बिक एसिड पाउडर (विटामिन सी पाउडर) – आधा छोटा चम्मच: यह विटामिन सी का सबसे शुद्ध और सक्रिय रूप है, जो त्वचा में गहराई से अवशोषित होकर कोलेजन उत्पादन को तेज करता है।
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शुद्ध गुलाब जल या डिस्टिल्ड वाटर – 2 बड़े चम्मच: यह सीरम के लिए एक शांत और सुखदायक तरल आधार प्रदान करता है, जो त्वचा के पीएच स्तर को संतुलित रखता है।
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वेजिटेबल ग्लिसरीन – 1 चम्मच: ग्लिसरीन एक बेहतरीन ह्यूमेक्टेंट है, जो हवा से नमी खींचकर त्वचा में लॉक करता है और सीरम को एक चिकना, नॉन-स्टिकी टेक्सचर देता है।
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विटामिन ई ऑयल (1 कैप्सूल): विटामिन ई स्वयं एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है, जो विटामिन सी के प्रभाव को दोगुना करता है और सीरम को जल्दी खराब होने से बचाता है।
एक साफ और पूरी तरह सूखी कांच की कटोरी लें। इसमें दो बड़े चम्मच शुद्ध गुलाब जल या डिस्टिल्ड वाटर डालें। अब इसमें आधा छोटा चम्मच एल-एस्कॉर्बिक एसिड पाउडर मिलाएं। एक साफ चम्मच की मदद से इस मिश्रण को तब तक हिलाएं जब तक कि विटामिन सी के बारीक कण पानी में पूरी तरह घुल न जाएं। ध्यान रखें कि कटोरी में कोई भी दाना न बचे, ताकि चेहरे पर लगाते समय खुरदरापन महसूस न हो।
जब पाउडर पूरी तरह घुल जाए, तब इसमें एक चम्मच वेजिटेबल ग्लिसरीन मिलाएं। इसके बाद एक विटामिन ई कैप्सूल को पिन से छेदकर उसका तेल इस मिश्रण में निचोड़ दें। अब सभी चीजों को अच्छी तरह 2 मिनट तक फेंटें ताकि एक समान और पारदर्शी सीरम तैयार हो जाए। इस तैयार सीरम को ड्रॉपर वाली एक डार्क अंबर (काले या गहरे भूरे रंग की) कांच की शीशी में भर लें। शीशी को कसकर बंद करें और धूप से दूर किसी ठंडी जगह या फ्रिज में रखें।
सीरम का अधिकतम लाभ पाने के लिए इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। रात को सोने से पहले अपने चेहरे को किसी जेंटल फेसवॉश से धोकर तौलिए से हल्का सुखा लें। ड्रॉपर की मदद से सीरम की केवल 3 से 4 बूंदें अपनी उंगलियों पर लें और पूरे चेहरे तथा गर्दन पर हल्के हाथों से थपथपाते हुए (डैब करते हुए) लगाएं। सीरम को चेहरे पर जोर-जोर से रगड़ें नहीं, बल्कि त्वचा को इसे स्वाभाविक रूप से सोखने दें।
सीरम लगाने के 2 से 3 मिनट बाद अपनी त्वचा के अनुसार एक अच्छा लाइटवेट मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं ताकि सीरम त्वचा में लॉक हो सके। यदि आप इस सीरम को दिन के समय इस्तेमाल करते हैं, तो इसके ऊपर एसपीएफ 30 या 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल अनिवार्य है, क्योंकि विटामिन सी लगाने के बाद त्वचा धूप के प्रति संवेदनशील हो जाती है।
विटामिन सी एक बेहद संवेदनशील यौगिक है जो रोशनी और गर्मी के संपर्क में आते ही अपना असर खोने लगता है। इसलिए इस होममेड सीरम को हमेशा गहरे रंग की कांच की बोतल में ही रखें और उपयोग के तुरंत बाद ढक्कन कसकर बंद कर दें। घर पर बने इस सीरम में कोई कृत्रिम प्रिजर्वेटिव नहीं होता, इसलिए इसे एक बार में केवल 10 से 15 दिनों के उपयोग के लिए ही बनाएं। 15 दिन बाद दोबारा ताजा बैच तैयार करें। यदि सीरम का रंग हल्का पीला, नारंगी या भूरा होने लगे, तो इसका मतलब है कि यह ऑक्सिडाइज हो चुका है; ऐसी स्थिति में इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।
पहली बार इस्तेमाल करने से पहले अपनी कोहनी या कान के पीछे पैच टेस्ट जरूर करें। यदि 24 घंटे के भीतर कोई लालिमा, खुजली या जलन नहीं होती है, तभी इसे चेहरे पर लगाएं। संवेदनशील त्वचा वाले लोग शुरुआत में विटामिन सी पाउडर की मात्रा थोड़ी कम रख सकते हैं।
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