मल्टिनेशनल कंपनी की मोटी सैलरी वाली नौकरी लात मारी, पहले ही प्रयास में बनीं IAS अफसर

आज के दौर में जहां युवा किसी मल्टिनेशनल कंपनी (MNC) में लाखों-करोड़ों के पैकेज और आलीशान कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल का सपना देखते हैं, वहीं देश में कुछ ऐसे भी जुनूनी लोग हैं जिनके लिए प्रशासनिक सेवा के जरिए समाज में बदलाव लाना सबसे बड़ा मकसद होता है। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक होनहार महिला ने कॉर्पोरेट जगत के ऊंचे ओहदे और मोटी सैलरी वाली नौकरी को एक झटके में अलविदा कह दिया। उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी (UPSC Civil Services Exam) परीक्षा की तैयारी की और न सिर्फ सफलता पाई, बल्कि अपने पहले ही प्रयास में आईएएस (IAS) अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया। पश्चिम बंगाल से शुरू हुआ उनका यह प्रशासनिक सफर अब बिहार के एक महत्वपूर्ण जिले में जिलाधिकारी (DM) के रूप में एक नई इबारत लिख रहा है।

कॉर्पोरेट के ऐश-ओ-आराम से सिविल सर्विसेज के कांटों भरे सफर तक

इस महिला आईएएस अफसर का शुरुआती करियर बेहद शानदार था। प्रतिष्ठित संस्थान से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद देश-विदेश की जानी-मानी मल्टिनेशनल कंपनी में उनका चयन हुआ। लाइफ पूरी तरह सेट थी और पैकेज भी लाखों में था, लेकिन मन में हमेशा देश के आम नागरिकों और जमीनी स्तर पर सिस्टम को सुधारने की टीस उठती थी। आखिरकार, उन्होंने एक बड़ा और साहसिक फैसला लेते हुए अपनी जमी-जमाई नौकरी से इस्तीफा दे दिया। दिन-रात की कड़ी मेहनत और सटीक रणनीति के बल पर उन्होंने अपने पहले ही अटेंप्ट में यूपीएससी की परीक्षा क्रैक कर सबको चौंका दिया और देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा के लिए चुनी गईं।

पहले मिला पश्चिम बंगाल कैडर, फिर इस वजह से हुआ बिहार ट्रांसफर

यूपीएससी में बेहतरीन रैंक हासिल करने के बाद उन्हें शुरुआत में होम कैडर न मिलकर पश्चिम बंगाल कैडर अलॉट किया गया था। वहां उन्होंने बतौर सहायक कलेक्टर और एसडीएम (SDM) के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलताओं का लोहा मनवाया और स्थानीय स्तर पर कई बड़े सुधार किए। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार के कैडर चेंज नियमों (शादी या अन्य विशेष पारिवारिक आधार पर अंतर-कैडर ट्रांसफर नीति) के तहत उनका तबादला पश्चिम बंगाल से बदलकर बिहार कैडर में कर दिया गया। बिहार प्रशासनिक गलियारे में आते ही उनकी कार्यशैली की चौतरफा तारीफ होने लगी।

बिहार में बतौर डीएम (DM) कमान: स्थानीय स्तर पर ला रहीं बड़ा बदलाव

वर्तमान में बिहार के एक प्रमुख जिले में जिलाधिकारी (District Magistrate) के पद पर तैनात यह महिला अफसर अपनी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जानी जाती हैं। जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों, सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए वे अक्सर औचक निरीक्षण पर निकल पड़ती हैं। उनके इस कड़े और पारदर्शी रुख की वजह से स्थानीय भू-माफियाओं, भ्रष्ट कर्मचारियों और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है। एआई-संचालित प्रशासनिक सुधारों और स्थानीय भौगोलिक इनपुट्स की मदद से वे जिले में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सके।