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भुवनेश्वर-शमी के लिए पूरी तरह नहीं बंद हुए हैं वनडे टीम के दरवाजे

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और चयनकर्ताओं द्वारा जब भी आगामी अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए टीमों का ऐलान किया जाता है, तो क्रिकेट गलियारों में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो जाना स्वाभाविक है। हाल ही में जब तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को लंबे अंतराल के बाद भारतीय टीम में दोबारा शामिल किया गया, तो इसके साथ ही दूसरे अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के भविष्य को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म हो गया। क्रिकेट प्रेमियों के मन में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे मोहम्मद शमी के लिए टीम इंडिया के दरवाजे अब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं या फिर आगामी न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान चयनकर्ता उन्हें सरप्राइज पैकेज के रूप में वापस बुला सकते हैं?

विशेषज्ञों और पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि जिस प्रकार चयन समिति ने अनुभव को प्राथमिकता देते हुए सीनियर खिलाड़ियों की तरफ दोबारा देखना शुरू किया है, उससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि शमी जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज की उपयोगिता टीम के लिए अभी भी खत्म नहीं हुई है। हालांकि चयन प्रक्रिया और फिटनेस मानकों के अपने कड़े नियम होते हैं, लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों का हालिया प्रदर्शन हमेशा से उनकी वापसी का सबसे बड़ा मार्गदर्शक रहा है।

#1 घरेलू क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी में लगातार चमक रहा है मोहम्मद शमी का प्रदर्शन

तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने पिछले कुछ समय से जिस तरह का जुझारू रवैया और घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन दिखाया है, वह चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए काफी है। बंगाल की तरफ से रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलते हुए शमी ने अपनी मैच फिटनेस और गेंदबाजी की धार को पूरी तरह साबित किया है। दिल्ली के खिलाफ रणजी मुकाबले में पांच विकेट झटककर उन्होंने यह बता दिया कि लाल और सफेद दोनों गेंदों पर उनका नियंत्रण आज भी उतना ही घातक है।

बावजूद इसके, राष्ट्रीय टीम में चयन न होने पर हाल ही में दिए गए उनके बयानों से यह जरूर झलका कि लंबे समय से बाहर रहने के कारण खिलाड़ियों के मन में एक टीस रहती है, लेकिन उनका पूरा फोकस सिर्फ अपने खेल और मैदान पर शत-प्रतिशत देने पर है। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि सिलेक्टर्स भले ही युवा खिलाड़ियों को मौका देने की नीति पर काम कर रहे हों, लेकिन जब बात आईसीसी या बड़ी द्विपक्षीय सीरीज की आती है, तो अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है।

#1 रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गजों का समर्थन: क्या न्यूजीलैंड सीरीज में मिल सकता है मौका?

भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी एक हालिया चर्चा में इस बात का समर्थन किया है कि भुवनेश्वर कुमार की वापसी इस बात का प्रमाण है कि चयनकर्ताओं के दरवाजे सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। यदि भुवनेश्वर टीम में वापसी कर सकते हैं, तो निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मोहम्मद शमी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाली आगामी वनडे सीरीज के लिए टीम संयोजन पर एक बार फिर से मंथन होना तय माना जा रहा है।

भारतीय टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि विदेशी दौरों या चुनौतीपूर्ण पिचों पर जसप्रीत बुमराह के साथ एक अनुभवी तेज गेंदबाज का होना गेंदबाजी आक्रमण को कितना मजबूत बनाता है। ऐसे में आगामी वनडे मुकाबलों और सीरीज के बचे हुए चरणों के लिए शमी के नाम पर विचार किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

#1 फिटनेस और टीम संतुलन: क्या चयन समिति दिखाएगी बड़ा बदलाव?

किसी भी खिलाड़ी की वापसी के पीछे सबसे बड़ी शर्त उसकी शत-प्रतिशत मैच फिटनेस होती है। चयन समिति और एनसीए (NCA) के ट्रेनर लगातार खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस डेटा पर बारीक नजर रखते हैं। मोहम्मद शमी ने अपनी फिटनेस को साबित करने के लिए घरेलू क्रिकेट के लंबे स्पेल में गेंदबाजी की है, जो इस बात का संकेत है कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

यदि टीम इंडिया मैनेजमेंट को लगता है कि बेंच स्ट्रेंथ में अनुभव की कमी खल रही है, तो न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी सीरीज के अहम मुकाबलों में इन अनुभवी गेंदबाजों की वापसी का दांव खेला जा सकता है। क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब पूरी तरह से आगामी चयन बैठकों और आधिकारिक स्क्वॉड घोषणा पर टिकी हुई हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि क्या वाकई इन दिग्गजों की फिर से नीले रंग की जर्सी में मैदान पर वापसी होगी या नहीं।