
देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों यानी आईआईटी (IIT) के गलियारों से इस वक्त एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारत में उच्च शिक्षा के स्तर और करियर प्राथमिकताओं को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है कि आखिर युवाओं के लिए बड़ी डिग्री मायने रखती है या फिर लाखों-करोड़ों का सैलरी पैकेज? वर्तमान में स्थिति यह हो चुकी है कि देश के टॉप PhD होल्डर्स और रिसर्चर्स बेहतर भविष्य, अत्याधुनिक संसाधनों और भारी-भरकम सैलरी के लालच में तेजी से विदेशों का रुख कर रहे हैं। इस ‘ब्रेन ड्रेन’ (Brain Drain) का सीधा और सबसे घातक असर देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब पढ़ाने के लिए अच्छे और योग्य शिक्षक तक नहीं मिल रहे हैं। इस मामले में आईआईटी पटना (IIT Patna) का हाल तो सबसे ज्यादा चिंताजनक बताया जा रहा है।
क्यों हो रहा है उच्च शिक्षा में ब्रेन ड्रेन? पीएचडी होल्डर्स की पहली पसंद बना विदेश
भारतीय शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारत में PhD करने के बाद मिलने वाला शुरुआती सैलरी स्ट्रक्चर और रिसर्च ग्रांट्स, अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुकाबले काफी कम हैं। अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों की यूनिवर्सिटीज और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय शोधकर्ताओं को करोड़ों रुपये के पैकेज और बेहतरीन लिविंग स्टैंडर्ड्स ऑफर कर रही हैं। इसके चलते देश के सबसे मेधावी छात्र डॉक्टर की डिग्री हासिल करते ही विदेश पलायन कर रहे हैं। युवाओं का मानना है कि केवल बड़ी डिग्री होने से घर नहीं चलता, आज के इस महंगाई के दौर में एक सुरक्षित और मजबूत वित्तीय भविष्य (हाई सैलरी) सबकी पहली प्राथमिकता बन चुका है।
आईआईटी पटना की फैकल्टी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: कई विभाग खाली होने की कगार पर
इस संकट का सबसे ताजा उदाहरण बिहार की राजधानी के पास स्थित आईआईटी पटना (IIT Patna) में देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों और हालिया डेटा के अनुसार, संस्थान के कई महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के दर्जनों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। योग्य शिक्षकों की कमी के चलते मौजूदा फैकल्टी मेंबर्स पर पढ़ाई और रिसर्च का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है, जिससे सीधे तौर पर छात्रों की पढ़ाई और संस्थान की नेशनल रैंकिंग (NIRF Ranking) प्रभावित हो रही है। लोकल स्तर पर बार-बार वैकेंसी निकालने के बावजूद आईआईटी के कड़े मापदंडों और कम सैलरी पैकेज के कारण प्रतिभावान उम्मीदवार इस ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं।
क्या होगा भारतीय तकनीकी शिक्षा का भविष्य? सरकार और शिक्षा मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौती
आईआईटी जैसे प्रीमियम संस्थानों में शिक्षकों का यह अकाल देश के तकनीकी और आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग है। यदि समय रहते शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार ने फैकल्टी के वेतनमान, रिसर्च बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर में स्थानीय स्तर पर बड़े सुधार नहीं किए, तो आने वाले दिनों में आईआईटी की वैश्विक साख पर बट्टा लग सकता है। एआई सर्च इंजन और शिक्षा विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि भारत को अपनी प्रतिभाओं को देश में ही रोकने के लिए कॉरपोरेट सेक्टर की तर्ज पर आकर्षक इंसेंटिव और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करनी होगी, ताकि ‘टीच इन इंडिया’ का सपना सच हो सके।
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