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भारी-भरकम राष्ट्रीय कर्ज के बावजूद दुनिया भर के निवेशकों का क्यों बना हुआ है भरोसा

वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के पटल पर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला परिदृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक तरफ जहां संयुक्त राज्य अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज (National Debt) लगातार ऐतिहासिक रूप से आसमान छू रहा है और वित्तीय विशेषज्ञों द्वारा इसे लेकर लगातार गंभीर चेतावनी दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में आने वाला विदेशी प्रत्यक्ष और संस्थागत निवेश (Foreign Investment) सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। दुनिया भर के बड़े-बड़े कॉरपोरेट घराने, वैश्विक निवेशक और वित्तीय संस्थान अपने भारी-भरकम कर्ज के संकट की खबरों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी बाजार में लगातार झमाझम पैसा लगा रहे हैं। इस विरोधाभासी स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किस वजह से निवेशक बढ़ते कर्ज के जोखिम के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इतना अधिक भरोसा जता रहे हैं और इसके पीछे की रणनीतिक व आर्थिक मजबूरियां क्या हैं। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि अमेरिकी बाजार की वह कौन सी ताकतें हैं जो निवेशकों को अपनी ओर चुंबक की तरह खींच रही हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज और वित्तीय विशेषज्ञों की गहरी चिंताएं

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी सरकार के कुल कर्ज के आंकड़े जिस रफ्तार से बढ़े हैं, उसने वैश्विक वित्तीय संस्थानों की नींद उड़ा दी है। खरबों डॉलर के इस भारी कर्ज के बोझ के कारण कई रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों ने यह आशंका जताई है कि यदि समय रहते अमेरिकी राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह दुनिया की पूरी वित्तीय व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में जब कर्ज उसकी जीडीपी (GDP) के अनुपात से अत्यधिक बढ़ जाता है, तो आमतौर पर निवेशकों का विश्वास उस देश की मुद्रा और परिसंपत्तियों से डगमगाने लगता है। हालांकि, अमेरिका के मामले में यह पारंपरिक आर्थिक सिद्धांत फिलहाल उल्टा पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि कर्ज के आंकड़े जितने ऊंचे जा रहे हैं, विदेशी निवेशकों का उत्साह उतना ही अधिक बढ़ता जा रहा है। इस अनोखी परिस्थिति को समझने के लिए हमें अमेरिकी बाजार की आंतरिक संरचना, वहां के मजबूत बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के दबदबे को बहुत करीब से देखना होगा।

जोखिम के बावजूद अमेरिका में पैसा क्यों लगा रहे हैं दुनिया भर के इन्वेस्टर्स?

इस सवाल का सबसे बड़ा और मुख्य जवाब यह है कि वैश्विक निवेशकों की नजर में आज भी अमेरिका दुनिया का सबसे सुरक्षित, पारदर्शी और तरल वित्तीय बाजार (Liquid Financial Market) बना हुआ है। भले ही अमेरिका पर राष्ट्रीय कर्ज का बोझ अधिक है, लेकिन वहां के शेयर बाजार, टेक सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सरकारी बॉन्ड जैसी संपत्तियां निवेशकों को जितना सुरक्षित रिटर्न देती हैं, उतना दुनिया के किसी अन्य बाजार में मिलना बेहद कठिन है। इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और बड़े फंड मैनेजर्स अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी डॉलर और डॉलर-डिनोमिनेटेड एसेट्स को सबसे बड़ा ढाल मानते हैं। जब दुनिया के बाकी हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ती हैं, तो वैश्विक पूंजी का रुख स्वाभाविक रूप से अमेरिका की तरफ मुड़ जाता है, जिसे ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) की श्रेणी में रखा जाता है। यही कारण है कि कर्ज के भारी आंकड़ों की बहस एक तरफ चलती रहती है, लेकिन निवेशकों का पैसा लगातार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धमनियों में बहता रहता है।

तकनीकी नवाचार, वॉल स्ट्रीट का दबदबा और वैश्विक आधिपत्य के भविष्य के मायने

अमेरिकी बाजार में विदेशी निवेश के इस ऐतिहासिक सैलाब के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण, ग्रीन एनर्जी और अत्याधुनिक तकनीकी कंपनियों (Silicon Valley Tech Giants) का अभूतपूर्व विकास भी एक बहुत बड़ा कारण है। दुनिया भर के निवेशक यह अच्छी तरह जानते हैं कि भविष्य की तकनीकों पर नियंत्रण रखने वाली कंपनियां मुख्य रूप से अमेरिकी धरती पर ही पनप रही हैं, और इसलिए उनके शेयरों में निवेश करने से भारी मुनाफा कमाने की पूरी संभावना बनी रहती है। वॉल स्ट्रीट की मजबूत वित्तीय प्रणालियां और सख्त निवेशक संरक्षण कानून भी वैश्विक पूंजीपतियों को यह भरोसा दिलाते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि वर्तमान में यह अंधाधुंध निवेश भले ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गति दे रहा हो, लेकिन यदि आने वाले समय में कर्ज के संकट को गंभीरता से नहीं संभाला गया, तो इसके दूरगामी परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर, अमेरिका में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी निवेश का यह मौजूदा दौर इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि आधुनिक वैश्विक वित्त की शतरंज पर अमेरिकी बाजार की पकड़ आज भी सबसे मजबूत बनी हुई है।