भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय गंगा जल समझौते से लेकर ईंधन की सप्लाई तक, ढाका के विदेश मंत्री का दिल्ली दौरा क्यों है खास?

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News India Live, Digital Desk: भारत और बांग्लादेश के बीच मित्रता की जड़ों को और गहरा करने के लिए कूटनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री की आगामी भारत यात्रा केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिहाज से एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाली है। इस दौरे के केंद्र में जहां 1996 की ऐतिहासिक गंगा जल संधि का नवीनीकरण है, वहीं ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक गलियारे को लेकर भी बड़े समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।

गंगा जल संधि का भविष्य और साझा जल प्रबंधन

इस हाई-प्रोफाइल दौरे का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा ‘गंगा जल बंटवारा संधि’ का नवीनीकरण है। 1996 में हुई यह 30 वर्षीय संधि 2026 में समाप्त होने वाली है। ढाका चाहता है कि समय रहते इसके विस्तार पर ठोस सहमति बन जाए, ताकि कृषि और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, तीस्ता नदी और अन्य 54 साझा नदियों के जल प्रबंधन को लेकर भी बातचीत की मेज पर बड़े प्रस्ताव रखे जा सकते हैं।

एनर्जी कॉरिडोर और ईंधन की निर्बाध सप्लाई

भारत और बांग्लादेश के बीच ‘एनर्जी कनेक्टिविटी’ को लेकर भी इस बार आर-पार की बात होने की संभावना है। बांग्लादेश अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत से रिफाइंड तेल और बिजली की निरंतर आपूर्ति की उम्मीद कर रहा है। मैत्री पाइपलाइन के जरिए होने वाली सप्लाई की समीक्षा और भविष्य में एलएनजी (LNG) क्षेत्र में सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच अहम सहमति बन सकती है। यह न केवल बांग्लादेश के उद्योगों के लिए संजीवनी होगा, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा बाजार सुनिश्चित करेगा।

सीमा सुरक्षा और व्यापारिक सुगमता पर जोर

कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में सीमा प्रबंधन (Border Management) और ‘जीरो कैजुअल्टी’ नीति पर भी चर्चा होगी। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स (जैसे रेल और सड़क संपर्क) को गति देने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। विदेश मंत्री की इस यात्रा से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत अपने सबसे भरोसेमंद पड़ोसी के साथ रिश्तों को एक नए ऊंचे पायदान पर ले जाने के लिए तैयार है।

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