
भारतीय नौसेना के इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम और ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जो देश की समुद्री ताकत और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रहा है। देश की राजधानी और तटीय क्षेत्रों से लेकर रक्षा गलियारों तक इस समय एक ही नाम की सबसे ज्यादा गूंज है, और वह है भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से निर्मित फ्लीट सपोर्ट शिप (Fleet Support Ship) ‘सूर्या’ (INS Surya)। देश के रक्षा मंत्री ने एक भव्य और गरिमामयी समारोह के बीच इस विशालकाय और अत्याधुनिक युद्धपोत को भारतीय नौसेना के बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल कर दिया है। इस मौके पर अपने ओजस्वी संबोधन में रक्षा मंत्री ने गर्व के साथ कहा कि ‘सूर्या’ केवल एक जहाज नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन की उस बुलंदी का जीवंत प्रतीक है, जो अब समुद्र की गहराइयों से लेकर महासागरों की लहरों तक भारत के अजेय पराक्रम का डंका बजा रहा है। इस विशाल युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति पहले से कई गुना अधिक मजबूत हो गई है, जिससे विरोधी देशों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।
क्या होती है फ्लीट सपोर्ट शिप की भूमिका और क्यों है यह नौसेना के लिए बेहद खास
आम तौर पर जब हम नौसेना की बात करते हैं, तो हमारे जहन में युद्धपोत, पनडुब्बियां और विध्वंसक (Destroyers) जहाजों के नाम आते हैं जो सीधे दुश्मनों पर हमला करते हैं। लेकिन किसी भी नौसेना को खुले समंदर में लंबे समय तक टिके रहने और बिना किसी रुकावट के हजारों मील दूर तक ऑपरेशन चलाने के लिए ‘फ्यूल’, ‘गोला-बारूद’, ‘राशन’ और अन्य साजो-सामान की लगातार जरूरत पड़ती है। यहीं पर फ्लीट सपोर्ट शिप यानी बेड़े को सहायता देने वाले इन जहाजों की असली भूमिका शुरू होती है। ‘सूर्या’ युद्धपोत वास्तव में एक तैरते हुए गोदाम और रिफ्यूलिंग स्टेशन की तरह काम करेगा, जो समंदर के बीचों-बीच युद्धपोतों को डीजल, पानी, स्पेयर पार्ट्स और जरूरी रसद आसानी से मुहैया कराएगा। इसके आ जाने से अब भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों को रसद या ईंधन के लिए बार-बार किसी बंदरगाह पर वापस लौटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, बल्कि वे महीनों तक हिंद महासागर और उससे आगे के गहरे समुद्रों में गश्त लगाते हुए दुश्मनों की हरकतों पर पैनी नजर रख सकेंगे।
अत्याधुनिक तकनीक, भारी वजन उठाने की क्षमता और सामरिक ताकत
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) और भारतीय नौसेना के इंजीनियरों के संयुक्त प्रयासों से तैयार किए गए इस ‘सूर्या’ फ्लीट सपोर्ट शिप की तकनीकी विशेषताएं दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर रही हैं। यह पोत अपने साथ हजारों टन ईंधन, भारी सैन्य साजो-सामान और जरूरी युद्धक सामग्री ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम, आधुनिक रडार और सेल्फ-डिफेंस हथियार प्रणालियां लगाई गई हैं ताकि किसी भी आपातकालीन या शत्रुतापूर्ण स्थिति में यह जहाज अपनी सुरक्षा खुद करने के साथ-साथ अन्य जहाजों को भी कवर दे सके। रक्षा जानकारों का कहना है कि चीन जैसे देशों द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति लगातार बढ़ाने की कोशिशों के बीच ‘सूर्या’ का बेड़े में शामिल होना भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। अब भारतीय नौसेना किसी भी अप्रत्याशित समुद्री चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर और तैयार मुद्रा में आ चुकी है, जिसे दुनिया की कोई भी ताकत आसानी से नजरअंदाज नहीं कर सकती।
रक्षा मंत्री का बड़ा बयान और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
नौसेना में ‘सूर्या’ के जिलविएंट और कमिशनिंग समारोह के दौरान देश के रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में देश के वैज्ञानिकों, शिपयार्ड के कामगारों और नौसेना के अधिकारियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों और हथियारों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों के आयात पर निर्भर रहता था, लेकिन आज का नया भारत अपनी जरूरत के आधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और विमान अपने ही देश के कारखानों में बना रहा है। ‘सूर्या’ का यह सफल प्रक्षेपण और नौसेना में इसका शामिल होना इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया का एक नया सिरमौर बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। आने वाले समय में इस श्रेणी के और भी जहाजों को बेड़े में शामिल किए जाने की योजना है, जिससे ब्लू-वाटर नेवी (Blue-Water Navy) के रूप में भारत की वैश्विक ताकत और अधिक प्रखर होकर उभरेगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के हर नागरिक के सीने को गर्व से चौड़ा करने के लिए काफी है, जो यह दर्शाती है कि हमारा देश हर मोर्चरी पर अजेय बनने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
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