
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज का दिन काफी सतर्कता भरा रहने वाला है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे संकेतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर भारतीय घरेलू सूचकांकों यानी सेंसेक्स और निफ्टी पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करते हैं या अपनी पोजीशन्स पर नजर बनाए हुए हैं, तो आज के कारोबारी सत्र में बाजार की चाल काफी उतार-चढ़ाव भरी हो सकती है। विदेशी बाजारों के कमजोर रुझानों और ऊर्जा संकट के गहराने से निवेशकों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
कारोबारी हफ्ते की शुरुआत से ठीक पहले गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) ने घरेलू बाजार में सुस्त और कमजोर शुरुआत होने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। सिंगापुर एक्सचेंज पर ट्रेड करने वाले इस फ्यूचर्स इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई है, जो यह बताती है कि आज भारतीय शेयर बाजार की ओपनिंग लाल निशान में हो सकती है। जानकारों का मानना है कि पिछले सत्र के दबाव को देखते हुए आज बाजार के दिग्गज शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की शुरुआती चाल को जल्दबाजी में भांपने के बजाय थोड़ा धैर्य रखें और मजबूत सपोर्ट लेवल्स पर अपनी नजर बनाए रखें।
सिर्फ घरेलू वायदा बाजार ही नहीं, बल्कि प्रमुख एशियाई बाजारों में भी आज सुबह से मंदी का माहौल छाया हुआ है। जापान के निक्केई और दक्षिण कोरिया के कॉस्पी समेत अधिकतर एशियाई सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख और वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों की आशंकाओं ने विदेशी निवेशकों का जोखिम उठाने का जज्बा थोड़ा धीमा कर दिया है। वॉल स्ट्रीट पर पिछले सत्र के दौरान तकनीकी शेयरों में हुई बिकवाली का असर भी आज एशियाई और भारतीय बाजारों पर साफ तौर पर हावी होता दिखाई दे रहा है।
शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल (Crude Oil) बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच तनातनी के चलते तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे ऊर्जा कीमतों में यह आग लगी है। भारत अपनी कुल जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड का 90 डॉलर के पार जाना देश के चालू खाते के घाटे और महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और वैश्विक बाजारों के टूटने से घरेलू स्तर पर एविएशन, पेंट, टायर और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है। इन सेक्टर्स की कंपनियों की लागत सीधे तौर पर क्रूड ऑयल से जुड़ी होती है, इसलिए मार्जिन प्रभावित होने की पूरी आशंका है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी बाजार की चाल को थामने का काम कर रही है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी से बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, फिर भी निवेशकों को आज के सत्र में बेहद संभलकर ट्रेड करने की जरूरत है।
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