भारतीय रेलवे का नया कीर्तिमान: 360 कंटेनर्स लेकर 422 KM दौड़ी डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन, माल ढुलाई में बचेगा भारी समय और पैसा

देश में लॉजिस्टिक्स लागत को घटाने और माल ढुलाई की रफ्तार को कई गुना तेज करने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रेलवे ने देश के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT), मुंबई से गुजरात के वडोदरा मंडल स्थित वर्नामा में कॉनकोर (CONCOR) के जीसीटी टर्मिनल तक पहली बार डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन का सफल संचालन किया है। इस विशेष ट्रेन ने 360 मानक कंटेनर्स (360 TEUs) के विशाल भार के साथ लगभग 422 किलोमीटर की दूरी वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) पर सफलतापूर्वक तय की है।

1.3 किलोमीटर लंबी ट्रेन और 360 कंटेनर्स का अद्भुत कॉम्बिनेशन

रेल मंत्रालय द्वारा साझा की गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, इस विशाल लॉन्ग-हॉल फॉर्मेशन को तैयार करने के लिए दो अलग-अलग डबल-स्टैक रैकों को आपस में कपल (जोड़ा) किया गया था:

  • अग्रणी रैक (Leading Rake): इसे लोकोमोटिव संख्या 60311 द्वारा खींचा गया, जिसने 45+1 वैगनों की संरचना में 180 कंटेनर (1,817 टन वजन) का भार वहन किया।

  • पीछे का रैक (Trailing Rake): इसे लोकोमोटिव संख्या 24690 द्वारा खींचा गया, जिसमें भी 45+1 वैगनों पर 180 कंटेनर (2,105 टन वजन) लदे थे।

  • कुल क्षमता: दोनों रैकों ने मिलकर एक ही मूवमेंट में कुल 360 टीईयू (Twenty-foot Equivalent Units) कंटेनरों को 422 किलोमीटर दूर गंतव्य तक पहुंचाया।

माल ढुलाई लागत और समय में होगी भारी बचत

आमतौर पर 360 कंटेनरों को बंदरगाह से देश के भीतरी हिस्सों (Inland Depots) तक भेजने के लिए कम से कम दो से तीन अलग-अलग मालगाड़ियों या सैकड़ों ट्रकों की आवश्यकता होती थी।

एक ही बार में डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन चलाने से कई बड़े आर्थिक लाभ होंगे:

  1. ट्रैक क्षमता का अधिकतम उपयोग: पटरियों पर अलग-अलग ट्रेनों के बजाय एक ही लंबे रैक को चलाने से रूट ऑक्यूपेंसी कम होगी और ट्रैक की क्षमता दोगुनी हो जाएगी।

  2. टर्नअराउंड टाइम में कमी: पोर्ट्स पर जहाजों से उतरने वाले कंटेनरों की त्वरित निकासी (Faster Evacuation) होगी, जिससे बंदरगाहों पर कंटेनरों का ‘ड्वेल टाइम’ (रुकने का समय) तेजी से घटेगा।

  3. ईंधन और इंजनों की बचत: अलग-अलग ट्रेनों के लिए अतिरिक्त लोकोमोटिव और क्रू स्टाफ की जरूरत कम होगी, जिससे रेलवे की परिचालन लागत (Operational Cost) में सीधी कटौती होगी।

ग्रीन लॉजिस्टिक्स: सड़कों पर जाम और कार्बन उत्सर्जन से मिलेगी राहत

यह पूरी ट्रेन हाई-राइज ओवरहेड इलेक्ट्रिकल (OHE) वायर के तहत पूरी तरह इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव से संचालित की गई। एक अकेली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन सड़क मार्ग से चलने वाले सैकड़ों डीजल ट्रकों के बराबर कार्गो ढोने में सक्षम है। इससे न केवल राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का दबाव और ट्रैफिक जाम घटेगा, बल्कि देश के कार्बन फुटप्रिंट और कच्चे तेल के आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मील का पत्थर

पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (WDFC) का जेएनपीटी पोर्ट के साथ पूर्ण जुड़ाव भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाई दे रहा है। विकसित देशों की तर्ज पर कम लागत और तेज गति वाली यह रेल आधारित कार्गो प्रणाली आयातकों और निर्यातकों को समय पर माल पहुंचाने की गारंटी देगी, जिससे भारत में कुल लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14% से घटाकर 8-9% के वैश्विक मानक तक लाने के लक्ष्य को रफ्तार मिलेगी।