
सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के समापन के साथ ही हिंदू पंचांग के छठे महीने यानी भाद्रपद मास (भादो) का आरंभ 29 अगस्त से होने जा रहा है। सनातन धर्म में भाद्रपद मास को भक्ति, तप, साधना और आत्म-संयम की दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है। चातुर्मास के अंतर्गत आने वाले इस पावन महीने में भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना के कई बड़े पर्व मनाए जाते हैं। इस माह में कजरी तीज से लेकर जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेशोत्सव और अनंत चतुर्दशी जैसे महापर्वों की लगातार झड़ी लगने वाली है।
भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व और मुख्य नियम
शास्त्रों में भाद्रपद मास को भगवान विष्णु के अवतारों और गणेश जी की पूजा के लिए समर्पित माना गया है। श्रीमद्भागवत और पुराणों के अनुसार, इसी महीने में भगवान विष्णु ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में और भगवान गणेश ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लिया था।
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खान-पान के नियम: भाद्रपद में पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण कच्चा दूध, दही और पत्तेदार सब्जियों का त्याग करने का विधान है।
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दान और पुण्य: इस महीने में गुड़, तिल, छाता, वस्त्र और अन्न का दान करना महापुण्यकारी माना जाता है।
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साधना का फल: इस माह में नियमित श्रीमद्भागवत कथा का पाठ, विष्णु सहस्रनाम और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से जीवन के सभी पापों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
भाद्रपद मास (भादो) के प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी सूची
भाद्रपद माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाले प्रमुख पर्वों का कैलेंडर इस प्रकार है:
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29 अगस्त: भाद्रपद मास (कृष्ण पक्ष प्रतिपदा) का विधिवत आरंभ।
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31 अगस्त – कजरी तीज (बूढ़ी तीज / सातुड़ी तीज): सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला निर्जला व्रत।
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3 सितंबर – श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (रोहिणी नक्षत्र/अष्टमी तिथि): भगवान विष्णु के आठवें पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा।
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4 सितंबर – नंदोत्सव और दही हांडी: मंदिरों और पंडालों में नंदोत्सव और दही हांडी की भव्य धूम।
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8 सितंबर – अजा एकादशी: पापों का क्षय करने वाली एकादशी का पावन व्रत।
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10 सितंबर – भाद्रपद कृष्ण प्रदोष व्रत: भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्ति का त्रयोदशी व्रत।
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11 सितंबर – भाद्रपद अमावस्या: पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी अमावस्या।
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14 सितंबर – हरतालिका तीज: माता पार्वती और भोलेनाथ के पुनर्मिलन का पावन निर्जला व्रत।
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15 सितंबर – गणेश चतुर्थी (गणेशोत्सव का आरंभ): घर-घर और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा की स्थापना और 10 दिवसीय गणेशोत्सव की भव्य शुरुआत।
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16 सितंबर – ऋषि पंचमी: सप्तऋषियों की विशेष पूजा और पाप-मुक्ति का व्रत।
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19 सितंबर – राधाष्टमी: बरसाने और देश भर के कृष्ण मंदिरों में राधा रानी का जन्मोत्सव।
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22 सितंबर – परिवर्तिनी एकादशी (जलझूलनी एकादशी): मान्यता है कि इस दिन शयन कर रहे भगवान विष्णु करवट बदलते हैं।
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25 सितंबर – अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन: 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा।
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26 सितंबर – भाद्रपद पूर्णिमा और पितृ पक्ष (श्राद्ध) का आरंभ: भादो माह का समापन और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले 16 दिवसीय पितृ पक्ष की शुरुआत।
भाद्रपद मास का यह पूरा पखवाड़ा आध्यात्मिक शांति, भक्ति और पारिवारिक उत्सवों से भरा रहेगा। इस पूरे माह में श्रद्धा भाव से किए गए व्रत और उपासना से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
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