
आधुनिक समय में खराब जीवनशैली और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी एक महामारी की तरह पूरी दुनिया में तेजी से फैल रही है, जिसके इलाज के लिए करोड़ों लोग रोजाना एंटी-डिएबेटिक दवाओं का सेवन करते हैं। लेकिन हाल ही में चिकित्सा विज्ञान और फार्मास्युटिकल रिसर्च के क्षेत्र से एक ऐसी डरावनी और चिंताजनक खबर सामने आई है जिसने डॉक्टरों और मरीजों दोनों की नींद उड़ा दी है। दुनिया भर के जाने-माने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक व्यापक मेडिकल रिसर्च में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से नीचे लाने वाली कुछ खास प्रकार की दवाइयों के लंबे समय तक इस्तेमाल से शरीर में एक अन्य बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी के विकसित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस रिसर्च के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की शुगर कम करने वाली दवा का अंधाधुंध सेवन करना सेहत के लिए भारी जोखिम भरा साबित हो सकता है।
शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस गहन जांच में यह बात सामने आई है कि जो दवाइयां हमारे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को कृत्रिम तरीकों से बहुत जल्दी नियंत्रित करती हैं, वे शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे कि किडनी, लिवर और हृदय की कार्यप्रणाली पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। रिसर्च के अनुसार, इन दवाओं के लगातार और लंबे सेवन से शरीर की आंतरिक कोशिकाओं में गंभीर सूजन (Inflammation), चयापचय असंतुलन (Metabolic Imbalance) और अंगों के फेल होने जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह देखा गया है कि ये दवाइयां शरीर में कुछ विशेष प्रकार के टॉक्सिन्स को बढ़ावा देती हैं, जो आगे चलकर कैंसर या गंभीर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular Disease) जैसी भयानक बीमारियों का कारण बन सकती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दवाइयां बीमारी को नियंत्रित करने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन जब उनके साइड-इफेक्ट्स इस स्तर के होने लगें, तो यह आधुनिक चिकित्सा जगत के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती बन जाती है।
इस सनसनीखेज रिसर्च के सार्वजनिक होने के बाद आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हर दवा असुरक्षित है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों और फार्मा एक्सपर्ट्स ने बताया है कि सभी दवाइयां खतरनाक नहीं होतीं, बल्कि समस्या तब पैदा होती है जब मरीज बिना किसी चिकित्सीय देखरेख के, बिना अपनी मेडिकल हिस्ट्री की जांच कराए, ओवर-द-काउंटर दवाइयां लंबे समय तक खाते रहते हैं या डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक (Dosage) में अपनी मर्जी से बदलाव करते हैं। इसके अलावा, कई बार बाजार में आने वाली नई जनरेशन की दवाओं के दीर्घकालिक प्रभावों (Long-term effects) का पूरा डेटा शुरुआती दौर में उपलब्ध नहीं होता, जो बाद में इस प्रकार के चौंकाने वाले खुलासों के रूप में सामने आता है। मरीजों को यह समझने की जरूरत है कि दवाइयां केवल एक सपोर्ट सिस्टम हैं, और असली इलाज तो खान-पान में सुधार, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक रूप से इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखने में ही निहित है।
यदि आप भी डायबिटीज से पीड़ित हैं और अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, तो इस रिसर्च के नतीजों से घबराने के बजाय एक सतर्क और समझदार दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। डॉक्टरों की यह मुख्य सलाह है कि कभी भी अपनी मर्जी से डॉक्टर की पर्ची के बिना दवाएं न बदलें और न ही उनका सेवन बंद करें, बल्कि समय-समय पर अपने संपूर्ण शरीर की मेडिकल जांच (Full Body Health Checkup) करवाते रहें। इसके साथ ही, अपने भोजन में रिफाइंड शुगर, मैदे और जंक फूड का पूरी तरह से त्याग करके ताजी हरी सब्जियां, फाइबर युक्त आहार और पर्याप्त पानी को शामिल करना चाहिए। योग, प्राणायाम और तेज पैदल चलना (Morning Walk) जैसी शारीरिक गतिविधियां नेचुरल तरीके से ब्लड शुगर को कम करने में अचूक औषधि का काम करती हैं। इस प्रकार की सचेत जीवनशैली अपनाकर ही हम इन जानलेवा बीमारियों के खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं और एक स्वस्थ व लंबा जीवन जी सकते हैं।
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