
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। यदि आप भी ब्रिटेन यानी यूके (UK) जाकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने और उसके बाद वहीं सेटल होने का मन बना रहे हैं, तो आपको अपने इस फैसले पर एक बार फिर से गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के लेबर मार्केट में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं। वहां ब्रिटिश कंपनियों और संस्थानों द्वारा दी जाने वाली नौकरियों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे विदेशी छात्रों के लिए डिग्री पूरी करने के बाद भी नौकरी पाना लगभग नामुमकिन सा होता जा रहा है। हालात इतने बदल चुके हैं कि जो छात्र पहले ब्रिटेन को अपने भविष्य के लिए सबसे सुरक्षित और सुनहरा विकल्प मानते थे, अब उन्हें वापस अपने वतन लौटने या अन्य देशों का रुख करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
नौकरियों में 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट, कैसे चलेगा गुजारा
ब्रिटेन के जॉब बाजार से मिल रहे आंकड़े वाकई डराने वाले हैं, क्योंकि वहां अंतरराष्ट्रीय स्नातકો (International Graduates) के लिए अवसरों में सीधे तौर पर 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ चुकी है। पहले जहाँ छात्र अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा (Graduate Route Visa) के सहारे आसानी से फुल-टाइम कॉर्पोरेट जॉब पा लेते थे, वहीं अब स्थिति बिल्कुल उलट हो चुकी है। ब्रिटेन की स्थानीय कंपनियों ने विदेशी नागरिकों को स्पॉन्सर करने और नौकरी पर रखने के नियमों को बेहद कड़ा और जटिल बना दिया है। इसके अलावा, देश की आर्थिक मंदी और स्थानीय स्तर पर बढ़ती बेरोजगारी के कारण ब्रिटिश नियोक्ता अब बाहरी उम्मीदवारों की तुलना में स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस वजह से लाखों भारतीय छात्र जो भारी-भरकम लोन लेकर यूके की यूनिवर्सिटी में दाखिला लेते हैं, वे कोर्स पूरा होने के बाद भी खाली हाथ बैठने को विवश हो रहे हैं।
कड़े वीजा नियम और राजनीतिक बदलाव बने सबसे बड़ी वजह
ब्रिटेन में विदेशी छात्रों के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ने के पीछे वहां की सरकार द्वारा हाल के वर्षों में लिए गए कई कड़े नीतिगत फैसले और वीजा नियम हैं। ब्रिटेन की पिछली और वर्तमान सरकारों ने आव्रजन (Immigration) को नियंत्रित करने के नाम पर स्टूडेंट वीजा और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं। छात्रों के साथ आने वाले आश्रितों (Dependents) के आने पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं, जिससे वहां रहना और पढ़ना आर्थिक रूप से और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। राजनीतिक दबाव और कड़े होते इमिग्रेशन कानूनों के कारण वहां के विश्वविद्यालयों में भी विदेशी छात्रों के दाखिले के रुझान में कमी आने लगी है। जानकारों का कहना है कि ब्रिटेन का यह रुख साफ इशारा करता है कि वे अब बाहर से आने वाले युवाओं को अपने लेबर मार्केट में ज्यादा जगह देने के पक्ष में नहीं हैं।
भारतीय छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ा वित्तीय और मानसिक संकट
ब्रिटेन में पढ़ाई और नौकरी के इस बदलते और निराशाजनक परिदृश्य का सबसे बड़ा असर भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों और उन छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है, जो अपनी गाढ़ी कमाई या बैंक से भारी कर्ज लेकर वहां की महंगी यूनिवर्सिटीज की फीस भरते हैं। ब्रिटेन में पाउंड की ऊंची कीमत और वहां रहने का भारी खर्च (Living Cost) पहले से ही बहुत ज्यादा था, और अब यदि डिग्री मिलने के बाद भी नौकरी न मिले, तो छात्र भारी कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों और एजुकेशन कंसल्टेंट्स का भी यही सुझाव है कि छात्र बिना सोचे-समझे सिर्फ ट्रेंड या भेड़चाल में आकर ब्रिटेन का रुख न करें। इसके बजाय, उन देशों या विकल्पों को चुनें जहाँ रोजगार की संभावनाएं बेहतर हों और विदेशी छात्रों के लिए नियम इतने ज्यादा कड़े न हों, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के आर्थिक या मानसिक संकट का सामना न करना पड़े।
girls globe