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बैठक से पहले एजेंडा और विदेश यात्रा पर सख्ती: जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने लिए बड़े फैसले, वोटरों को भी दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। हाल के दिनों में आंतरिक कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर छिड़े विवादों और विपक्ष के हमलों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने शनिवार को एक बेहद अहम पूर्ण बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की मौजूदगी में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में आयोग ने अपनी पारदर्शिता, आंतरिक अनुशासन और मतदाता सेवाओं को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए। अब आयोग की बैठकों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए यह तय किया गया है कि किसी भी बैठक का एजेंडा पहले ही जारी किया जाएगा और अधिकारियों को किसी भी आधिकारिक विदेश यात्रा पर जाने से पहले आयोग से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी।

हालिया विवादों में आयोग की निष्पक्षता, कार्य-विभाजन और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने पारदर्शिता की नई मिसाल पेश करते हुए न केवल आंतरिक व्यवस्था को सख्त किया है, बल्कि आम मतदाताओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं।

आयोग के कामकाज को लेकर अब तक यह आरोप लगता रहा था कि फैसले बिना पूर्व सूचना के अचानक लिए जाते हैं। इस धारणा को पूरी तरह खत्म करने के लिए चुनाव आयोग ने नियम बनाया है कि भविष्य में होने वाली आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले से ही तैयार कर प्रसारित किया जाएगा।

इसके साथ ही बैठकों के कार्यवृत्त (Minutes of the Meeting) भी जारी किए जाएंगे, जिससे आयोग की चर्चाओं और निर्णयों के बारे में पूरी स्पष्टता बनी रहे। आयोग का मानना है कि कार्यप्रणाली को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाने से राजनीतिक दलों, हितधारकों और देश के आम नागरिकों का चुनावी व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

बैठक के दौरान लिया गया दूसरा बड़ा और सख्त फैसला चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुशासन और विदेश यात्रा से संबंधित है:

  • विदेश यात्रा से पहले आयोग की मंजूरी: आयोग ने नियम बना दिया है कि चुनाव आयोग से जुड़ा कोई भी अधिकारी बिना आयोग की पूर्व और स्पष्ट अनुमति के किसी भी आधिकारिक विदेश यात्रा पर नहीं जा सकेगा।

  • आयुक्तों के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन: मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को जारी किए गए सभी प्रशासनिक निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

  • सालाना परफॉर्मेंस रिपोर्ट (APAR): सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) को पूरा करने के लिए एक सख्त समय-सीमा तय की गई है, जिसे हर साल 31 दिसंबर तक पूरा करना अनिवार्य होगा।

स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड स्टेटस’ या तकनीकी गड़बड़ियों के कारण नोटिस मिले हैं, उन्हें लेकर आयोग ने बेहद मानवीय और राहत भरा फैसला सुनाया है:

  • घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे BLO: मतदाताओं को अब ईआरओ (ERO) या एईआरओ (AERO) कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद नोटिस वाले मतदाताओं के घर जाएंगे, जरूरी दस्तावेज एकत्रित करेंगे और उन्हें सीधे ECINet पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

  • विशेष मामलों में केवल ऑनलाइन सुनवाई: यदि किसी विशेष मामले में ERO सुनवाई जरूरी समझते हैं, तो वह भी अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। मतदाता की अनुपस्थिति में उसके परिवार का कोई भी बालिग सदस्य उस सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

  • गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क: सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे रैन बसेरों (Night Shelters) में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष कैंप और हेल्प डेस्क लगाएं ताकि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के अनुरोध पर चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में विसंगतियों को ठीक करने और दावे व आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम समय-सीमा में भी विस्तार कर दिया है:

  • दिल्ली: दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है, जबकि उनके अंतिम निपटारे की तिथि 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।

  • महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के लिए दावे-आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके समाधान की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 तय की गई है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कानूनों और नियमों के कड़े अनुपालन के लिए उसके प्रमुख पोर्टल ‘ECINet’ की तकनीकी समीक्षा की जाएगी। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाई गई है, जिसमें आईआईटी (IIT) और ट्रिपल आईटी (IIIT) के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। अब से आईटी से जुड़ा कोई भी नया प्रोजेक्ट अधिकारियों की समिति (COO) में व्यापक चर्चा और आयोग की औपचारिक मंजूरी के बाद ही लागू होगा।

हाल ही में कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र को लेकर छिड़े विवाद पर सफाई देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि वह पत्र आयोग या उसके आईटी प्रभाग की किसी नीति से संबंधित नहीं था, बल्कि वह केवल प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला था। साथ ही आयोग ने दोहराया कि 24 जून 2025 को पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कराने का फैसला पूर्ण पीठ द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 के अपने आदेश में पूरी तरह सही ठहराया है।