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बैंकों में जमा राशि ने तोड़े 10 साल के सभी रिकॉर्ड, डिपॉजिट ग्रोथ बढ़कर हुई 15.4%; देश भर में लोन की मांग में भी जोरदार तेजी

भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए इस समय बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक आंकड़े सामने आ रहे हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत होती नींव और आम नागरिकों के वित्तीय रुख को साफ तौर पर दर्शाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश के कमर्शियल बैंकों में ग्राहकों द्वारा जमा की जाने वाली राशि यानी डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) ने पिछले 10 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में बैंकों की कुल जमा वृद्धि दर शानदार तेजी के साथ 15.4 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। बचत के प्रति लोगों का बढ़ता रुझान और बैंकों द्वारा दी जा रही आकर्षक ब्याज दरें इस बंपर ग्रोथ के पीछे की मुख्य वजह मानी जा रही हैं।

खुदरा और कॉरपोरेट सेक्टर से लगातार बढ़ रही है कर्ज की भारी मांग

एक तरफ जहां बैंकों में पैसों की आवक यानी डिपॉजिट में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर विभिन्न सेक्टरों से कर्ज यानी क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) की मांग भी उसी रफ्तार से आसमान छू रही है। त्योहारी सीजन से लेकर बुनियादी ढांचे (Infrastructure), मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट और खुदरा यानी रिटेल लोन सेगमेंट (Retail Loans) में ग्राहकों और कारोबारियों का उत्साह देखते ही बनता है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि जब अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती है, तो उद्योगों को विस्तार देने के लिए और आम आदमी को अपने सपनों के घर या वाहन खरीदने के लिए भारी मात्रा में फंड की आवश्यकता होती है, जो इस समय साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

डिपॉजिट ग्रोथ में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?

वित्तीय विश्लेषकों और बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर निवेश के पारंपरिक और आधुनिक विकल्पों के प्रति लोगों की जागरूकता काफी ज्यादा बढ़ी है। बैंकों द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में जो बढ़ोतरी की गई थी, उसने आम जनता को अपनी गाढ़ी कमाई बैंकों में सुरक्षित तरीके से निवेश करने के लिए प्रेरित किया है। इसके अलावा, डिजिटल बैंकिंग और पैन इंडिया वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) अभियानों के कारण टियर-2 और टियर-3 शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के लोगों की सीधी पहुंच बैंकों तक आसान हुई है, जिसके परिणामस्वरूप डिपॉजिट का यह नया आंकड़ा 10 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचा है।

अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर इसका क्या होगा सीधा असर?

बैंकिंग जानकारों के अनुसार, डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ के बीच का यह बेहतरीन संतुलन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है। जब बैंकों के पास प्रचुर मात्रा में जमा राशि उपलब्ध होती है, तो वे बाजार में उद्योगों और आम नागरिकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर आसानी से लोन मुहैया करा पाते हैं। इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलता है और बाजार में लिक्विडिटी यानी नकदी का प्रवाह सुचारू रूप से चलता रहता है। आने वाले महीनों में उम्मीद जताई जा रही है कि बैंकिंग प्रणाली की यह मजबूत स्थिति देश की विकास दर (GDP Growth) को और अधिक गति प्रदान करेगी।