
हर माता-पिता का यह सबसे बड़ा सपना होता है कि उनकी बेटी जब उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में कदम रखे या जब उसके विवाह का समय आए, तो पैसों की तंगी कभी उसके सपनों के आड़े न आए। भारतीय परिवारों में बेटियों के सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए केंद्र सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana) आज भी सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बनी हुई है। मौजूदा समय में जब शेयर बाजार का जोखिम आम परिवारों को डराता है, तब भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी से लैस यह छोटी बचत योजना 8.2 प्रतिशत की शानदार चक्रवृद्धि ब्याज दर की पेशकश कर रही है। देश भर में, चाहे लखनऊ, दिल्ली, पटना, जयपुर जैसे बड़े शहर हों या ग्रामीण अंचल, हर जगह जागरूक अभिभावक इस योजना के जरिए बेटियों के भविष्य के लिए लाखों का सुरक्षित फंड तैयार कर रहे हैं। यदि आपका लक्ष्य भी बेटी के 21 साल के होने पर 50 लाख रुपये का एक बड़ा फंड तैयार करना है, तो एक सुनियोजित और नियमित मासिक बचत से यह मुकाम बहुत आसानी से हासिल किया जा सकता है।
सुकन्या समृद्धि योजना का पूरा गणित कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत पर टिका हुआ है। अगर आप बेटी के जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती उम्र में यह खाता खोलते हैं, तो आपको कुल 15 साल तक पैसे जमा करने होते हैं, जबकि खाता पूरे 21 साल में परिपक्व यानी मैच्योर होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके द्वारा जमा किए गए पैसे पर आखिरी के 6 साल बिना कोई नई किस्त डाले भी सरकार की तय ब्याज दर के अनुसार बंपर ब्याज जुड़ता रहता है। यदि आपका लक्ष्य परिपक्वता पर लगभग ₹50 लाख से ₹55 लाख का फंड पाने का है, तो SSY कैलकुलेटर के मुताबिक आपको सालाना लगभग ₹1,15,000 से ₹1,20,000 की बचत करनी होगी। इसे अगर मासिक बजट के नजरिए से देखें, तो आपको हर महीने करीब ₹9,500 से ₹10,000 रुपये सुकन्या खाते में जमा करने होंगे। 15 वर्षों के दौरान आपकी कुल जमा पूंजी लगभग ₹17.5 लाख से ₹18 लाख होगी, लेकिन मौजूदा 8.2 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज दर के हिसाब से 21वें वर्ष में परिपक्वता के समय आपको ब्याज के रूप में ₹35 लाख से अधिक की कमाई होगी, जिससे कुल मैच्योरिटी राशि ₹53 लाख से ₹55 लाख के आसपास पहुंच जाएगी।
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खुलवाना बेहद सरल और सुगम है। यह खाता किसी भी परिवार में अधिकतम दो बेटियों के लिए खोला जा सकता है, जबकि जुड़वां या तीन बच्चियां होने की विशेष स्थिति में नियमों के तहत तीसरी बच्ची के लिए भी छूट का प्रावधान है। बच्ची की उम्र जन्म से लेकर 10 वर्ष पूरी होने तक यह खाता किसी भी नजदीकी डाकघर (Post Office) या अधिकृत सरकारी व निजी कमर्शियल बैंक जैसे एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा आदि में खोला जा सकता है। खाता शुरू करने के लिए न्यूनतम प्रारंभिक जमा राशि केवल ₹250 है, और एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.50 लाख तक निवेश किया जा सकता है। खाता खुलवाने के लिए बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता या अभिभावक का पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पते का प्रमाण और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है। डाकघर और बैंकों ने अब डिजिटल बैंकिंग और नेट बैंकिंग के जरिए भी हर महीने ऑनलाइन किस्त जमा करने की आसान सुविधा उपलब्ध करा दी है।
सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ मोटा रिटर्न ही नहीं देती, बल्कि टैक्स बचत के मोर्चे पर भी यह देश की सबसे बेहतरीन स्कीमों में शुमार है। यह योजना आयकर कानून के तहत ‘EEE’ यानी Exempt, Exempt, Exempt श्रेणी में आती है। इसका पहला लाभ यह है कि आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत प्रति वर्ष जमा की जाने वाली ₹1.5 लाख तक की रकम पर टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। दूसरा फायदा यह है कि हर वित्तीय वर्ष में खाते में जुड़ने वाले ब्याज पर सरकार कोई टैक्स नहीं काटती, यानी पूरा ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त होता है। तीसरा और सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि 21 साल की मैच्योरिटी के बाद जब बेटी को ₹50 लाख या उससे अधिक का पूरा एकमुश्त फंड सौंपा जाएगा, तो उस पूरी निकासी राशि पर भी एक रुपये का भी टैक्स नहीं लगेगा। किसी भी बैंक एफडी या फिक्स्ड इनकम योजना में मिलने वाले ब्याज पर जहां टीडीएस कट जाता है, वहीं सुकन्या योजना निवेशकों की शुद्ध कमाई को पूरी तरह सुरक्षित रखती है।
अभिभावकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या 21 साल से पहले इस पैसे का कोई हिस्सा इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार के नियमों के मुताबिक, जब बेटी की उम्र 18 वर्ष पूरी हो जाती है या वह 10वीं कक्षा उत्तीर्ण कर लेती है, तब उसकी उच्च शिक्षा के खर्च के लिए खाते में जमा कुल बैलेंस का 50 प्रतिशत तक पैसा निकालने की अनुमति मिलती है। इसके लिए कॉलेज में दाखिले से जुड़े दस्तावेज दिखाने होते हैं। वहीं, यदि 18 वर्ष की आयु के बाद बेटी का विवाह तय हो जाता है, तो आवश्यक प्रमाण पत्र देकर खाता समय से पहले भी पूरी तरह बंद कराया जा सकता है। यदि किसी कारणवश किसी वित्तीय वर्ष में न्यूनतम ₹250 जमा नहीं हो पाते हैं, तो खाता डिफॉल्ट घोषित हो जाता है, जिसे प्रति वर्ष केवल ₹50 की पेनल्टी और न्यूनतम किस्त भरकर दोबारा नियमित कराया जा सकता है। अगर माता-पिता अनुशासन के साथ हर महीने तय बचत करते रहें, तो यह छोटी बचत योजना आने वाले समय में बेटी के पैरों पर खड़े होने और उसके बड़े सपनों को बिना किसी आर्थिक बोझ के पूरा करने का सबसे मजबूत आधार साबित होगी।
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