
भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी दिन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। सुबह बाजार की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दलाल स्ट्रीट पर बुल्स और बियर्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। दिग्गज शेयरों में बिकवाली के दबाव के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी ने कमाल दिखाते हुए 23,900 के बेहद अहम और मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। बाजार के जानकारों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मिले-जुले संकेतों और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली के चलते यह अस्थिरता देखी जा रही है।
मारुति और टाइटन के शेयरों में आई भारी बहार
भले ही मुख्य सूचकांकों पर दबाव दिख रहा था, लेकिन ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के दिग्गजों ने आज निवेशकों को मायूस नहीं किया। ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी और टाटा ग्रुप की टाइटन कंपनी के शेयरों में आज तगड़ी खरीदारी देखने को मिली। मजबूत तिमाही नतीजों की उम्मीद और फेस्टिव डिमांड के चलते इन दोनों शेयरों ने बाजार को नीचे गिरने से काफी हद तक संभाला। इसके अलावा कुछ चुनिंदा एफएमसीजी और आईटी शेयरों में भी निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दर्ज की गई, जिसने निफ्टी को 23,900 के ऊपर बनाए रखने में मदद की।
बैंकिंग और एनर्जी शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव
सेंसेक्स की गिरावट में आज सबसे बड़ा हाथ बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी सेक्टर के शेयरों का रहा। पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी के बाद आज निवेशकों ने इन सेक्टर्स में जमकर मुनाफावसूली (Profit Booking) की। हैवीवेट शेयरों में हुई इस बिकवाली ने सेंसेक्स की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया और वह हरे निशान से फिसलकर लाल निशान में बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी आज मिला-जुला रुख देखने को मिला, जिससे यह साफ है कि रिटेल निवेशक इस समय फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या है बाजार के संकेत
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी का 23,900 के ऊपर टिके रहना तकनीकी रूप से बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अगर निफ्टी इस स्तर को बरकरार रखता है, तो आने वाले दिनों में यह 24,000 के नए लाइफ-हाई स्तर को छूने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस उतार-चढ़ाव वाले माहौल में किसी भी बड़े निवेश से बचें और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट में खरीदारी) की रणनीति अपनाएं।
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