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बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार देगी हर साल ₹12,000: जानिए कौन कर सकता है NMMSS स्कॉलरशिप में आवेदन, पात्रता नियम और चयन प्रक्रिया

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार बच्चों की स्कूली शिक्षा बीच में न छूटे, इसके लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम’ (NMMSS) का संचालन किया जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि कक्षा 8वीं पास करने के बाद पारिवारिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। इस ड्रॉपआउट दर को रोकने और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक हर साल ₹12,000 (यानी ₹1,000 प्रति माह) की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करती है। प्रतिवर्ष पूरे देश से 1 लाख नए विद्यार्थियों को इस प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति के लिए चुना जाता है। यदि आपके घर या पड़ोस में भी कोई छात्र कक्षा 8वीं में अध्ययनरत है, तो इस योजना के नियम और आवेदन की प्रक्रिया विस्तार से समझना बेहद जरूरी है।

नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप केंद्र सरकार की पूरी तरह से वित्तपोषित एक प्रमुख कल्याणकारी छात्रवृत्ति योजना है। इस योजना के तहत कक्षा 8वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए राज्य स्तर पर एक चयन परीक्षा (NMMS Exam) आयोजित की जाती है। जो छात्र इस लिखित परीक्षा को उत्तीर्ण कर मेरिट सूची में स्थान बनाते हैं, उन्हें कक्षा 9वीं में प्रवेश लेते ही छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हो जाती है। योजना के तहत कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं तक लगातार 4 वर्षों तक प्रतिवर्ष ₹12,000 की सहायता राशि दी जाती है, यानी 4 साल में छात्र को कुल ₹48,000 का शिक्षा अनुदान प्राप्त होता है। यह पूरी राशि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे छात्र के बैंक खाते में भेजी जाती है।

इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार ने सख्त और पारदर्शी पात्रता मानदंड तय किए हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि विद्यार्थी वर्तमान में किसी राज्य सरकार के स्कूल, सरकारी सहायता प्राप्त (Government-Aided) स्कूल अथवा स्थानीय निकाय (Local Body/Municipal) द्वारा संचालित स्कूल में कक्षा 8वीं का नियमित छात्र होना चाहिए। छात्र ने कक्षा 7वीं की वार्षिक परीक्षा न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों (या समकक्ष ग्रेड) के साथ उत्तीर्ण की हो। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के विद्यार्थियों को अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दी जाती है, यानी उनके लिए 7वीं में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। पारिवारिक आय की दृष्टि से छात्र के माता-पिता की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय ₹3,50,000 (साढ़े तीन लाख रुपये) से अधिक नहीं होनी चाहिए।

केंद्र सरकार ने इस योजना को केवल आर्थिक रूप से वंचित और सामान्य सरकारी स्कूलों के बच्चों तक सीमित रखने के लिए कुछ श्रेणियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा है। निजी (Private/Unaided) स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya), जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), और सैनिक स्कूलों (Sainik Schools) के छात्र भी इसके पात्र नहीं हैं। साथ ही, वे विद्यार्थी जो राज्य सरकार द्वारा संचालित ऐसे आवासीय स्कूलों (Residential Schools) में पढ़ते हैं जहां रहने, खाने और पढ़ाई की सभी सुविधाएं सरकार द्वारा पूरी तरह निःशुल्क दी जाती हैं, उन्हें भी इस योजना में शामिल नहीं किया जाता।

छात्रवृत्ति के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा आयोजित दो चरणों वाली लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। इस परीक्षा में दो प्रमुख पेपर होते हैं: पहला ‘मेंटल एबिलिटी टेस्ट’ (MAT – मानसिक योग्यता परीक्षा) और दूसरा ‘स्कॉलैस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट’ (SAT – शैक्षिक अभिक्षमता परीक्षा)। MAT के अंतर्गत 90 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाते हैं, जो तर्कशक्ति, कोडिंग-डिकोडिंग, पैटर्न और विश्लेषणात्मक क्षमता पर आधारित होते हैं। वहीं SAT में 90 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें कक्षा 7वीं और 8वीं के पाठ्यक्रम के विज्ञान (35 प्रश्न), सामाजिक विज्ञान (35 प्रश्न) और गणित (20 प्रश्न) शामिल होते हैं। दोनों पेपर 90-90 मिनट के होते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों को दोनों पेपरों में मिलाकर कम से कम 40% अंक तथा आरक्षित वर्ग (SC/ST) को न्यूनतम 32% अंक उत्तीर्ण होने के लिए लाने होते हैं।

परीक्षा और नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर पंजीकरण के लिए छात्र के पास कुछ आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार होने चाहिए:

  • छात्र का पहचान पत्र एवं जन्म प्रमाण पत्र।

  • कक्षा 7वीं की अंकतालिका (Mark Sheet) की सत्यापित प्रति।

  • सक्षम राजस्व अधिकारी (तहसीलदार या एसडीएम) द्वारा जारी चालू वर्ष का वैध पारिवारिक आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)।

  • यदि लागू हो, तो सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate)।

  • दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अधिकृत प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र।

  • छात्र के स्वयं के नाम से खुला हुआ सक्रिय बचत बैंक खाता पासबुक (जो नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया – NPCI से लिंक्ड हो)।

  • हालिया पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और वर्तमान स्कूल से प्राप्त बोनाफाइड प्रमाणपत्र।

NMMSS का लाभ लेने की प्रक्रिया दो अलग-अलग चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में छात्र को कक्षा 8वीं में पढ़ते हुए अपने राज्य के संबंधित SCERT या परीक्षा नियामक प्राधिकारी के पोर्टल (या स्कूल के प्रधानाचार्य के माध्यम से ऑफलाइन/ऑनलाइन) पर राज्य स्तरीय चयन परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है। राज्य परीक्षा पास करने और जिले की मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद दूसरा चरण शुरू होता है। दूसरे चरण में छात्र को कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने पर केंद्र सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (scholarships.gov.in) पर जाकर अपना वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना होता है। लॉगिन के बाद ‘National Means-cum-Merit Scholarship Scheme’ का चयन कर अपना रोल नंबर, स्कूल विवरण और बैंक जानकारी दर्ज करनी होती है। स्कूल नोडल अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद छात्रवृत्ति की राशि जारी कर दी जाती है।

NMMSS केवल एक बार मिलने वाला पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह 4 साल का वित्तीय संबल है। हालांकि, हर साल छात्रवृत्ति को चालू (Renewal) रखने के लिए विद्यार्थी को अपनी अकादमिक प्रगति बनाए रखनी होती है। कक्षा 9वीं से 10वीं में रिन्यूअल के लिए छात्र को 9वीं की परीक्षा में न्यूनतम 55% अंक (SC/ST के लिए 50%) प्राप्त कर उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में छात्र को कम से कम 60% अंक (SC/ST के लिए 55%) हासिल करने होंगे, तभी कक्षा 11वीं में छात्रवृत्ति जारी रहेगी। इसके बाद कक्षा 11वीं की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करने पर 12वीं कक्षा की अंतिम छात्रवृत्ति राशि खाते में जमा की जाती है। यदि कोई छात्र किसी कक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाता है या पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसकी छात्रवृत्ति स्थाई रूप से रोक दी जाती है।