फॉर्मूला 1 नियमों में अचानक हुआ बड़ा बदलाव: मैक्स वर्स्टापेन के संन्यास की धमकी और 50G के खौफनाक क्रैश के बाद झुकी FIA

दुनिया की सबसे रफ्तार वाली और रोमांचक रेसिंग सीरीज फॉर्मूला 1 (Formula 1) के फैंस और खुद रेसरों के लिए एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। साल 2026 के लिए पहले से घोषित किए गए इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और मोटर जनरेटर यूनिट काइनेटिक (MGUK) पावर स्प्लिट नियमों को लेकर मोटरस्पोर्ट्स जगत में पिछले कई दिनों से भारी घमासान मचा हुआ था। चार बार के मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन मैक्स वर्स्टापेन समेत कई दिग्गज रेसर इन नियमों की खुलकर आलोचना कर रहे थे और वर्स्टापेन ने तो खेल से संन्यास तक लेने का गंभीर संकेत दे दिया था। इस बड़े विरोध और ट्रैक पर हुए हादसों के बाद आखिरकार फेडरेशन इंटरनेशनल डी ल’ऑटोमोबाइल (FIA), फॉर्मूला वन मैनेजमेंट (FOM), रेसिंग टीमों और पावर यूनिट निर्माताओं को झुकना पड़ा है। सभी पक्षों ने मिलकर साल 2027 और 2028 के आगामी सीज़न के नियमों में बड़े संशोधनों पर अपनी अंतिम सहमति जता दी है।

मैक्स वर्स्टापेन की नाराजगी और जापानी जीपी में ओली बेयरमैन का 50G का भयावह एक्सीडेंट बना वजह

नए नियमों को लेकर ड्राइवरों में भारी असंतोष था क्योंकि पैडल को पूरी तरह से छोड़े बिना भी रेसिंग कार की गति में अचानक आ रही भारी गिरावट ने रेसरों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था। इस तकनीकी खामी का सबसे डरावना रूप जापानी ग्रांड प्रिक्स (Japanese GP) के दौरान देखने को मिला, जब बैटरी डिप्लॉयमेंट में आई खराबी के कारण उभरते हुए रेसर ओली बेयरमैन की कार एक भयावह दुर्घटना का शिकार हो गई। इस क्रैश का इम्पैक्ट इतना जबरदस्त था कि बेयरमैन ने 50G के जानलेवा गुरुत्वाकर्षण बल (G-Force) के झटके का सामना किया। इस भयानक हादसे ने एफआईए को तुरंत एक्शन मोड में आने और पावर स्प्लिट नियमों में सुधार करने के लिए मजबूर कर दिया, जिसकी पुष्टि अब सभी हितधारकों ने एक बैठक में कर दी है।

जानिए अगले सीजन से क्या बदलेगा: 53/47 से बढ़ाकर 60/40 तक किया जाएगा इंजन आउटपुट

सहमत हुए नए बदलावों के अनुसार, अब कारों के इंजन आउटपुट और एनर्जी यूटिलाइजेशन (ऊर्जा उपयोग) में बड़ा फेरबदल किया जाएगा। 2026 के नियमों के तहत जो ICE/MGUK पावर अनुपात 53/47 तय किया गया था, उसे अब रेसरों की मांग पर अगले सीज़न (2027) के लिए बढ़ाकर 58/42 कर दिया जाएगा। इसके बाद साल 2028 के सीज़न में इसे और अपग्रेड करते हुए 60/40 करने का फैसला लिया गया है। इस रणनीतिक बदलाव का मुख्य उद्देश्य क्वालीफाइंग इवेंट्स और मुख्य रेस के दौरान कारों की गति को स्थिर रखना और ट्रैक पर अधिक रोमांचक और समतल रेसिंग को सक्षम बनाना है, ताकि ड्राइवरों को गति में अचानक आ रही गिरावट से जूझना न पड़े।

23 जून को मकाऊ में विश्व मोटर स्पोर्ट परिषद के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए पेश होगा ड्राफ्ट

FIA ने अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में साफ किया है कि इन प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा प्रबंधन (Energy Management) और ईंधन ऊर्जा प्रवाह की विशेषताओं से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को पूरी तरह दूर करना है। आयोग का मानना है कि इससे क्वालीफाइंग राउंड्स पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक और सुरक्षित हो जाएंगे, जबकि नए नियमों से उत्पन्न होने वाले सकारात्मक कॉम्पिटिशन पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। एफआईए अब इस औपचारिक अनुमोदन प्रक्रिया को सुपरफास्ट ट्रैक पर ले जाएगी ताकि सभी रेसिंग टीमों और पावर यूनिट निर्माताओं को संशोधित आवश्यकताओं के अनुकूल होने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह नया ड्राफ्ट आगामी 23 जून को मकाऊ में आयोजित होने वाली विश्व मोटर स्पोर्ट परिषद (WMSC) की बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

एफआईए अध्यक्ष मोहम्मद बेन सुलेयम ने कहा- खेल के भविष्य और फैंस के रोमांच की रक्षा करना हमारा फर्ज

इस ऐतिहासिक समझौते पर अपने विचार साझा करते हुए एफआईए के अध्यक्ष मोहम्मद बेन सुलेयम ने कहा कि फॉर्मूला 1 हमेशा से ही नई चुनौतियों का डटकर सामना करने और तकनीकी नवाचारों के जरिए नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए विकसित होता रहा है। उन्होंने कहा कि ये नए बदलाव खेल जगत में चल रहे सहयोगात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारे नियम रोमांचक रेसिंग के साथ-साथ दीर्घकालिक स्थिरता (Sustainability) को भी बढ़ावा दें। उन्होंने आगे कहा कि चैंपियनशिप के भविष्य और ड्राइवरों की सुरक्षा की रक्षा करना एफआईए की सबसे पहली जिम्मेदारी है और हम सभी टीमों, फॉर्मूला वन ग्रुप और निर्माताओं के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं, ताकि दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसकों को रेसिंग का सबसे बेहतरीन और सुरक्षित अनुभव मिल सके।