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प्रोटीन के चक्कर में कहीं भूल तो नहीं गए फाइबर? डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, दोनों की कमी होगी एक साथ पूरी

आजकल फिटनेस और वजन घटाने की होड़ में हर कोई हाई-प्रोटीन डाइट की बात कर रहा है। जिम जाने वाले युवाओं से लेकर वजन कम करने की चाह रखने वाले लोग अपने खाने में प्रोटीन का स्तर तो बढ़ा लेते हैं, लेकिन इस चक्कर में भोजन के सबसे महत्वपूर्ण घटक यानी ‘फाइबर’ (रफेज) को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट्स और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि जब शरीर में केवल प्रोटीन बढ़ता है और फाइबर की कमी हो जाती है, तो पाचन तंत्र बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके चलते गंभीर कब्ज, पेट फूलना (ब्लोटिंग), एसिडिटी, आंतों में सूजन और सुस्ती जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत के लिए जरूरी है, तो फाइबर उस प्रोटीन को सही तरीके से पचाने, आंतों के गुड बैक्टीरिया को पोषण देने और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का काम करता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन किया जाए जिनमें प्रोटीन और फाइबर का आदर्श संतुलन मौजूद हो।

भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध चना प्रोटीन और घुलनशील (सॉल्युबल) फाइबर का सबसे बेहतरीन पावरहाउस है। चाहे आप काला चना खाएं, काबुली चना (छोले) लें या भुना हुआ चना खाएं, ये दोनों पोषक तत्वों की कमी को चुटकियों में पूरा करते हैं।

  • पोषण का स्तर: एक कप उबले हुए चने में लगभग 14 से 15 ग्राम प्रोटीन और 12 से 13 ग्राम डायटरी फाइबर मिलता है।

  • फायदे: चने में मौजूद फाइबर आंतों के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और पेट को घंटों तक भरा रखता है, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत छूटती है। भुने चने को शाम के स्नैक के रूप में या उबले चने को चाट व सलाद में शामिल करना सबसे आसान तरीका है।

दालें और बीन्स भारतीय भोजन की रीढ़ हैं। विशेषकर राजमा (किडनी बीन्स), लोबिया (ब्लैक आइड पीज) और साबुत उड़द जैसी फलियां प्रोटीन और फाइबर का दोहरा लाभ देती हैं।

  • पोषण का स्तर: एक कटोरी पके हुए राजमा या लोबिया में लगभग 13 से 15 ग्राम प्रोटीन और 11 से 14 ग्राम फाइबर पाया जाता है।

  • फायदे: राजमा में मौजूद रेसिस्टेंट स्टार्च एक प्रकार का फाइबर है जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए प्रीबायोटिक का काम करता है। यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में बेहद मददगार है। इसे चावल के साथ सीमित मात्रा में या सूप और सलाद के तौर पर आसानी से खाया जा सकता है।

आकार में छोटे दिखने वाले ये बीज पोषक तत्वों के मामले में बड़े-बड़े सप्लीमेंट्स को मात देते हैं। ये न केवल प्रोटीन और फाइबर से भरे हैं, बल्कि इनमें दिल को स्वस्थ रखने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड भी प्रचुर मात्रा में होता है।

  • पोषण का स्तर: मात्र 2 चम्मच (लगभग 28 ग्राम) चिया सीड्स में करीब 4 से 5 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और 10 ग्राम तक फाइबर मौजूद होता है।

  • फायदे: जब चिया सीड्स को पानी में भिगोया जाता है, तो यह जेल जैसा रूप ले लेता है। यह जेल आंतों की अंदरूनी परत को चिकनाई देता है, जिससे पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। इसे सुबह की स्मूदी, ओट्स, दही या गुनगुने पानी में मिलाकर लेना सबसे असरदार होता है।

सर्दियों के मौसम में ताजी हरी मटर और सालभर खाए जाने वाले अंकुरित मूंग या मोठ प्रोटीन-फाइबर कॉम्बो के लिए अचूक विकल्प हैं। जब आप दालों को अंकुरित (स्प्राउट) करते हैं, तो उनके पोषक तत्वों का अवशोषण शरीर के लिए कई गुना आसान हो जाता है।

  • पोषण का स्तर: एक कप पकी हुई हरी मटर में लगभग 9 ग्राम प्रोटीन और 9 ग्राम फाइबर मिलता है। वहीं अंकुरित मूंग की एक कटोरी में 7 से 8 ग्राम प्रोटीन और 5 से 6 ग्राम फाइबर आसानी से मिल जाता है।

  • फायदे: अंकुरित अनाज में पाचक एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं, जिससे गैस या अपच की समस्या नहीं होती। सुबह के नाश्ते में हल्का उबला हुआ या कच्चा स्प्राउट्स सलाद नींबू और खीरे के साथ खाने से दिनभर ऊर्जा का स्तर बना रहता है।

यदि आप नाश्ते में मैदे या अत्यधिक तैलीय चीजों के विकल्प तलाश रहे हैं, तो रोल्ड ओट्स और साबुत गेहूं का दलिया सबसे मुफीद साबित होगा।

  • पोषण का स्तर: एक कटोरी पके हुए ओट्स या दलिया से आपको लगभग 6 से 7 ग्राम प्रोटीन और 4 से 5 ग्राम खास तरह का सॉल्युबल फाइबर जिसे ‘बीटा-ग्लूकन’ (Beta-glucan) कहते हैं, प्राप्त होता है।

  • फायदे: बीटा-ग्लूकन फाइबर रक्त में ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे भोजन के बाद अचानक ब्लड शुगर नहीं बढ़ती। इसे दूध, मेवों और फलों के साथ मीठा बनाकर या सब्जियों के साथ नमकीन खिचड़ी के रूप में पकाकर खाया जा सकता है।

यदि आप अपनी दैनिक डाइट में इन 5 चीजों को बारी-बारी से शामिल करते हैं, तो आपको महंगे प्रोटीन पाउडर या फाइबर सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वयस्कों को रोजाना औसतन 25 से 35 ग्राम फाइबर और प्रति किलो वजन के हिसाब से 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। जब ये दोनों पोषक तत्व एक साथ थाली में मौजूद रहते हैं, तो मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, शरीर सुडौल रहता है और पेट बिना किसी परेशानी के सुचारू रूप से साफ होता रहता है।