
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार (उत्तराखंड) तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
इस महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड परियोजना के निर्माण पर लगभग ₹10,761 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। इस विस्तार के पूरा होने के बाद गंगा के तट पर बसी देश की दो सबसे बड़ी कुंभ नगरियां—प्रयागराज और हरिद्वार—एक आधुनिक, हाई-स्पीड और एक्सेस-कंट्रोल्ड (प्रवेश नियंत्रित) एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के जरिए सीधे एक-दूसरे से जुड़ जाएंगी।
130 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: क्या है प्रोजेक्ट का स्वरूप?
कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई कार्ययोजना के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे के इस विस्तार की कुल लंबाई लगभग 130 किलोमीटर होगी।
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रूट का भौगोलिक विभाजन: इस 130 किमी लंबे रूट का लगभग 100 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में और शेष 30 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड राज्य की सीमा में पड़ेगा।
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6-लेन से 8-लेन विस्तार क्षमता: यह एक्सप्रेसवे शुरुआत में 6-लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनेगा, जिसे भविष्य में ट्रैफिक घनत्व बढ़ने पर आसानी से 8-लेन तक अपग्रेड किया जा सकेगा।
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यूपी-उत्तराखंड एमओयू (MoU): परियोजना के अंतर-राज्यीय हिस्से के निर्माण और समन्वय के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच जल्द ही एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया जाएगा।
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100% राज्य वित्तपोषित: इस परियोजना पर होने वाला ₹10,761 करोड़ का पूरा वित्तीय भार उत्तर प्रदेश सरकार स्वयं वहन करेगी; इसमें केंद्र सरकार की कोई प्रत्यक्ष वित्तीय हिस्सेदारी नहीं है। एक्सप्रेसवे से प्राप्त होने वाले टोल राजस्व की वसूली भी यूपी सरकार द्वारा ही की जाएगी।
बिजनौर से हरिद्वार और लखनऊ का सफर होगा सुपरफास्ट
वर्तमान समय में उत्तराखंड सीमा से सटे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए मुसाफिरों और मालवाहक वाहनों को प्रमुख रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार NH-34) के मिश्रित ट्रैफिक और भीड़भाड़ पर निर्भर रहना पड़ता है।
गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार से न केवल बिजनौर से हरिद्वार की यात्रा का समय घटकर आधा रह जाएगा, बल्कि बिजनौर सीधे गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादों के तेज परिवहन, लॉजिस्टिक्स हब्स और क्षेत्रीय व्यापार को भारी गति मिलेगी।
दो पावन कुंभ नगरियों के बीच बनेगा सीधा ‘आध्यात्मिक एक्सप्रेसवे’
सनातन परंपरा में प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) और हरिद्वार (हर की पौड़ी) का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व सर्वोपरि है। कुंभ, महाकुंभ, अर्धकुंभ, कांवड़ यात्रा और सामान्य दिनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु इन दोनों तीर्थ स्थलों के बीच आवागमन करते हैं।
अब तक प्रयागराज से हरिद्वार जाने के लिए श्रद्धालुओं को कई अलग-अलग स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे से गुजरना पड़ता था, जिसमें लंबा समय और जाम की समस्या झेलनी पड़ती थी। गंगा एक्सप्रेसवे के सीधे हरिद्वार पहुंचने से दोनों पावन शहरों के बीच निर्बाध और सुरक्षित कॉरिडोर तैयार होगा। श्रद्धालु कुछ ही घंटों में प्रयागराज से हरिद्वार का सफर बिना किसी ट्रैफिक रुकावट के पूरा कर सकेंगे।
धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई उड़ान
इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखने को मिलेंगे:
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टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर: हरिद्वार, ऋषिकेश, बिजनौर, गढ़मुक्तेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में होटल, रिजॉर्ट, वेलनेस सेंटर और टूरिज्म आधारित व्यवसायों में रिकॉर्ड निवेश आएगा।
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प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार: एक्सप्रेसवे के निर्माण चरण से लेकर इसके संचालन तक हजारों स्थानीय युवाओं को इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और वे-साइड एमिनिटीज (Way-side Amenities) में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
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किसानों को लाभ: बिजनौर, अमरोहा, संभल और मुजफ्फरनगर के किसानों के लिए अपने फल, सब्जियां, खाद्यान्न और गुड़-चीनी को राष्ट्रीय मंडियों और उत्तराखंड के बाजारों तक पहुंचाना आसान और किफायती हो जाएगा।
डीपीआर (DPR) और आगे के निर्माण की रूपरेखा
योगी कैबिनेट की औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया की तैयारी तेज कर दी है।
सरकार का लक्ष्य इस ग्रीनफील्ड लिंक के डीपीआर, टेंडरिंग और अलाइनमेंट सर्वे को रिकॉर्ड समय में पूरा कर निर्माण कार्य शुरू कराना है, ताकि समयबद्ध तरीके से उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को देश के सबसे आधुनिक धार्मिक व आर्थिक कॉरिडोर के रूप में स्थापित किया जा सके।
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