पेट की सूजन और लूज मोशन से हैं परेशान? अल्सरेटिव कोलाइटिस में तुरंत छोड़ दें ये 12 चीजें, वरना पड़ेगा भारी

आज के खराब खानपान और तनावपूर्ण लाइफस्टाइल के कारण पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। इनमें से एक बेहद गंभीर और कष्टदायक स्थिति है ‘अल्सरेटिव कोलाइटिस’ (Ulcerative Colitis), जो एक प्रकार की इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लगातार पेट में सूजन, ऐंठन, बार-बार लूज मोशन और मल के साथ खून आने जैसी भयंकर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स का मानना है कि इस बीमारी में दवाइयों के साथ-साथ आपकी डाइट का बहुत बड़ा रोल होता है। यदि आप समय रहते अपने खानपान में सुधार नहीं करते हैं और कुछ खास चीजों से दूरी नहीं बनाते हैं, तो आपकी सेहत तेजी से बिगड़ सकती है। आइए जानते हैं उन 12 चीजों के बारे में जिनसे अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को तुरंत तौबा कर लेनी चाहिए।

1. अत्यधिक मसालेदार और तीखा खाना

अगर आपको पेट में सूजन या कोलाइटिस की शिकायत है, तो लाल मिर्च, हरी मिर्च और तेज मसालों से बने व्यंजनों से तुरंत दूरी बना लीजिये। तीखा खाना आंतों की अंदरूनी परत (Mucosa) को बुरी तरह जला देता है, जिससे ब्लीडिंग और दर्द की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।

2. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स (लेक्टोज)

कई बार अल्सरेटिव कोलाइटिस के मरीजों को लेक्टोज पचाने में दिक्कत होती है। दूध, पनीर, मक्खन और चीज का सेवन करने से आंतों में गैस, सूजन और लूज मोशन की समस्या बहुत तेजी से बढ़ जाती है, इसलिए प्लांट-बेस मिल्क का विकल्प चुनें।

3. डीप फ्राई और जंक फूड

समोसे, कचौरी, बर्गर और फ्रेंच फ्राइज़ जैसी तली-भुनी चीजें पचाने में बहुत भारी होती हैं। इनमें मौजूद अनहेल्दी फैट आंतों में सूजन (Gut Inflammation) को और अधिक भड़का देते हैं, जिससे पाचन तंत्र पूरी तरह चरमरा जाता है।

4. कैफीनयुक्त ड्रिंक्स (चाय, कॉफी और सोडा)

हद से ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीने की आदत को तुरंत छोड़ दें। कैफीन आंतों को उत्तेजित करता है, जिससे डायरिया और पेट में मरोड़ उठने की समस्या कई गुना बढ़ जाती है।

5. आर्टिफिशियल स्वीटनर्स और कोल्ड ड्रिंक्स

बाजार में मिलने वाली डाइट ड्रिंक्स और शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में ऐसे केमिकल्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स होते हैं, जो पेट के गुड बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। इससे पेट फूलना और गैस की भयंकर दिक्कत पैदा होती है।

6. रिफाइंड आटा (मैदा) और उससे बनी चीजें

मैदे से बनी ब्रेड, बिस्कुट और नूडल्स में फाइबर की मात्रा बिल्कुल शून्य होती है। यह आंतों में चिपक जाते हैं और कब्ज या लूज मोशन के चक्र को बिगाड़ देते हैं, जिससे आंतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

7. बीन्स, राजमा और छोले जैसी दालें

हालांकि फलियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन अल्सरेटिव कोलाइटिस के एक्टिव फेज में राजमा, छोले और उड़द की दाल खाने से भारी मात्रा में गैस बनती है और पेट फूलने की समस्या गंभीर रूप ले लेती है।

8. कच्ची सब्जियां और सलाद

सलाद सेहत के लिए बढ़िया माना जाता है, लेकिन अल्सरेटिव कोलाइटिस में कच्ची सब्जियां (जैसे पत्ता गोभी, ककड़ी, मूली) पचाना आंतों के लिए बहुत मुश्किल होता है। हमेशा सब्जियों को उबालकर या भाप में पकाकर ही खाएं।

9. पैकेटबंद और प्रिजर्वेटिव वाले फूड्स

डिब्बाबंद सूप, सॉस और चिप्स में खतरनाक केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो आंतों के छालों (Ulcers) को और ज्यादा गहरा कर देते हैं। इनसे हमेशा दूरी बनाकर रखना ही बुद्धिमानी है।

10. शराब और धूम्रपान (Alcohol & Smoking)

शराब और सिगरेट का सेवन सीधे तौर पर पाचन तंत्र और आंतों की कोशिकाओं को डैमेज करता है। यह अल्सर को ठीक होने से रोकता है और बीमारी को खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है।

11. ग्लूटेन युक्त अनाज (गेहूं और जौ)

अक्सर ग्लूटेन सेंसिटिविटी के कारण भी आंतों की सूजन बढ़ जाती है। यदि आपको गेहूं खाने के बाद पेट में ज्यादा दिक्कत महसूस होती है, तो डॉक्टर की सलाह से ग्लूटेन फ्री डाइट अपनाएं।

12. बीज और छिलके वाले फल

अमरूद, टमाटर या खीरे के बीज आंतों के उन हिस्सों में फंस सकते हैं जहां पहले से ही छाले या सूजन मौजूद है। इससे दर्द और ब्लीडिंग बढ़ सकती है, इसलिए हमेशा बीज और छिलका उतारकर ही फल खाएं। लखनऊ, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के गैस्ट्रो अस्पताल के डॉक्टर भी मरीजों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह देते हैं।