News India Live, Digital Desk: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती की घोषणा की थी। इस फैसले के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि इसके पीछे का असली कारण क्या है और क्या भविष्य में तेल और सस्ता होगा? अब सरकार ने संसद और सार्वजनिक मंचों के जरिए इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल चुनावी गणित नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की उथल-पुथल से आम आदमी को बचाने के लिए लिया गया एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
आम जनता को कितनी मिली राहत? समझें पूरा गणित
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा असर सीधे आम आदमी की रसोई और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ा है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी कम होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 5 से 10 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई थी। इस कटौती का उद्देश्य माल ढुलाई (Logistics) की लागत को कम करना था, ताकि बाजार में रोजमर्रा की चीजों जैसे सब्जी, फल और राशन के दाम न बढ़ें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार यह कदम न उठाती, तो महंगाई दर (Inflation Rate) काबू से बाहर हो सकती थी।
वैश्विक कच्चे तेल की चुनौती और सरकारी खजाना
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव भरी बनी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। केंद्र सरकार के मुताबिक, एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने से सरकारी खजाने पर लाखों करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है, लेकिन जनता को ‘प्राइस शॉक’ से बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता थी। तेल कंपनियों के घाटे और आम आदमी के हितों के बीच संतुलन बिठाने के लिए ही ड्यूटी में यह फेरबदल किया गया है।
क्या आगे और कम होंगे तेल के दाम? जानिए क्या है संकेत
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी (GST) के दायरे में लाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हालांकि, सरकार ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन यह संकेत जरूर दिए हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो तेल कंपनियां कीमतों में और कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को दे सकती हैं। फिलहाल, राज्यों से भी वैट (VAT) कम करने की अपील की जा रही है ताकि देश के हर कोने में तेल की कीमतें एक समान स्तर पर आ सकें।
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