
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पेंशन कम्यूटेशन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अक्सर रिटायरमेंट के समय या उसके बाद पेंशनधारक इस उलझन में रहते हैं कि उनकी पेंशन का कम्यूटेशन कानूनी रूप से किस तारीख को अंतिम यानी फाइनल (Absolute) माना जाता है। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoP&PW) ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन का कम्यूटेशन) नियम, 1981 (CCS Commutation of Pension Rules, 1981) के प्रावधानों पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए विभिन्न परिस्थितियों के तहत कम्यूटेशन के प्रभावी होने की सटीक तारीखों को स्पष्ट कर दिया है।
पेंशन कम्यूटेशन की प्रभावी तारीख तय होना इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी आधार पर एकमुश्त मिलने वाली कम्यूटेड वैल्यू की गणना की जाती है और 15 साल बाद पेंशन बहाली की उल्टी गिनती शुरू होती है। नई दिल्ली स्थित कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत आने वाले इस विभाग ने अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए इन नियमों को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है।
केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन का कम्यूटेशन) नियम, 1981 के नियम 5 के अंतर्गत किसी भी सरकारी कर्मचारी को यह अधिकार मिलता है कि वह अपनी बेसिक पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त राशि (Lump sum) के रूप में ले सकता है। कर्मचारी चाहें तो 40 फीसदी से कम हिस्से का भी चयन कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की मूल मासिक पेंशन 50,000 रुपये निर्धारित हुई है और वह 40 प्रतिशत कम्यूटेशन का विकल्प चुनता है, तो 20,000 रुपये के बदले उसे तय कम्यूटेशन फॉर्मूले के अनुसार एकमुश्त पूंजीगत राशि मिल जाती है। इसके बाद संबंधित पेंशनर को हर महीने 30,000 रुपये की घटी हुई बेसिक पेंशन प्राप्त होती है। ध्यान रहे कि महंगाई राहत (Dearness Relief) की गणना हमेशा पूरी 50,000 रुपये की मूल पेंशन पर ही जारी रहती है।
DoP&PW के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, कम्यूटेशन के फाइनल होने की तारीख इस बात पर निर्भर करती है कि आवेदन कब दिया गया है और क्या मामले में मेडिकल जांच की आवश्यकता है या नहीं।
सुपरएनुएशन (Superannuation) पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी यदि रिटायरमेंट से पहले फॉर्म-1 में आवेदन जमा करते हैं, तो उनकी पेंशन कम्यूटेशन सेवानिवृत्ति की तारीख के ठीक अगले दिन से फाइनल मानी जाती है। वहीं यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद बिना मेडिकल जांच वाली श्रेणी में फॉर्म-1ए के तहत आवेदन करता है, तो जिस तारीख को हेड ऑफ ऑफिस (Head of Office) को विधिवत भरा हुआ आवेदन पत्र प्राप्त होता है, उसी तारीख से कम्यूटेशन फाइनल हो जाता है।
दूसरी ओर, जिन मामलों में मेडिकल बोर्ड या मेडिकल अथॉरिटी द्वारा परीक्षण अनिवार्य होता है, वहां प्रक्रिया थोड़ी अलग है। ऐसे मामलों में जब सक्षम मेडिकल अथॉरिटी फॉर्म-4 के पार्ट-3 पर अपने हस्ताक्षर कर देती है और आवेदक को मेडिकली फिट घोषित करती है, उसी हस्ताक्षर की तारीख को कम्यूटेशन फाइनल माना जाता है। इसके अलावा, यदि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी ने फॉर्म-2 के तहत आवेदन किया है, तो पेंशन वितरण प्राधिकारी (बैंक या ट्रेजरी) को सूचना मिलने की तिथि प्रासंगिक बनती है।
कम्यूटेशन के तहत काटी जाने वाली पेंशन की राशि आजीवन नहीं कटती है। सीसीएस (कम्यूटेशन ऑफ पेंशन) रूल्स, 1981 के नियम 10-A के अनुसार, जिस दिन से पेंशन में वास्तविक कटौती शुरू होती है, उसके पूरे 15 वर्ष (180 महीने) बीत जाने के बाद कम्यूट किया गया हिस्सा स्वतः बहाल (Restore) कर दिया जाता है।
DoP&PW ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया है कि 15 साल की इस समय-सीमा की गणना हर मामले में स्वतः रिटायरमेंट की तारीख से नहीं होती। इसकी गिनती उस महीने या तारीख से शुरू होती है जब पेंशन से वास्तव में कम्यूटेशन की राशि कटनी शुरू हुई हो या जब एकमुश्त राशि का भुगतान जारी किया गया हो। 15 वर्ष पूरे होते ही पेंशनर को पुनः अपनी पूरी 100% मूल पेंशन मिलने लगती है।
नियम 12 के अंतर्गत सामान्य अधिवर्षिता (Superannuation) पर सेवानिवृत्त होने वाले, रिटायरिंग पेंशन पाने वाले, या सरकारी उपक्रमों में अवशोषण के बाद पेंशन पाने वाले कर्मचारियों को मेडिकल जांच से छूट मिलती है। बशर्ते उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर निर्धारित प्रारूप में विधिवत आवेदन जमा कर दिया हो।
यदि कोई पेंशनधारक सेवानिवृत्ति के 1 वर्ष के भीतर आवेदन नहीं कर पाता और एक साल की समय-सीमा समाप्त होने के बाद कम्यूटेशन मांगता है, तो उसे अनिवार्य रूप से मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा। इसके अतिरिक्त, अमान्य पेंशन (Invalid Pension), अनुकंपा भत्ता (Compassionate Allowance) और अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement as penalty) पाने वाले कर्मचारियों के मामलों में भी मेडिकल बोर्ड की जांच और फिटनेस रिपोर्ट के बिना कम्यूटेशन को मंजूरी नहीं दी जाती।
यदि किसी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध सेवानिवृत्ति के समय कोई अनुशासनात्मक या न्यायिक कार्रवाई (Departmental or Judicial Proceedings) लंबित है और उसे केवल प्रोविजनल पेंशन (Provisional Pension) दी जा रही है, तो वह इस अवधि के दौरान पेंशन कम्यूट कराने का पात्र नहीं होता।
DoP&PW के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब तक विभागीय जांच या न्यायिक मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता और अंतिम नियमित पेंशन का आदेश जारी नहीं होता, तब तक कम्यूटेशन स्वीकार नहीं किया जा सकता। कार्यवाही समाप्त होने और नियमित पेंशन अधिकृत होने के बाद कर्मचारी नियम 13 के तहत आवेदन कर सकता है। यदि कर्मचारी नियमित पेंशन के आदेश जारी होने के 1 वर्ष के भीतर आवेदन कर देता है, तो उसे बिना किसी मेडिकल परीक्षण के कम्यूटेशन का पूरा लाभ प्रदान किया जाता है।
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