पायलटों के लिए बदलेंगे DGCA के नियम! अब 10% की जगह सभी का हो सकता है ‘डोप टेस्ट’

फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 में हवा के बीच आई अचानक गिरावट (Altitude Drop) और उसके बाद पायलट-इन-कमांड के ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने की घटना ने देश के एविएशन सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर घटना के बाद केंद्र सरकार और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने विमान सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने के लिए बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय अब वाणिज्यिक एयरलाइनों के पायलटों के लिए लागू डोप टेस्टिंग प्रोटोकॉल को पूरी तरह बदलने पर विचार कर रहा है।

नागरिक उड्डयन मंत्री का बयान: 10% से 100% रैंडम टेस्टिंग पर विचार

नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया है कि सरकार पायलटों के डोप टेस्ट के दायरे को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। वर्तमान डीजीसीए नियमों के तहत, प्रत्येक एयरलाइन को अपने कुल पायलट वर्कफोर्स के केवल 10 प्रतिशत हिस्से का सालाना रैंडम आधार पर साइकोएक्टिव पदार्थों (ड्रग्स/डोप) के लिए परीक्षण करना अनिवार्य होता है।

सरकार की इस पर राय है कि साल भर के दौरान हर पायलट (100% वर्कफोर्स) को किसी न किसी औचक (रैंडम) समय पर इस डोप टेस्ट से अनिवार्य रूप से गुजरना चाहिए। मंत्रालय इस समय सभी एयरलाइंस, पायलट एसोसिएशनों और उद्योग के प्रमुख हितधारकों के साथ इस प्रस्ताव पर विस्तृत बातचीत कर रहा है।

सुरक्षा और ऑपरेशनल प्रभाव में संतुलन साधने की चुनौती

उड्डयन मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि नए नियम लागू करते समय दो पहलुओं का ध्यान रखना होगा: पहला यात्रियों की उड़ान सुरक्षा (Flight Safety), जिसके साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता; और दूसरा एयरलाइंस के दैनिक संचालन (Operational Impact) पर पड़ने वाला असर।

डीजीसीए इस बात का तकनीकी और लॉजिस्टिक मूल्यांकन कर रहा है कि यदि देश भर के हजारों कमर्शियल पायलटों का शत-प्रतिशत रैंडम डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाता है, तो फ्लाइट शेड्यूल और टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को कैसे व्यवस्थित रखा जाएगा।

फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में क्या हुआ था?

गत 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 ने क्रूज के दौरान अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। इस झटके के चलते विमान में सवार कई यात्री और केबिन क्रू सदस्य घायल हो गए थे। विमान के दिल्ली में सुरक्षित उतरने के बाद नियमों के तहत जब पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट कराया गया, तो प्रारंभिक और बाद में लैब की पुष्टिकारक (Confirmatory) जांच में मुख्य पायलट मारिजुआना (गांजा/ड्रग्स) के लिए पॉजिटिव पाया गया।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) वर्तमान में इस बात की गहन जांच कर रहा है कि विमान का नीचे गिरना किसी हाइड्रोलिक तकनीकी खराबी के कारण हुआ था या फिर इसमें कॉकपिट क्रू के व्यवहार का मानवीय कारक शामिल था।

एयर इंडिया ने शुरू की सभी पायलटों की व्यापक स्क्रीनिंग

इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद, एयर इंडिया प्रबंधन ने अपनी ओर से आगे बढ़कर समूह के सभी पायलटों (Cockpit Crew) की व्यापक अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। इसके साथ ही अन्य प्रमुख घरेलू एयरलाइंस भी अपनी आंतरिक सुरक्षा समीक्षा को तेज कर चुकी हैं।

मौजूदा समय में पायलटों के लिए हर उड़ान से पहले अल्कोहल की जांच के लिए ब्रेथ एनालाइजर (BA) टेस्ट अनिवार्य है, जबकि ड्रग्स/डोप टेस्ट सिर्फ 10% के नमूने पर होता है। डीजीसीए द्वारा नए नियमों को मंजूरी दिए जाने के बाद, भारत में किसी भी कमर्शियल विमान को उड़ाने वाले हर पायलट का 100% औचक डोप टेस्ट अनिवार्य हो जाएगा, जिससे भारतीय हवाई क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता किया जा सकेगा।