पहलगाम हमले की पहली बरसी धर्म पूछकर मासूमों को उतारा मौत के घाट, आरिफ आजाकिया ने पाकिस्तान को किया बेनकाब

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News India Live, Digital Desk :  22 अप्रैल 2025… यह वह काली तारीख है जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। पहलगाम की खूबसूरत वादियों में जब भारतीय पर्यटक अपनों के साथ सुकून के पल बिता रहे थे, तब पाकिस्तान समर्थित दरिंदों ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। इस हमले की पहली बरसी से ठीक पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजाकिया ने पाकिस्तान के नापाक चेहरे से नकाब उतारते हुए इसे ‘मजहब के नाम पर किया गया आतंकवाद’ करार दिया है। आजाकिया ने दोटूक कहा कि पाकिस्तान लंबे समय तक इस मुगालते में रहा कि वह भारत पर हमले करेगा और भारत चुप रहेगा, लेकिन अब वक्त बदल चुका है।

मजहब पूछकर कत्लेआम, रूह कंपा देगी उस दिन की दास्तां

22 अप्रैल 2025 के उस दिन आतंकियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। घात लगाकर बैठे आतंकियों ने पर्यटकों को घेरकर पहले उनका धर्म पूछा, उनसे कलमा पढ़वाया और यहाँ तक कि उनकी पहचान पुख्ता करने के लिए उनके कपड़े तक उतरवाए। जब उन्हें यकीन हो गया कि पर्यटक गैर-मुस्लिम हैं, तब उन वहशियों ने 26 मासूमों को मौत के घाट उतार दिया। जाते-जाते हत्यारों ने ‘मोदी को बता देना’ जैसा संदेश देकर अपनी नफरत जाहिर की थी। आरिफ आजाकिया के मुताबिक, पीड़ितों की पहचान उनके मजहब के आधार पर करना इंसानियत के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध है।

‘सांप पालोगे तो खुद को भी डसेंगे’, आजाकिया की खरी-खरी

पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावों पर हमला करते हुए आजाकिया ने कहा कि जिन संगठनों को पाकिस्तान खत्म करने की बात करता है, वे उसकी अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की ही उपज हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर आप पड़ोसियों को डसने के लिए सांप पालते हैं, तो यह उम्मीद न रखें कि वे आपको नुकसान नहीं पहुँचाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि तालिबान जैसे संगठनों को पाकिस्तान ने संरक्षण दिया, जो आज खुद उसके लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है, समर्थन नहीं।

पीड़ितों की सिसकियां: ‘आखरी सांस तक नहीं भूलेगा वो जख्म’

पहलगाम हमले ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। पुणे की संगीता गणबोटे, जिन्होंने अपने पति कौस्तुभ को खोया, कहती हैं कि वह उस दिन की भयावहता को मरते दम तक नहीं भूल पाएंगी। वहीं, अपने पति प्रशांत कुमार सतपथी को खोने वाली प्रियदर्शिनी आचार्य आज भी न्याय और वादों के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं। प्रियदर्शिनी का कहना है कि सरकार ने आर्थिक मदद तो दी, लेकिन सरकारी नौकरी का वादा अभी भी अधूरा है, जिससे उनके बच्चे का भविष्य अधर में है। इन परिवारों के लिए वक्त जैसे 22 अप्रैल को ही ठहर गया है।

भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और खौफजदा पाकिस्तान

इस कायराना हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए ईंट का जवाब पत्थर से दिया। भारतीय सेना ने सीमा पार पीओके (PoK) में मौजूद आतंकी लॉन्चपैड्स को तबाह करते हुए 100 से अधिक आतंकियों को ढेर कर दिया। आजाकिया के अनुसार, भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया का ही नतीजा है कि पिछला पूरा साल किसी बड़े आतंकी हमले से मुक्त रहा। हालांकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ फिलहाल रुका हुआ है, लेकिन भारत ने साफ संदेश दिया है कि जरूरत पड़ने पर इसे फिर से शुरू किया जा सकता है।

घाटी में लौट रही रौनक, पर टीस अब भी बाकी

एक साल बाद श्रीनगर और पहलगाम के हालात बदल रहे हैं। घाटी में पर्यटकों की आमद फिर से बढ़ी है और लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है और स्थानीय अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर लौट रही है। लेकिन इन सबके बीच, उन 26 परिवारों के घर का सन्नाटा और उनकी आंखों के आंसू यह गवाही दे रहे हैं कि आतंकवाद ने जो घाव दिए हैं, उन्हें भरने में शायद सदियां लग जाएं।

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