परिसीमन विधेयक पर NDA को मिला DMK का साथ! सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के वॉकआउट के बीच हुआ बड़ा खेला

संसद के आगामी मॉनसून सत्र 2026 (Monsoon Session) की शुरुआत से ठीक पहले बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। सोमवार से शुरू हो रहे सत्र के सुचारू संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित इस रणनीतिक बैठक में विपक्ष ने शुरुआत में बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का तीखा विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ ही समय बाद विपक्षी नेता चर्चा के लिए वापस लौटे, जिसके बाद विधायी कार्यों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक समीकरण देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने देश के सबसे संवेदनशील ‘परिसीमन विधेयक’ (Delimitation Bill) पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को एक खास शर्त के साथ समर्थन देने के संकेत दे दिए हैं, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर डीएमके का नया रुख: दक्षिण भारत के हितों की रक्षा के लिए रखी बड़ी शर्त

सर्वदलीय बैठक में डीएमके के वरिष्ठ नेता और सांसद तिरुची शिवा ने महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के पुनर्गठन यानी परिसीमन के मुद्दे को बेहद आक्रामक तरीके से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। डीएमके की मांग है कि यह महिला आरक्षण वर्तमान निचले सदन (लोकसभा) के संख्याबल के आधार पर ही तुरंत दिया जाना चाहिए, न कि नए परिसीमन का इंतजार किया जाए। बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए तिरुची शिवा ने कहा कि परिसीमन की कवायद से दक्षिणी राज्यों (Southern States) के प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। यदि इस प्रक्रिया से दक्षिण भारत की राजनीतिक हिस्सेदारी कम होती है, तो सरकार को इस ऐतिहासिक कवायद को अगले 25 वर्षों के लिए पूरी तरह स्थगित कर देना चाहिए।

तमिलनाडु के बदले राजनीतिक समीकरण: ‘इंडिया’ गठबंधन से दूरी और कांग्रेस से अलगाव की इनसाइड स्टोरी

राजनीतिक गलियारों में डीएमके के इस बदले हुए रुख को तमिलनाडु की आंतरिक राजनीति में आए एक बड़े भूचाल से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इस साल 17 अप्रैल को डीएमके ने परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन अब पार्टी का स्टैंड पूरी तरह बदलता दिख रहा है। हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, जहां कांग्रेस ने डीएमके का हाथ छोड़कर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के साथ एक नया और मजबूत गठबंधन बना लिया है। कांग्रेस के इस कदम के बाद डीएमके ने भी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन से अपनी दूरियां बढ़ा ली हैं, जिसके कारण अब संसद में मोदी सरकार के इस महत्वाकांक्षी विधेयक पर डीएमके का रुख बेहद निर्णायक और गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी, सोनम वांगचुक का अनशन और पेपर लीक: सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस हाई-प्रोफाइल सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू समेत विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, कोडिकुनिल सुरेश और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव जैसे दिग्गज शामिल हुए। बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने के लिए कई ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों की झड़ी लगा दी। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और चोरी का मामला, लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन, देश की विदेश नीति, हालिया पेपर लीक विवाद और बेरोजगारी जैसे विषयों पर विपक्ष ने सरकार से विस्तृत जवाब और संसद में विशेष चर्चा की मांग की है।

‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर जेल: मॉनसून सत्र 2026 में आ रहा है बेहद सख्त कानून

संसद के इस मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार कई महत्वपूर्ण और नए विधायी कार्य पूरे करने के मूड में दिखाई दे रही है। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, इस सत्र में ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पेश करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह नया कानून मूल राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में एक बड़ा और कड़ा संशोधन करेगा। इस ऐतिहासिक विधेयक के माध्यम से सरकार देश के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का जानबूझकर अपमान करने, उसका अनादर करने या उसके सामूहिक गायन में किसी भी प्रकार की बाधा डालने की घटना को एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करना चाहती है, जिस पर सदन में भारी बहस होने की पूरी उम्मीद है।