परिवार ने बुलाया नहीं तो हलीशहर क्यों गईं ममता?’: जूता-चप्पल और कीचड़ हमले के बाद सुवेंदु अधिकारी का बड़ा सियासी हमला

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर से बेहद गरमा गई है और राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तथा विपक्षी दल बीजेपी के बीच सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हलीशहर दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन और कथित तौर पर जूता, चप्पल तथा कीचड़ फेंके जाने की घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कद्दावर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के इस दौरे पर बेहद तीखा सवाल उठाते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

सुवेंदु अधिकारी का तंज: परिवार ने नहीं बुलाया तो आखिर क्यों गईं मुख्यमंत्री?

सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के हलीशहर दौरे पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया है कि संबंधित परिवार ने उन्हें वहां बुलाया तक नहीं था। बीजेपी नेता का कहना है कि बिना किसी आधिकारिक आमंत्रण या बुलावा के मुख्यमंत्री का उस इलाके में जाना और फिर वहां इस तरह के कड़े विरोध का सामना करना कई बड़े राजनीतिक इशारे करता है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के दौरों को लेकर विपक्ष लगातार ममता सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सुवेंदु के इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस दौरे के पीछे की असली सियासी वजह क्या थी और क्यों जनता का एक वर्ग इतना नाराज नजर आया।

जूता, चप्पल और कीचड़ फेंकने की घटना से गरमाया पश्चिम बंगाल का सियासी माहौल

हलीशहर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले और दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर नारेबाजी करते हुए जूता, चप्पल और कीचड़ फेंकना शुरू कर दिया। इस घटना के बाद से ही राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जहां एक तरफ सत्ताधारी पार्टी इसे विपक्ष की सोची-समझी साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी और अन्य विपक्षी दल इसे जनता के सीधे आक्रोश का परिणाम करार दे रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने बंगाल की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है।