
अक्सर नौकरीपेशा और बिजनेस करने वाले लोग यह सोचते हैं कि अगर वे अपनी पत्नी या पति (Spouse) के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दें, या उनके नाम पर निवेश (Invest) कर दें, तो परिवार का टैक्स कम हो जाएगा। खासकर तब, जब पार्टनर की अपनी कोई कमाई न हो या वे बहुत कम टैक्स स्लैब में आते हों।
सुनने में यह आइडिया बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असल में इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) के नियम कुछ और ही कहानी कहते हैं। अगर आपको सही नियमों और ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ (Clubbing of Income) की जानकारी नहीं है, तो टैक्स बचाने का यह जुगाड़ आपको बहुत भारी पड़ सकता है।
क्या पार्टनर को पैसे गिफ्ट करना टैक्स-फ्री है?
बिल्कुल! इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56 के तहत, पति या पत्नी को ‘रिश्तेदार’ (Relative) माना गया है। इसका मतलब है कि आप अपने पार्टनर को कैश, चेक या एसेट के रूप में चाहे जितने पैसे गिफ्ट करें, उस पैसे पर पाने वाले को कोई टैक्स नहीं देना होता है।
लेकिन, कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पैसे देना भले ही टैक्स-फ्री हो, लेकिन जैसे ही उन पैसों को कहीं निवेश किया जाता है और उससे कमाई शुरू होती है, इनकम टैक्स के नियम पूरी तरह बदल जाते हैं।
‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ (Section 64) का खेल क्या है?
मान लीजिए आपने अपनी पत्नी को कुछ पैसे गिफ्ट किए और उन्होंने उस पैसे की एफडी (FD) करा दी, या उसे म्यूचुअल फंड्स, शेयर मार्केट या सोने में लगा दिया। अब उस निवेश से जो भी ब्याज (Interest), डिविडेंड या कैपिटल गेन (Capital Gain) मिलेगा, उस पर टैक्स आपकी पत्नी को नहीं, बल्कि आपको देना होगा।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 64 के तहत इसे ‘क्लबिंग प्रावधान’ कहते हैं। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि लोग कम टैक्स देने वाले अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर पैसा ट्रांसफर करके टैक्स की चोरी न कर सकें। निवेश से होने वाली यह कमाई आपकी अपनी इनकम में जोड़ दी जाएगी और फिर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगेगा।
ये नियम कब लागू नहीं होते? (टैक्स बचाने के सही तरीके)
कुछ खास स्थितियां ऐसी भी हैं, जहां क्लबिंग के ये नियम लागू नहीं होते और आप कानूनी तरीके से राहत पा सकते हैं:
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घर खर्च से बचाए गए पैसे (Pin Money): अगर पत्नी घर चलाने के लिए मिले खर्चों (Pin Money) में से कुछ पैसे बचाकर उसे कहीं इन्वेस्ट करती हैं, तो उससे होने वाली कमाई पर क्लबिंग का नियम लागू नहीं होता।
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खुद की काबिलियत से की गई कमाई: अगर आपका पार्टनर आपकी ही किसी फर्म या कंपनी में काम करता है और उन्हें उनकी खुद की पढ़ाई, स्किल या अनुभव के आधार पर सैलरी या कमीशन मिल रहा है, तो उनकी इनकम आपकी इनकम में नहीं जोड़ी जाएगी।
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PPF में निवेश: अगर आप अपनी पत्नी के नाम से पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) खाता खोलकर उसमें पैसा जमा करते हैं, तो पीपीएफ पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। इसलिए, यहां क्लबिंग का कोई नुकसान नहीं होता।
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कमाई पर होने वाली कमाई: आपने जो पैसा गिफ्ट किया, उससे होने वाली पहली कमाई (ब्याज) आपकी इनकम में जुड़ेगी। लेकिन, अगर आपकी पत्नी उस ‘ब्याज के पैसे’ को दोबारा कहीं निवेश करके और कमाई करती हैं, तो उस ‘दूसरी कमाई’ पर यह नियम लागू नहीं होता और वह टैक्स से बच जाती है।
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